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Kaithal News: प्राचीन मूर्तियों की जांच करने के लिए कपिल मुनि मंदिर पहुंची टीम
Fri, 07 Feb 2025 12:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 07 Feb 2025 12:35 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। कुरुक्षेत्र 48 कोस की परिधि में आने वाले तीर्थों से प्राचीन कालीन मूर्तियों की जांच करने के लिए श्री कृष्ण संग्रहालय की टीम श्री कपिल मुनि मंदिर में पहुंची। टीम में शामिल श्रीकृष्ण संग्रहालय के संयोजक बलवान सिंह व पूर्व संयोजक राजेंद्र राणा ने बताया कि 48 कोस की परिधि में पौराणिक काल की अनेक दुर्लभ मूर्तियां हैं, जिनका संरक्षण नहीं हुआ।
गौरतलब है कि श्री कृष्ण संग्रहालय कुरुक्षेत्र में उन दुर्लभ मूर्तियों को आने वाले पर्यटकों के लिए संग्रहित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कलायत में मां कात्यायनी मंदिर के गर्भ गृह में महिषासुर मर्दिनी व गणेश की जो पाषाण काल की मूर्ति संग्रहित की गई है, वह अद्वितीय है।
इस मूर्ति की आयु के बारे में उन्होंने बताया कि यह मूर्ति कम से कम 12 सौ वर्ष पुरानी है। इसी तरह से शिव मंदिर की पाषाणकालीन चौखट को भी उन्होंने 1200 वर्ष से भी पुरानी होना बताया। बलवान सिंह ने बताया कि 48 कोस कुरुक्षेत्र की परिक्रमा में तीर्थों की खोज के लिए एक अप्रैल 1998 को पहला सर्वे हुआ था, जिसमें 134 तीर्थों की पहचान हुई थी।
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वर्तमान में कुरुक्षेत्र परिक्रमा में 182 तीर्थों को शामिल किया जा चुका है। उन्होंने बताया की इस वर्ष में इस कड़ी में 18 तीर्थों को और जोड़ा जा रहा है। जिनमें चार तीर्थ बात्ता, चौशाला, खरक पांडवा व सेगा कलायत विधानसभा के हैं।
उन्होंने बताया की कुरुक्षेत्र 48 कोस की परिक्रमा में सबसे ज्यादा 73 तीर्थ जिला कैथल से हैं। इसके अलावा 46 तीर्थ कुरुक्षेत्र, 40 तीर्थ करनाल, 22 तीर्थ जींद व एक तीर्थ पानीपत से शामिल हैं। उन्होंने कहा कि तीर्थों से जो अति प्राचीन व दुर्लभ मूर्तियां मिल रही हैं, उनके सेविनियर बनवाकर भेंट करने की प्रथा शुरू की गई है। इससे एक तो कुरुभूमि के तीर्थों की मूर्तियों के बारे में लोगों को पता चलेगा और बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी जानकारी मिलेगी।
राजेंद्र राणा ने बताया की कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की प्लानिंग है कि बाहर से आने वाले पर्यटकों को सभी तीर्थों की बजाय जो तीर्थ पूरी तरह से विकसित हैं, उनकी यात्रा के लिए पैकेज दिया जाए। कलायत तीर्थ के बारे में उन्होंने कहा कि यह सबसे दुर्लभतम तीर्थ है जहां भगवान कपिल, कात्यायनी व छोटी ईंटों का मंदिर मौजूद है। उन्होंने पुजारियों से अनुग्रह किया कि एक तो कपिल तीर्थ की सायंकालीन आरती नियमित करें। इसके अलावा मंदिर से जुड़े सोविनियर, पुस्तिकाओं व स्थानीय हथकरघा उत्पादों के मंदिर परिसर में स्टॉल लगवाए, ताकि श्रद्धालुओं को जानकारी मिल सके।
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कलायत। कुरुक्षेत्र 48 कोस की परिधि में आने वाले तीर्थों से प्राचीन कालीन मूर्तियों की जांच करने के लिए श्री कृष्ण संग्रहालय की टीम श्री कपिल मुनि मंदिर में पहुंची। टीम में शामिल श्रीकृष्ण संग्रहालय के संयोजक बलवान सिंह व पूर्व संयोजक राजेंद्र राणा ने बताया कि 48 कोस की परिधि में पौराणिक काल की अनेक दुर्लभ मूर्तियां हैं, जिनका संरक्षण नहीं हुआ।
गौरतलब है कि श्री कृष्ण संग्रहालय कुरुक्षेत्र में उन दुर्लभ मूर्तियों को आने वाले पर्यटकों के लिए संग्रहित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कलायत में मां कात्यायनी मंदिर के गर्भ गृह में महिषासुर मर्दिनी व गणेश की जो पाषाण काल की मूर्ति संग्रहित की गई है, वह अद्वितीय है।
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इस मूर्ति की आयु के बारे में उन्होंने बताया कि यह मूर्ति कम से कम 12 सौ वर्ष पुरानी है। इसी तरह से शिव मंदिर की पाषाणकालीन चौखट को भी उन्होंने 1200 वर्ष से भी पुरानी होना बताया। बलवान सिंह ने बताया कि 48 कोस कुरुक्षेत्र की परिक्रमा में तीर्थों की खोज के लिए एक अप्रैल 1998 को पहला सर्वे हुआ था, जिसमें 134 तीर्थों की पहचान हुई थी।
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वर्तमान में कुरुक्षेत्र परिक्रमा में 182 तीर्थों को शामिल किया जा चुका है। उन्होंने बताया की इस वर्ष में इस कड़ी में 18 तीर्थों को और जोड़ा जा रहा है। जिनमें चार तीर्थ बात्ता, चौशाला, खरक पांडवा व सेगा कलायत विधानसभा के हैं।
उन्होंने बताया की कुरुक्षेत्र 48 कोस की परिक्रमा में सबसे ज्यादा 73 तीर्थ जिला कैथल से हैं। इसके अलावा 46 तीर्थ कुरुक्षेत्र, 40 तीर्थ करनाल, 22 तीर्थ जींद व एक तीर्थ पानीपत से शामिल हैं। उन्होंने कहा कि तीर्थों से जो अति प्राचीन व दुर्लभ मूर्तियां मिल रही हैं, उनके सेविनियर बनवाकर भेंट करने की प्रथा शुरू की गई है। इससे एक तो कुरुभूमि के तीर्थों की मूर्तियों के बारे में लोगों को पता चलेगा और बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी जानकारी मिलेगी।
राजेंद्र राणा ने बताया की कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की प्लानिंग है कि बाहर से आने वाले पर्यटकों को सभी तीर्थों की बजाय जो तीर्थ पूरी तरह से विकसित हैं, उनकी यात्रा के लिए पैकेज दिया जाए। कलायत तीर्थ के बारे में उन्होंने कहा कि यह सबसे दुर्लभतम तीर्थ है जहां भगवान कपिल, कात्यायनी व छोटी ईंटों का मंदिर मौजूद है। उन्होंने पुजारियों से अनुग्रह किया कि एक तो कपिल तीर्थ की सायंकालीन आरती नियमित करें। इसके अलावा मंदिर से जुड़े सोविनियर, पुस्तिकाओं व स्थानीय हथकरघा उत्पादों के मंदिर परिसर में स्टॉल लगवाए, ताकि श्रद्धालुओं को जानकारी मिल सके।