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Kaithal News: सूर्य-शुक्र के मिलन से पड़ेगी झुलसाने वाली गर्मी
Sat, 24 May 2025 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 24 May 2025 01:11 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल/कलायत। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के साथ रविवार (25 मई) को नौतपा की शुरुआत हो रही है। यह समय भीषण गर्मी के लिए जाना जाता है, जब सूर्य पृथ्वी के सबसे करीब होता है और तापमान चरम सीमा तक पहुंच जाता है।
पौराणिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूर्य हर वर्ष लगभग 15 दिनों तक रोहिणी नक्षत्र में रहता है, और इन दिनों के पहले नौ दिन ''नौतपा'' कहलाते हैं। इस समय को लेकर मान्यता है कि सूर्य अपनी प्रचंड गर्मी से धरती को तपाने लगता है।
चंद्रमा की भूमिका और मौसम का संकेत ः रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं, जिन्हें शीतलता का कारक माना जाता है। किंतु सूर्य के प्रभाव में आने पर चंद्रमा की यह शीतलता कम हो जाती है, और वातावरण में उष्णता बढ़ जाती है। ज्येष्ठ मास की ग्रीष्म ऋतु में नौतपा अत्यधिक गर्मी का संकेत माना जाता है।
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पं. प्रेम शंकर शास्त्री ने बताया कि नौतपा शुक्ल पक्ष में आद्रा नक्षत्र से शुरू होकर नौ नक्षत्रों तक चलता है। हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर बार नौतपा में अत्यधिक गर्मी पड़े। कभी-कभी इस दौरान तेज हवाएं, बवंडर और वर्षा की भी संभावना रहती है। इस वर्ष की ग्रह स्थिति ऐसी ही स्थितियों का संकेत दे रही है।
पौराणिक महत्व और संक्रमण पर प्रभाव ः नौतपा का उल्लेख न केवल ज्योतिषीय ग्रंथों जैसे सूर्य सिद्धांत और श्रीमद्भागवत में मिलता है, बल्कि इसका पौराणिक महत्व भी है। सनातन संस्कृति में सूर्य को देवता माना गया है और नौतपा को विशेष श्रद्धा के साथ देखा जाता है।
खगोल विज्ञान के अनुसार, इस समय सूर्य की किरणें धरती पर लंबवत पड़ती हैं, जिससे तापमान अत्यधिक बढ़ता है और संक्रामक विषाणु समाप्त हो जाते हैं। इस कारण संक्रमण का खतरा घटता है और स्वास्थ्य में सुधार होता है।
शुक्र और सूर्य की युति है गर्मी का कारण
ज्योतिषाचार्य पंडित विशाल शांडिल्य बताते हैं कि रोहिणी नक्षत्र शुक्र ग्रह से संबंधित है, जबकि शुक्र को सूर्य का शत्रु ग्रह माना गया है। जब सूर्य इस नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो सूर्य और शुक्र की युति से अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होती है। सूर्य की गर्मी और रोहिणी के जल तत्व के कारण मानसून गर्भ में आ जाता है। नौतपा ही मानसून का गर्भकाल माना जाता है। जिस समय में सूर्य रोहिणी नक्षत्र में होते हैं उस समय चन्द्रमा नौ नक्षत्रों में भ्रमण करते हैं, यही कारण है कि इसे नौतपा कहा जाता है। इस नक्षत्र में सूर्य करीब 15 दिनों तक मौजूद रहेंगे
परंपराएं और सावधानियां
पंडित रविदत्त शास्त्री ने बताया कि नौतपा के दौरान महिलाएं परंपरागत रूप से हाथ-पैरों में मेहंदी लगाती हैं, क्योंकि मेहंदी की तासीर ठंडी होती है जो गर्मी से राहत देती है। इस अवधि में अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए और जलदान करना भी पुण्यकारी माना
गया है।
