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Kaithal News: आया भाई-बहन का त्योहार, बाजार हुए गुलजार
Sun, 20 Aug 2023 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 20 Aug 2023 11:48 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
राजौंद। रक्षा बंधन को लेकर बाजारों में चहल पहल शुरू हो चुकी है। बहनों की ओर से जहां भाईयों को डाक द्वारा राखियां व रक्षा सूत्र भेजे जा रहे है। वहीं दुकानों पर सजी भिन्न भिन्न प्रकार की राखियां हर किसी को अपनी और आकर्षित कर रही है।
राखी पर्व पर भी महंगाई का साया पड़ता दिखाई दे रहा है। इसके बाद भी बहनेंराखियां खरीद रही हैं। क्योंकि भाई-बहन के पवित्र प्रेम के रिश्ते को धन दौलत से तोलकर नहीं देखा जा सकता।बाजारों में महिलाओं की चहल-पहल शुरू हो चुकी है। बाजार में इस समय पांच रुपये से लेकर 300 रुपये तक की कीमती राखियां मिल रही हैं।
वहीं रुपयों व चांदी की राखियों का प्रचलन भी बढ़ रहा है। बहनों के उत्साह के आगे राखियों के महंगे दाम भी उनके उत्साह को रोक नहीं पा रहे हैं। आज रेशम की डोर की जगह फैंसी राखियों का चलन ज्यादा बढ़ गया है। मेन बाजार के दुकानदार सुभाष रावल, ईश्वर, रमेश, नीरज, गोल्ड़ी बंसल, वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि पहले परांदा ही रक्षा सूत्र होता था। इसी को कलाई पर बांध रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता था।
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आज बाजार में रतन जड़ित नग, स्टोन आदि विभिन्न फैंसी राखियों की डिमांड अधिक बढ़ रही है। साथ ही नग से जड़ी रेशम की डोरियां भी बहने खूब खरीद रही हैं। उन्होंने बताया कि बाजार में महंगी व सस्ती हर प्रकार की राखियां उपलब्ध हैं। फिर भी अधिकतर महिलाएं परम्परागत राखी की मांग कर रही हैं जो कुछ दुकानों पर ही उपलब्ध हैं।
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राजौंद। रक्षा बंधन को लेकर बाजारों में चहल पहल शुरू हो चुकी है। बहनों की ओर से जहां भाईयों को डाक द्वारा राखियां व रक्षा सूत्र भेजे जा रहे है। वहीं दुकानों पर सजी भिन्न भिन्न प्रकार की राखियां हर किसी को अपनी और आकर्षित कर रही है।
राखी पर्व पर भी महंगाई का साया पड़ता दिखाई दे रहा है। इसके बाद भी बहनेंराखियां खरीद रही हैं। क्योंकि भाई-बहन के पवित्र प्रेम के रिश्ते को धन दौलत से तोलकर नहीं देखा जा सकता।बाजारों में महिलाओं की चहल-पहल शुरू हो चुकी है। बाजार में इस समय पांच रुपये से लेकर 300 रुपये तक की कीमती राखियां मिल रही हैं।
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वहीं रुपयों व चांदी की राखियों का प्रचलन भी बढ़ रहा है। बहनों के उत्साह के आगे राखियों के महंगे दाम भी उनके उत्साह को रोक नहीं पा रहे हैं। आज रेशम की डोर की जगह फैंसी राखियों का चलन ज्यादा बढ़ गया है। मेन बाजार के दुकानदार सुभाष रावल, ईश्वर, रमेश, नीरज, गोल्ड़ी बंसल, वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि पहले परांदा ही रक्षा सूत्र होता था। इसी को कलाई पर बांध रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता था।
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आज बाजार में रतन जड़ित नग, स्टोन आदि विभिन्न फैंसी राखियों की डिमांड अधिक बढ़ रही है। साथ ही नग से जड़ी रेशम की डोरियां भी बहने खूब खरीद रही हैं। उन्होंने बताया कि बाजार में महंगी व सस्ती हर प्रकार की राखियां उपलब्ध हैं। फिर भी अधिकतर महिलाएं परम्परागत राखी की मांग कर रही हैं जो कुछ दुकानों पर ही उपलब्ध हैं।