फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   The court acquitted the accused of stealing electricity by placing a wire before the meter.

Kaithal News: मीटर से पहले तार लगाकर बिजली चोरी करने वाले आरोपी को किया अदालत ने बरी

Tue, 15 Sep 2026 12:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 15 Sep 2026 12:48 AM IST
विज्ञापन
The court acquitted the accused of stealing electricity by placing a wire before the meter.
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कैथल। रामनगर में बिजली मीटर को बाईपास कर बिजली चोरी करने के आरोप में चल रहे मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. नंदिता कौशिक की अदालत ने आरोपी राम मेहर को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी का बिजली चोरी से सीधा संबंध संदेह से परे साबित नहीं कर सका।
मामले में बिजली निगम ने 25,163 रुपये के नुकसान का आकलन किया था। अभियोजन के अनुसार 24 सितंबर 2021 को एसडीओ केशव कुमार, जेई हरजीत सिंह और अन्य कर्मचारियों की टीम ने रामनगर स्थित राम मेहर के परिसर की जांच की थी। टीम का आरोप था कि मुख्य एलटी सर्विस से अतिरिक्त फ्लेक्सिबल तार जोड़कर मीटर को बाईपास किया गया था। मौके से तार हटाया गया और जांच की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई। इसके आधार पर 12 अक्तूबर 2021 को बिजली अधिनियम की धारा 135 के प्राथमिकी दर्ज की गई है।
विज्ञापन

------------
वीडियो में नहीं दिखा मीटर या बिजली कनेक्शन
अदालत ने कहा कि अभियोजन ने वीडियो को महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के रूप में पेश किया, लेकिन पेन ड्राइव में मौजूद करीब 1 मिनट 35 सेकंड की वीडियो में केवल छत पर पड़ा लाल रंग का फ्लेक्सिबल तार दिखाई देता है। इसमें न तो मीटर दिखता है, न बिजली आपूर्ति का स्रोत और न ही यह स्पष्ट होता है कि तार बिजली की लाइन से जुड़ा था। आरोपी को उस कनेक्शन का इस्तेमाल करते हुए भी वीडियो में नहीं दिखाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

----------
तार की सुरक्षित कस्टडी का रिकॉर्ड भी नहीं
अदालत ने पाया कि कथित तार और पेन ड्राइव को घटना के दिन पुलिस को नहीं सौंपा गया था। इन्हें 9 दिसंबर 2021 को जांच अधिकारी के हवाले किया गया। तार को सील किए जाने या उसकी सुरक्षित कस्टडी में रखे जाने का संतोषजनक रिकॉर्ड भी पेश नहीं हुआ। ऐसे में अदालत ने तार के साथ छेड़छाड़, बदलने या गलत पहचान की संभावना को पूरी तरह खारिज करने लायक साक्ष्य नहीं पाया।
------

65-बी प्रमाणपत्र में भी कई जानकारियां नहीं
वीडियो के संबंध में दिए गए 65-बी प्रमाणपत्र में उस मोबाइल का नंबर नहीं था, जिससे रिकॉर्डिंग की गई थी। जिस कंप्यूटर में वीडियो ट्रांसफर की गई, उसकी पहचान संबंधी जानकारी और पेन ड्राइव की पहचान संबंधी विवरण भी दर्ज नहीं था। अदालत ने कहा कि मोबाइल से कंप्यूटर और फिर पेन ड्राइव तक वीडियो पहुंचने की पूरी कड़ी पर्याप्त रूप से साबित नहीं हुई।


छह दिन बाद पुलिस को दी सूचना
अदालत ने यह भी महत्वपूर्ण माना कि जांच 24 सितंबर 2021 को हुई, जबकि पुलिस को शिकायत 11 अक्तूबर को भेजी गई और एफआईआर 12 अक्तूबर को दर्ज हुई। कोर्ट ने कहा कि बिजली चोरी की आपूर्ति काटे जाने के बाद संबंधित थाने को 24 घंटे के भीतर सूचना देने के प्रावधान के बावजूद इस मामले में देरी हुई। अदालत ने यह भी कहा कि जांच के दौरान कोई स्वतंत्र स्थानीय गवाह शामिल नहीं किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed