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Kaithal News: तबादले के दो दिन बाद ही निलंबित हुआ तहसीलदार

Sat, 19 Jul 2025 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sat, 19 Jul 2025 12:20 AM IST
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Tehsildar suspended just two days after transfer
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। गुहला के फरार तहसीलदार मंजीत मलिक पर रिश्वतखोरी और गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली के आरोपों के बीच हरियाणा सरकार ने 30 जून को उसका तबादला भिवानी जिले के तोशाम में किया था, लेकिन दो दिन बाद ही उसे निलंबित कर दिया गया। आरोपी तहसीलदार पर 10 रुपये की टिकट के नाम पर 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप है।

एसीबी की कार्रवाई के बाद मलिक फरवरी से ही फरार है। जानकारी के अनुसार, उसे कुछ समय के लिए अंबाला डीसी कार्यालय में अटैच भी किया गया था। इससे पहले नगर निकाय चुनाव के दौरान वह सीवन नगर पालिका में सहायक चुनाव अधिकारी नियुक्त था, लेकिन वह बीच में ही अवकाश लेकर गायब हो गया था।
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शिकायतकर्ता विजय कुमार के अनुसार, वह अपनी भाभी के साथ रजिस्ट्री कराने गुहला तहसील गया था। क्लर्क प्रदीप कुमार ने कहा कि 10 रुपये की टिकट लगाओ , जिसका मतलब 10 हजार रुपये रिश्वत देना था। जब विजय ने तहसीलदार से बात की तो उसने रजिस्ट्री का टोकन रद्द कर दिया और कहा कि खेवट पर स्टे है, जबकि जांच में पाया गया कि ऐसा कोई स्टे नहीं था।
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एसीबी ने रंगेहाथ पकड़ा था क्लर्क, मलिक का नाम भी उछला ः 18 फरवरी को एंटी करप्शन ब्यूरो ने तहसील कार्यालय में ट्रैप लगाकर क्लर्क प्रदीप को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा। क्लर्क ने बताया कि तहसीलदार मंजीत मलिक भी पूरे खेल में शामिल है। रजिस्ट्री कराने वालों से वसूली के लिए ''10 रुपये की टिकट'' कोड वर्ड के रूप में इस्तेमाल होती थी, जो असल में 10 हजार की रिश्वत का संकेत था।

लाल बत्ती विवाद में भी आया था नाम ः तहसीलदार मंजीत मलिक पहले भी विवादों में रह चुका है। अप्रैल 2024 में गुहला में पदभार संभालते ही वह लाल बत्ती लगी निजी गाड़ी से कार्यालय पहुंचा था। शिकायत के बाद ट्रैफिक पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 1500 रुपये का चालान काटा था। लाल बत्ती हटाने के बाद सामने आया कि गाड़ी भी उसके पिता के नाम पर पंजीकृत थी।


आरोपी गुहला के पूर्व तहसीलदार को गिरफ्तार कर लिया गया है। रजिस्ट्री करने के नाम पर रुपये मांगने के मामले में कलर्क पहले ही गिरफ्तार है। आरोपी तहसीलदार पिछले लंबे समय से फरार चल रहा था। -सूबे सिंह सैनी, कैथल एसीबी के इंस्पेक्टर
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