{"_id":"6127e27d8ebc3e79c006ad62","slug":"tender-worth-rs-3-20-crore-for-three-years-for-door-to-door-garbage-collection-in-the-city-canceled-kaithal-news-knl812039186","type":"story","status":"publish","title_hn":"शहर में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का तीन साल के लिए 3.20 करोड़ रुपये का टेंडर रद्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शहर में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का तीन साल के लिए 3.20 करोड़ रुपये का टेंडर रद्द
विज्ञापन
नवंबर 2020 में शहर से कचरा एकत्रित करने के लिए 3 करोड़ 20 लाख रुपये में छोड़े गए टेंडर को आखिरकार प्रशासक नगर परिषद एवं एसडीएम संजय कुमार ने रद्द कर दिया है। साथ ही मई से जुलाई माह तक के भुगतान को रोकते हुए जुर्माने का अनुमान लगाने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। इसके अलावा एक अन्य मैनपॉवर एजेंसी को तुरंत प्रभाव से 135 लोगों से कचरा उठान का काम करवाने के लिए ईओ को केस बनाकर भेजने के निर्देश दिए हैं। उधर, एजेंसी ने कहा कि उसे कचरा डालने के लिए जगह नहीं मिली और बारिश के कारण कचरा अलग-अलग करने का काम प्रभावित हुआ। जिस कारण वे फैसले को न्यायालय में चुनौति देंगे।
नगर परिषद में डोर टू डोर कचरा एकत्रित करने के लिए बालाजी एजेंसी को नवंबर 2020 में टेंडर दिया गया था। एजेंसी को टेंडर मिलने के कुछ दिन बाद ही शिकायतें मिलनी शुरू हो गई थीं कि एनजीटी के निर्देशानुसार टेंडर की शर्तों का पालन नहीं किया जा रहा। शहरवासी जगरूप ढुल ने इस संबंध में शिकायत दी थी कि इस फर्म द्वारा कचरा एकत्रित करने का कार्य नियमानुसार नहीं किया जा रहा। न ही वाहन बढ़ाए जा रहे, न ही आरएफडी लगाई जा रही और न ही कचरे को अलग-अलग किया जा रहा। इसके अलावा इस एजेंसी का अंबाला सीएमओ की ओर से दिया गया अनुभव प्रमाण पत्र भी फर्जी है।
इस शिकायत के बाद एसडीएम एवं नगर परिषद प्रशासक संजय कुमार की अगुवाई में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी ने एजेंसी को भी सुनवाई का अवसर दिया। सुनवाई के बाद एसडीएम डा. संजय कुमार की अध्यक्षता वाली कमेटी ने फैसला लिया कि एजेंसी द्वारा शिकायत के संबंध में एजेंसी कोई तर्क प्रस्तुत नहीं कर पाई। रिकॉर्ड का अवलोकन करने व ठेकेदार की निजी सुनवाई के बाद पता चला कि सफाई का काम नियमानुसार नहीं हो रहा। जिस कारण डोर टू डोर का कचरा एकत्रित करने का काम प्रभावित है। एजेंसी द्वारा प्रस्तुत किया गया अनुभव प्रमाण पत्र भी सही नहीं है। जो नगर परिषद के साथ धोखाधड़ी की नीयत बताता है। टेंडर के अनुसार आरएफ आईडी, वाहन बढ़ाने सहित एनजीटी के निर्देशानुसार किसी भी कार्य नहीं किया गया। इसीलिए 16 नवंबर 2020 को इस फर्म को जारी किया गया वर्क ऑर्डर रद्द किया जाता है। साथ ही इस फर्म की मई से जून माह की अदायगी को लंबित रखते हुए जुर्माने का अनुमान लगाने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया जाता है। इस दौरान डोर टू डोर कचरा एकत्रित करने के लिए एक अन्य नगर परिषद में कार्यरत एजेंसी को 135 लोगों के माध्यम से यह काम करने के लिए केस बनाकर ईओ शीघ्र उन्हें प्रस्तुत करें।
विज्ञापन
ईओ नगर परिषद रविंद्र कुहाड़ ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि नगर परिषद प्रशासन ने डोर टू डोर कचरा एकत्रित करने के लिए जो टेंडर जारी किया गया था, उसे रद्द कर दिया है। उक्त कमेटी के निर्णय अनुसार आगामी कार्य किया जाएगा।
