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Kaithal News: अक्तूबर में उठनी थी डोली उठ गई अर्थी
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मृतका परविंद्र कौर, मनीषा और घायल सिमरने के परिजन विलाप करते हुए । परिजन
अंबाला सिटी। नन्यौला में हुए हादसे में तीनों युवतियों के परिवारों को हिलाकर रख दिया है। तीन युवतियां सगी बहने थीं। इसमें सबसे बड़ी बहन 24 वर्षीय परविंद्र कौर का रिश्ता फरवरी में पंजाब के टकाला गांव में हुआ था। रिश्ता होने के बाद से घर परिवार के सदस्य खुश थे और शादी की तैयारियों में जुटे थे। वहीं परविंद्र कौर अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए कम समय में कौशल आधारित कोर्सों की तलाश कर रही थी।
एक दिन किसी ने बताया कि नन्यौला के कम्युनिटी सेंटर में निशुल्क ब्यूटी पार्लर का कोर्स कराया जा रहा है। ऐसे में परविंद्र इस कोर्स को करके अपने पैरों पर खड़ी हो सकती थी। उसके मन में विचार आया कि क्यों न बहनों को भी कोर्स कराया जाए। इसके बाद वह अपनी बहनों मनीषा और सिमरन को लेकर नन्यौला के लिए निकली थी।
परविंद्र ने बीए की पढ़ाई कर रखी थी, लेकिन उसे नहीं पता था कि यह उसका आखिरी दिन होगा। परविंद्र के पिता की भी मौत हो चुकी है। उसकी माता जसबीर कौर मनरेगा में मजदूरी का काम करती हैं। परविंद्र ने अपनी माता के लिए सपना देखा था कि वह कुछ बन जाएगी तो अपनी माता का सहारा बनेगी, लेकिन उससे पहले ही यह घटना हो गई।
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मृतका 22 वर्षीय काजल उर्फ मनीषा के माता पिता भी मजदूरी करते हैं। मनीषा भी अपनी बहनों के साथ नन्यौला में कोर्स के लिए आवेदन करने आई थी। मनीषा ने भी बीए तक पढ़ाई की थी। मनीषा की बड़ी बहन मनप्रीत की तीन वर्ष पहले ही शादी हुई थी। मनीषा का छोटा भाई सुखचैन ने 12वीं की पढ़ाई पूरी की है। धूप से बचने के लिए मनीषा भी अपनी बहनों के साथ मंदिर के छज्जे के नीचे बैठकर बस का इंतजार कर रही थी इसी दौरान छज्जा गिर गया और मनीषा और परविंद्र की मौत हो गई।
घायल 17 वर्षीय सिमरन के चाचा बिट्टू ने बताया कि सिमरन इन सब में सबसे छोटी थी। उसे उसके फूफा बलकार सिंह ने गोद लिया था और एक पिता से बढ़कर उसे प्यार करते हैं। सोमवार को वह भी अपनी बहनों के साथ कोर्स के लिए आवेदन करने गई थी। सिमरन ने हाल ही में 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की है। इस हादसे के दौरान उसे हाथ पैरों पर चोटें आई। उसकी जान इस हादसे में बाल-बाल बच गई।
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एक दिन किसी ने बताया कि नन्यौला के कम्युनिटी सेंटर में निशुल्क ब्यूटी पार्लर का कोर्स कराया जा रहा है। ऐसे में परविंद्र इस कोर्स को करके अपने पैरों पर खड़ी हो सकती थी। उसके मन में विचार आया कि क्यों न बहनों को भी कोर्स कराया जाए। इसके बाद वह अपनी बहनों मनीषा और सिमरन को लेकर नन्यौला के लिए निकली थी।
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परविंद्र ने बीए की पढ़ाई कर रखी थी, लेकिन उसे नहीं पता था कि यह उसका आखिरी दिन होगा। परविंद्र के पिता की भी मौत हो चुकी है। उसकी माता जसबीर कौर मनरेगा में मजदूरी का काम करती हैं। परविंद्र ने अपनी माता के लिए सपना देखा था कि वह कुछ बन जाएगी तो अपनी माता का सहारा बनेगी, लेकिन उससे पहले ही यह घटना हो गई।
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मृतका 22 वर्षीय काजल उर्फ मनीषा के माता पिता भी मजदूरी करते हैं। मनीषा भी अपनी बहनों के साथ नन्यौला में कोर्स के लिए आवेदन करने आई थी। मनीषा ने भी बीए तक पढ़ाई की थी। मनीषा की बड़ी बहन मनप्रीत की तीन वर्ष पहले ही शादी हुई थी। मनीषा का छोटा भाई सुखचैन ने 12वीं की पढ़ाई पूरी की है। धूप से बचने के लिए मनीषा भी अपनी बहनों के साथ मंदिर के छज्जे के नीचे बैठकर बस का इंतजार कर रही थी इसी दौरान छज्जा गिर गया और मनीषा और परविंद्र की मौत हो गई।
घायल 17 वर्षीय सिमरन के चाचा बिट्टू ने बताया कि सिमरन इन सब में सबसे छोटी थी। उसे उसके फूफा बलकार सिंह ने गोद लिया था और एक पिता से बढ़कर उसे प्यार करते हैं। सोमवार को वह भी अपनी बहनों के साथ कोर्स के लिए आवेदन करने गई थी। सिमरन ने हाल ही में 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की है। इस हादसे के दौरान उसे हाथ पैरों पर चोटें आई। उसकी जान इस हादसे में बाल-बाल बच गई।

मृतका परविंद्र कौर, मनीषा और घायल सिमरने के परिजन विलाप करते हुए । परिजन