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Kaithal News: अमेरिका से 32 दिन बाद लाया गया युवक का शव
Sat, 24 May 2025 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 24 May 2025 01:12 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड। रोजगार की तलाश में अमेरिका गए पबनावा निवासी रामदयाल की वहां पर हार्ट अटैक से हुई मौत से घर में मातम छाया हुआ है। 32 दिनों के बाद मृतक के शव को पैतृक गांव लाया गया। शुक्रवार को सुबह उसके शव का गांव पबनावा में पहुंचने पर अंतिम संस्कार किया गया।
मृतक रामदयाल के पड़ोसी मुल्तान ने बताया कि रामदयाल होटल मैनेजमेंट का डिप्लोमा करने के बाद कुरुक्षेत्र में कार्य किया। फिर अमेरिका चला गया। वहां पर भी उसे होटल में नौकरी मिल गई। लेकिन 21 अप्रैल को अचानक उसे दिल का दौरा पड़ा और उसकी मौत हो गई। मुल्तान ने बताया कि रामदयाल की मौत के बाद उसके शव को अपने वतन लाने के लिए घरवालों के पास पैसों का इंतजाम नही हो सका था। विदेशों में रह रहे भारतीय युवाओं ने शव को भारत भेजने का इंतजाम किया।
शुक्रवार को सुबह उसके शव का गांव पबनावा में पहुंचने पर अंतिम संस्कार किया गया। मुल्तान ने बताया कि रामदयाल अपने पीछे पत्नी, 14 वर्षीय लड़का, दिव्यांग भाई व दिव्यांग मां को रोता बिलखता छोड़ गया। इस समय रामदयाल के परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है। उसके पिता की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। खेती का काम करते समय मां की बाजू कट गई थी। जिससे वह काम करने में असमर्थ है। उसका छोटा भाई टांग से लाचार है जिससे वह चल फिर नहीं सकता।
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ढांड। रोजगार की तलाश में अमेरिका गए पबनावा निवासी रामदयाल की वहां पर हार्ट अटैक से हुई मौत से घर में मातम छाया हुआ है। 32 दिनों के बाद मृतक के शव को पैतृक गांव लाया गया। शुक्रवार को सुबह उसके शव का गांव पबनावा में पहुंचने पर अंतिम संस्कार किया गया।
मृतक रामदयाल के पड़ोसी मुल्तान ने बताया कि रामदयाल होटल मैनेजमेंट का डिप्लोमा करने के बाद कुरुक्षेत्र में कार्य किया। फिर अमेरिका चला गया। वहां पर भी उसे होटल में नौकरी मिल गई। लेकिन 21 अप्रैल को अचानक उसे दिल का दौरा पड़ा और उसकी मौत हो गई। मुल्तान ने बताया कि रामदयाल की मौत के बाद उसके शव को अपने वतन लाने के लिए घरवालों के पास पैसों का इंतजाम नही हो सका था। विदेशों में रह रहे भारतीय युवाओं ने शव को भारत भेजने का इंतजाम किया।
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शुक्रवार को सुबह उसके शव का गांव पबनावा में पहुंचने पर अंतिम संस्कार किया गया। मुल्तान ने बताया कि रामदयाल अपने पीछे पत्नी, 14 वर्षीय लड़का, दिव्यांग भाई व दिव्यांग मां को रोता बिलखता छोड़ गया। इस समय रामदयाल के परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है। उसके पिता की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। खेती का काम करते समय मां की बाजू कट गई थी। जिससे वह काम करने में असमर्थ है। उसका छोटा भाई टांग से लाचार है जिससे वह चल फिर नहीं सकता।
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