उधर, एजेंसी के ठेकेदार बलबीर सिंह ने कहा कि उन्हें नवंबर 2020 में यह टेंडर तीन साल के लिए करीब 3 करोड़ 20 लाख रुपये में दिया गया है। पिछले दो माह से बारिश के कारण कचरा एकत्रित करने का काम प्रभावित हुआ। नगर परिषद ने जो जगह दी थी, वह छोटी थी। जहां कचरा डालने का विरोध करते हुए लोगों ने ताला लगा दिया था। इसके बाद से वे लगातार परिषद के अधिकारियों से कचरा डालने की जगह की मांग कर रहे हैं। लेकिन उन्हें जगह उपलब्ध नहीं करवाई गई। उनके पास मशीन तैयार हैं। उन्होंने सभी नियमों का पालन करते हुए काम किया है। प्रमाण पत्र के संबंध में जब उन्हें टेंडर दिया था, तभी देखा जाना चाहिए था। इसमें उनका कोई कुसूर नहीं है। यदि अनुभव प्रमाण पत्र गलत था तो मौके पर ही अस्वीकृत कर दिया जाना चाहिए था। वे फैसले को कोर्ट में चुनौति देंगे।
विज्ञापन
नगर परिषद में डोर टू डोर कचरा एकत्रित करने के लिए बालाजी एजेंसी को नवंबर 2020 में टेंडर दिया गया था। एजेंसी को टेंडर मिलने के कुछ दिन बाद ही शिकायतें मिलनी शुरू हो गई थीं कि एनजीटी के निर्देशानुसार टेंडर की शर्तों का पालन नहीं किया जा रहा। शहरवासी जगरूप ढुल ने इस संबंध में शिकायत दी थी कि इस फर्म द्वारा कचरा एकत्रित करने का कार्य नियमानुसार नहीं किया जा रहा। न ही वाहन बढ़ाए जा रहे, न ही आरएफडी लगाई जा रही और न ही कचरे को अलग-अलग किया जा रहा। इसके अलावा इस एजेंसी का अंबाला सीएमओ की ओर से दिया गया अनुभव प्रमाण पत्र भी फर्जी है।
विज्ञापन
इस शिकायत के बाद एसडीएम एवं नगर परिषद प्रशासक संजय कुमार की अगुवाई में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। इस कमेटी ने एजेंसी को भी सुनवाई का अवसर दिया। सुनवाई के बाद एसडीएम डा. संजय कुमार की अध्यक्षता वाली कमेटी ने फैसला लिया कि एजेंसी द्वारा शिकायत के संबंध में एजेंसी कोई तर्क प्रस्तुत नहीं कर पाई। रिकॉर्ड का अवलोकन करने व ठेकेदार की निजी सुनवाई के बाद पता चला कि सफाई का काम नियमानुसार नहीं हो रहा। जिस कारण डोर टू डोर का कचरा एकत्रित करने का काम प्रभावित है। एजेंसी द्वारा प्रस्तुत किया गया अनुभव प्रमाण पत्र भी सही नहीं है। जो नगर परिषद के साथ धोखाधड़ी की नीयत बताता है। टेंडर के अनुसार आरएफ आईडी, वाहन बढ़ाने सहित एनजीटी के निर्देशानुसार किसी भी कार्य नहीं किया गया। इसीलिए 16 नवंबर 2020 को इस फर्म को जारी किया गया वर्क ऑर्डर रद्द किया जाता है। साथ ही इस फर्म की मई से जून माह की अदायगी को लंबित रखते हुए जुर्माने का अनुमान लगाने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया जाता है। इस दौरान डोर टू डोर कचरा एकत्रित करने के लिए एक अन्य नगर परिषद में कार्यरत एजेंसी को 135 लोगों के माध्यम से यह काम करने के लिए केस बनाकर ईओ शीघ्र उन्हें प्रस्तुत करें।
विज्ञापन
ईओ नगर परिषद रविंद्र कुहाड़ ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि नगर परिषद प्रशासन ने डोर टू डोर कचरा एकत्रित करने के लिए जो टेंडर जारी किया गया था, उसे रद्द कर दिया है। उक्त कमेटी के निर्णय अनुसार आगामी कार्य किया जाएगा।
उधर, एजेंसी के ठेकेदार बलबीर सिंह ने कहा कि उन्हें नवंबर 2020 में यह टेंडर तीन साल के लिए करीब 3 करोड़ 20 लाख रुपये में दिया गया है। पिछले दो माह से बारिश के कारण कचरा एकत्रित करने का काम प्रभावित हुआ। नगर परिषद ने जो जगह दी थी, वह छोटी थी। जहां कचरा डालने का विरोध करते हुए लोगों ने ताला लगा दिया था। इसके बाद से वे लगातार परिषद के अधिकारियों से कचरा डालने की जगह की मांग कर रहे हैं। लेकिन उन्हें जगह उपलब्ध नहीं करवाई गई। उनके पास मशीन तैयार हैं। उन्होंने सभी नियमों का पालन करते हुए काम किया है। प्रमाण पत्र के संबंध में जब उन्हें टेंडर दिया था, तभी देखा जाना चाहिए था। इसमें उनका कोई कुसूर नहीं है। यदि अनुभव प्रमाण पत्र गलत था तो मौके पर ही अस्वीकृत कर दिया जाना चाहिए था। वे फैसले को कोर्ट में चुनौति देंगे।