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Kaithal News: बुराइयों से मुक्त करते हैं प्रेम व मर्यादा के बंधन
Mon, 19 Aug 2024 06:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 19 Aug 2024 06:59 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में रविवार को रक्षा बंधन का पर्व श्रद्धा व हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस मौके पर आश्रम प्रमुख रेखा बहन ने रक्षाबंधन का आध्यात्मिक रहस्य बताया। उन्होंने कहा कि यूं तो बंधन किसी को अच्छा नहीं लगता लेकिन इस रक्षाबंधन के बंधन में सभी बंधना चाहते हैं।
कार्यक्रम के दौरान कलायत क्षेत्र के विभिन्न गांव से श्रद्धालुओं ने दादी जी को पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया। आश्रम प्रमुख रेखा बहन ने रक्षाबंधन का आध्यात्मिक रहस्य बताते हुए कहा कि जब हम ईश्वर के प्रेम व मर्यादाओं के बंधन में बंध जाते हैं तो विकारों और तमाम प्रकार की बुराइयों के बंधन से मुक्त हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि विकारों से मुक्त होने और अनैतिकता से दूर रहने से स्वत: ही हमारी रक्षा होने लगती है। ऐसे में यही अदृश्य सत्ता परमात्मा की शक्ति है जो अपनी शिक्षाओं के द्वारा ही हमारी रक्षा करते हैं।
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उन्होंने कहा कि इस दिन की रस्मों का भी आध्यात्मिक रहस्य है कि तिलक आत्मिक स्मृति दिलाता है और गुणग्राही बनकर सर्व के गुणों को देखने की प्रेरणा देता है। मिठाई मीठे बोल व व्यवहार का प्रतीक है। इसके बाद रक्षा बंधन कार्यक्रम की शुरूआत बहन रेखा ने भाइयों की कलाई पर राखी बांध कर की।
इस अवसर पर अनिल सिंगला ने कहा कि रेशम की इस डोर में भाई बहन का जो पवित्र नाता बंधा हुआ है उसकी कोई कीमत नही। देखने में तो यह मात्र धागा है मगर रक्षा बंधन के दिन इसमें जो गुण समाहित होता है वह सही मायने में बहन भाई के पावन रिश्ते को इंगित करता है। उन्होंने कहा कि त्योहार चाहे कोई भी हो वह बेटियों के बिना न तो पूरा होता न ही उसमें त्योहार जैसी मिठास होती।
इस मौके पर आश्रम में आए सभी श्रद्धालुओं ने सहभोज का आनंद भी लिया। कार्यक्रम में बीके बहन रेखा, बीके बहन सपना, रणवीर राणा, बबीता, सोनम राणा, धर्मवीर, ऋषिपाल, राजू भाई, सोनम, रामनिवास, मोहित आदि मौजूद रहे।
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कलायत। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में रविवार को रक्षा बंधन का पर्व श्रद्धा व हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस मौके पर आश्रम प्रमुख रेखा बहन ने रक्षाबंधन का आध्यात्मिक रहस्य बताया। उन्होंने कहा कि यूं तो बंधन किसी को अच्छा नहीं लगता लेकिन इस रक्षाबंधन के बंधन में सभी बंधना चाहते हैं।
कार्यक्रम के दौरान कलायत क्षेत्र के विभिन्न गांव से श्रद्धालुओं ने दादी जी को पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया। आश्रम प्रमुख रेखा बहन ने रक्षाबंधन का आध्यात्मिक रहस्य बताते हुए कहा कि जब हम ईश्वर के प्रेम व मर्यादाओं के बंधन में बंध जाते हैं तो विकारों और तमाम प्रकार की बुराइयों के बंधन से मुक्त हो जाते हैं।
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उन्होंने कहा कि विकारों से मुक्त होने और अनैतिकता से दूर रहने से स्वत: ही हमारी रक्षा होने लगती है। ऐसे में यही अदृश्य सत्ता परमात्मा की शक्ति है जो अपनी शिक्षाओं के द्वारा ही हमारी रक्षा करते हैं।
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उन्होंने कहा कि इस दिन की रस्मों का भी आध्यात्मिक रहस्य है कि तिलक आत्मिक स्मृति दिलाता है और गुणग्राही बनकर सर्व के गुणों को देखने की प्रेरणा देता है। मिठाई मीठे बोल व व्यवहार का प्रतीक है। इसके बाद रक्षा बंधन कार्यक्रम की शुरूआत बहन रेखा ने भाइयों की कलाई पर राखी बांध कर की।
इस अवसर पर अनिल सिंगला ने कहा कि रेशम की इस डोर में भाई बहन का जो पवित्र नाता बंधा हुआ है उसकी कोई कीमत नही। देखने में तो यह मात्र धागा है मगर रक्षा बंधन के दिन इसमें जो गुण समाहित होता है वह सही मायने में बहन भाई के पावन रिश्ते को इंगित करता है। उन्होंने कहा कि त्योहार चाहे कोई भी हो वह बेटियों के बिना न तो पूरा होता न ही उसमें त्योहार जैसी मिठास होती।
इस मौके पर आश्रम में आए सभी श्रद्धालुओं ने सहभोज का आनंद भी लिया। कार्यक्रम में बीके बहन रेखा, बीके बहन सपना, रणवीर राणा, बबीता, सोनम राणा, धर्मवीर, ऋषिपाल, राजू भाई, सोनम, रामनिवास, मोहित आदि मौजूद रहे।