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Kaithal News: पूंडरी को सब डिविजन बनाने की मांग अब तक अधूरी
Sat, 07 Sep 2024 05:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 07 Sep 2024 05:16 AM IST
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नरेंद्र राणा
पूंडरी। वर्ष 1967 में हलका बने पूंडरी विधानसभा क्षेत्र निर्दलीय प्रत्याशियों को भाया है। अब तक हुए 14 में से सात चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी जती दर्ज करने के बाद चंडीगढ़ विधानसभा में पहुंचे हैं। रणधीर गोलन के कार्यकाल में सड़कों को स्ट्रीट लाइटें लगवाने का काम तो हो गया परंतु कोई बड़ी परियोजना हलके नहीं मिल सकी।
इसके साथ ही विधायक रणधीर गोलन के कार्यकाल में पूंडरी के लोगों की सबसे पुरानी सब डिविजन बनाने की मांग पूरी नहीं हो सकी। मौजूदा विधायक रणधीर सिंह गोलन तीन बार भाजपा की सीट पर चुनाव लड़े, लेकिन चौथी बार निर्दलीय विधायक बने।
वर्ष 2014 में मोदी लहर होने के बावजूद भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़े थे, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। पूंडरी विधानसभा सीट की बात करंे तो 1996 से लेकर 2019 तक हुए विधानसभा चुनाव में लगातार निर्दलीय प्रत्याशी ही जीतते आए हैं, लेकिन इस बार इस सीट पर लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली 11 हजार 935 की लीड से समीकरण बदले हैं।
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हालांकि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में 50 हज़ार वोटों से अधिक बढ़त के बावजूद पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को यहां से हार का सामना करना पड़ा था, वहीं इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को भी अच्छी बढ़त के बाद यहां कांग्रेस का ग्राफ बढ़ा है। संवाद
कॉलेज के समय से आ गए थे राजनीति में
विधायक रणधीर सिंह गोलन काॅलेज समय से ही राजनीति में आ गए थे। छात्र संघ के चुनाव लड़े और जीते भी। उसके बाद भाजपा ज्वाइन की। वर्ष 2000, 2005, 2014 में चुनाव लड़ा लेकिन जीत नहीं सके। 2019 में भी भाजपा ने टिकट काटकर वेदपाल को दे दिया और गोलन ने निर्दलीय लड़कर चुनाव जीता। इसके बाद उन्होंने
भाजपा से अपनी नजदीकी बढ़ाई और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सहयोग से हलके में कई विकास कार्यों और परियोजनाओं को मंजूरी दिलाने में सफल रहे। जीता।
स्थापित हुए विकास के
नए आयाम
पूंडरी हलके में विकास कार्यों के विकास के नए आयाम स्थापित हुए। हलके के अधिकतर गांव लाइटों से जगमगा रहे हैं। सभी गांवों की सभी वर्गों की चौपालों में करोड़ों रुपये के कार्य हुए। पूंडरीक तीर्थ पर करोड़ों रुपये के कार्य हुए। धेरडू में करोड़ों
रुपये की लागत से नर्सिंग कॉलेज की मंजूरी दिलवाई। खेतों के रास्ते पक्के करवाए। -रणधीर गोलन, हल्का विधायक, पूंडरी।
ये पांच कार्य किए
n
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रिहायशी कॉलोनी का निर्माण।
n
सभी 24 गांवों में लगवाई स्ट्रीट लाइटें।
n पूंडरी में इंडोर-आउटडोर स्टेडियम का निर्माण।
n धेरड़ में नर्सिंग कॉलेज का निर्माण
n
हल्के में कई गांवों में पशु अस्पताल का करवाया निर्माण
जो काम नहीं हुए
n पूंडरी को नहीं मिल पाया सब डिविजन का दर्जा।
n
हल्के में नहीं हो पाया एक भी सरकार कॉलेज का निर्माण।
n पूंडरी में नहीं लग पाया कोई भी बड़ा उद्योग।
n
रेलवे से कोई भी कनेक्टिविटी न होना।
n
पानी निकासी की समस्या का समाधान न हो पाना।
हवा हवाई बातों में ही निकाल दिया कार्यकाल : भाणा
हल्का विधायक रणधीर गोलन ने पांच साल हवा हवाई बातों में ही निकाल दिए। पूंडरी कस्बे में पानी निकासी का कोई समुचित प्रबंध न होने से कस्बे की गलियों, नालियों व मुख्य सड़कों पर पानी खड़ा रहता है। जिन लाइटों का विधायक हर भाषण में चर्चा करते रहते। उनमें से आधी लाइटें बंद पड़ी हैं। विधायक पूंडरीक तीर्थ के पार्क व तीर्थ के जीर्णोद्धार के नाम पर राजनीति करता रहा लेकिन आज तक तीर्थ में पानी तक नहीं डलवा सके। जबकि तीर्थ के नाम पर करोड़ो रुपये खर्च के चर्चा रही। पूंडरी को सब डिविजन नहीं बनवा सके। हलके फरल जैसे दर्जन भर गांवों की गलियों से गुजरना दुश्वार हो चुका है। पांच साल कांग्रेस व किसानों के खिलाफ बोलते रहे। सरकारी अस्पताल पूंडरी की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। चिकित्सकों की कमी के कारण जनता परेशान रही। कोई सरकारी कालेज नहीं पूरा हो पाया। -सतबीर भाणा, कांग्रेस नेता, पूंडरी।