उन्होंने बताया कि गर्मी से बचाव के लिए दही, मक्खन, दूध, नारियल पानी और ठंडक देने वाले फलों का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
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कैथल/कलायत। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के साथ रविवार (25 मई) को नौतपा की शुरुआत हो रही है। यह समय भीषण गर्मी के लिए जाना जाता है, जब सूर्य पृथ्वी के सबसे करीब होता है और तापमान चरम सीमा तक पहुंच जाता है।
पौराणिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूर्य हर वर्ष लगभग 15 दिनों तक रोहिणी नक्षत्र में रहता है, और इन दिनों के पहले नौ दिन ''नौतपा'' कहलाते हैं। इस समय को लेकर मान्यता है कि सूर्य अपनी प्रचंड गर्मी से धरती को तपाने लगता है।
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चंद्रमा की भूमिका और मौसम का संकेत ः रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं, जिन्हें शीतलता का कारक माना जाता है। किंतु सूर्य के प्रभाव में आने पर चंद्रमा की यह शीतलता कम हो जाती है, और वातावरण में उष्णता बढ़ जाती है। ज्येष्ठ मास की ग्रीष्म ऋतु में नौतपा अत्यधिक गर्मी का संकेत माना जाता है।
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पं. प्रेम शंकर शास्त्री ने बताया कि नौतपा शुक्ल पक्ष में आद्रा नक्षत्र से शुरू होकर नौ नक्षत्रों तक चलता है। हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर बार नौतपा में अत्यधिक गर्मी पड़े। कभी-कभी इस दौरान तेज हवाएं, बवंडर और वर्षा की भी संभावना रहती है। इस वर्ष की ग्रह स्थिति ऐसी ही स्थितियों का संकेत दे रही है।
पौराणिक महत्व और संक्रमण पर प्रभाव ः नौतपा का उल्लेख न केवल ज्योतिषीय ग्रंथों जैसे सूर्य सिद्धांत और श्रीमद्भागवत में मिलता है, बल्कि इसका पौराणिक महत्व भी है। सनातन संस्कृति में सूर्य को देवता माना गया है और नौतपा को विशेष श्रद्धा के साथ देखा जाता है।
खगोल विज्ञान के अनुसार, इस समय सूर्य की किरणें धरती पर लंबवत पड़ती हैं, जिससे तापमान अत्यधिक बढ़ता है और संक्रामक विषाणु समाप्त हो जाते हैं। इस कारण संक्रमण का खतरा घटता है और स्वास्थ्य में सुधार होता है।
शुक्र और सूर्य की युति है गर्मी का कारण
ज्योतिषाचार्य पंडित विशाल शांडिल्य बताते हैं कि रोहिणी नक्षत्र शुक्र ग्रह से संबंधित है, जबकि शुक्र को सूर्य का शत्रु ग्रह माना गया है। जब सूर्य इस नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो सूर्य और शुक्र की युति से अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होती है। सूर्य की गर्मी और रोहिणी के जल तत्व के कारण मानसून गर्भ में आ जाता है। नौतपा ही मानसून का गर्भकाल माना जाता है। जिस समय में सूर्य रोहिणी नक्षत्र में होते हैं उस समय चन्द्रमा नौ नक्षत्रों में भ्रमण करते हैं, यही कारण है कि इसे नौतपा कहा जाता है। इस नक्षत्र में सूर्य करीब 15 दिनों तक मौजूद रहेंगे
परंपराएं और सावधानियां
पंडित रविदत्त शास्त्री ने बताया कि नौतपा के दौरान महिलाएं परंपरागत रूप से हाथ-पैरों में मेहंदी लगाती हैं, क्योंकि मेहंदी की तासीर ठंडी होती है जो गर्मी से राहत देती है। इस अवधि में अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए और जलदान करना भी पुण्यकारी माना
गया है।
उन्होंने बताया कि गर्मी से बचाव के लिए दही, मक्खन, दूध, नारियल पानी और ठंडक देने वाले फलों का सेवन करने की सलाह दी जाती है।