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पूंडरी। वर्ष 1967 में हलका बने पूंडरी विधानसभा क्षेत्र निर्दलीय प्रत्याशियों को भाया है। अब तक हुए 14 में से सात चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी जती दर्ज करने के बाद चंडीगढ़ विधानसभा में पहुंचे हैं। रणधीर गोलन के कार्यकाल में सड़कों को स्ट्रीट लाइटें लगवाने का काम तो हो गया परंतु कोई बड़ी परियोजना हलके नहीं मिल सकी।
इसके साथ ही विधायक रणधीर गोलन के कार्यकाल में पूंडरी के लोगों की सबसे पुरानी सब डिविजन बनाने की मांग पूरी नहीं हो सकी। मौजूदा विधायक रणधीर सिंह गोलन तीन बार भाजपा की सीट पर चुनाव लड़े, लेकिन चौथी बार निर्दलीय विधायक बने।
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वर्ष 2014 में मोदी लहर होने के बावजूद भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़े थे, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। पूंडरी विधानसभा सीट की बात करंे तो 1996 से लेकर 2019 तक हुए विधानसभा चुनाव में लगातार निर्दलीय प्रत्याशी ही जीतते आए हैं, लेकिन इस बार इस सीट पर लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली 11 हजार 935 की लीड से समीकरण बदले हैं।
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हालांकि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में 50 हज़ार वोटों से अधिक बढ़त के बावजूद पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को यहां से हार का सामना करना पड़ा था, वहीं इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को भी अच्छी बढ़त के बाद यहां कांग्रेस का ग्राफ बढ़ा है। संवाद
कॉलेज के समय से आ गए थे राजनीति में
विधायक रणधीर सिंह गोलन काॅलेज समय से ही राजनीति में आ गए थे। छात्र संघ के चुनाव लड़े और जीते भी। उसके बाद भाजपा ज्वाइन की। वर्ष 2000, 2005, 2014 में चुनाव लड़ा लेकिन जीत नहीं सके। 2019 में भी भाजपा ने टिकट काटकर वेदपाल को दे दिया और गोलन ने निर्दलीय लड़कर चुनाव जीता। इसके बाद उन्होंने
भाजपा से अपनी नजदीकी बढ़ाई और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सहयोग से हलके में कई विकास कार्यों और परियोजनाओं को मंजूरी दिलाने में सफल रहे। जीता।
स्थापित हुए विकास के
नए आयाम
पूंडरी हलके में विकास कार्यों के विकास के नए आयाम स्थापित हुए। हलके के अधिकतर गांव लाइटों से जगमगा रहे हैं। सभी गांवों की सभी वर्गों की चौपालों में करोड़ों रुपये के कार्य हुए। पूंडरीक तीर्थ पर करोड़ों रुपये के कार्य हुए। धेरडू में करोड़ों
रुपये की लागत से नर्सिंग कॉलेज की मंजूरी दिलवाई। खेतों के रास्ते पक्के करवाए। -रणधीर गोलन, हल्का विधायक, पूंडरी।
ये पांच कार्य किए
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रिहायशी कॉलोनी का निर्माण।
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सभी 24 गांवों में लगवाई स्ट्रीट लाइटें।
n पूंडरी में इंडोर-आउटडोर स्टेडियम का निर्माण।
n धेरड़ में नर्सिंग कॉलेज का निर्माण
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हल्के में कई गांवों में पशु अस्पताल का करवाया निर्माण
जो काम नहीं हुए
n पूंडरी को नहीं मिल पाया सब डिविजन का दर्जा।
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हल्के में नहीं हो पाया एक भी सरकार कॉलेज का निर्माण।
n पूंडरी में नहीं लग पाया कोई भी बड़ा उद्योग।
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रेलवे से कोई भी कनेक्टिविटी न होना।
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पानी निकासी की समस्या का समाधान न हो पाना।
हवा हवाई बातों में ही निकाल दिया कार्यकाल : भाणा
हल्का विधायक रणधीर गोलन ने पांच साल हवा हवाई बातों में ही निकाल दिए। पूंडरी कस्बे में पानी निकासी का कोई समुचित प्रबंध न होने से कस्बे की गलियों, नालियों व मुख्य सड़कों पर पानी खड़ा रहता है। जिन लाइटों का विधायक हर भाषण में चर्चा करते रहते। उनमें से आधी लाइटें बंद पड़ी हैं। विधायक पूंडरीक तीर्थ के पार्क व तीर्थ के जीर्णोद्धार के नाम पर राजनीति करता रहा लेकिन आज तक तीर्थ में पानी तक नहीं डलवा सके। जबकि तीर्थ के नाम पर करोड़ो रुपये खर्च के चर्चा रही। पूंडरी को सब डिविजन नहीं बनवा सके। हलके फरल जैसे दर्जन भर गांवों की गलियों से गुजरना दुश्वार हो चुका है। पांच साल कांग्रेस व किसानों के खिलाफ बोलते रहे। सरकारी अस्पताल पूंडरी की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। चिकित्सकों की कमी के कारण जनता परेशान रही। कोई सरकारी कालेज नहीं पूरा हो पाया। -सतबीर भाणा, कांग्रेस नेता, पूंडरी।