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शुगर मिल में लेबर नहीं मिलने से किसान परेशान
ब्यूरो कैथल
Updated Mon, 28 Nov 2016 12:12 AM IST
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स सीजन गन्ने की आवक कम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शुगर मिल में गन्ने की पेराई के लिए किसानों को लेबर नहीं मिलने से उन्हें काफी परेशानी हो रही है। गन्ना बेचने के लिए किसानों को जहां मिल में दो घंटे का समय लगता था, वहीं अब मजदूरों को रुपये देने के लिए पूरा दिन बिताना पड़ता है। इसके अलावा जिन किसानों के पास दो हजार रुपये का नोट होता है। उन्हें छूटे करवाने के लिए किसानों को मिल से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित शहर में आना पड़ता है। लेकिन इसके बावजूद भी उन्हें छूटे नहीं मिल पाते।
नोटबंदी का असर ऐसा हुआ कि इस बार बड़े नोटों के परेशानी के साथ लेबर भी काफी कम आए हैं। शुगर में तीन शिफ्टों में होने वाले कार्य के अनुसार प्रतिदिन 300 ट्रालियां आती थीं, जो घटकर अब केवल 100 ही रह गई हैं। नोटबंदी के कारण शुगर मिल मे काम कर रहे मजदूरों को भी काम शुरू होने के पांच दिन बाद भी अभी तक एक रुपया भी नहीं मिला है। मजदूरों ने बताया कि ठेकेदार द्वारा उन्हें रुपये तो दिये जा रहे हैं। लेकिन बड़े नोट दिये जाते हैं। जिस कारण उन्हें हर जगह पर भारी कठिनाई होती है।
मजदूर की ध्याड़ी 500 तो भी दिक्कत
कुरुक्षेत्र के गांव हथीरा से आए शलिंद्र ने बताया कि गन्ने को लेकर लेबर के लिए काफी दिक्कतें आ रही हैं। बड़ नोट चल नहीं रहे और कहीं छोटे नोट मिलते नहीं। एक मजदूर की ध्याड़ी भी कम से कम 500 रुपये है। जिस वजह से भी दिक्कत आ रही है। लेकिन सरकार का कदम अच्छा है।
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मजदूरों की भारी कमी
कुरुक्षेत्र के ही गांव मढ़ाडो के किसान जसबीर ने कहा कि नोटबंदी को लेकर एक तरफ तो मजदूरों की भारी कमी है। दूसरी ओर मजदूरों के मिलने के बाद छूटे रुपयों को लेकर परेशानी हैं। सरकार को इस ओर खास ध्यान रखना होगा।
दर दर भटकना पड़ता है फुटकर के लिए
क्योड़क गांव के श्यामलाल ने कहा कि बैंकों में घंटो लाइन में लगने के बाद रुपये मिलते हैं। लेकिन वह भी दो हजार रुपये का नोट। बाद में लेबर के पेमेंट के लिए उसे फुटकर करवाने को दर दर भटकना पड़ता है।
नहीं ले रहे बड़े नोट
यूपी से आए मजदूर सादिकी ने बताया कि उन्हें बड़े नोट दिये जा रहे हैं। लेकिन नोटबंदी के चलते वह उन्हें मना कर रहे है। अगर मजबूरी में एकआध बार लेना भी पड़ता है तो उसे चलाने में दिक्कत होती है।
वहीं लेबर के ठेकेदार सलमान ने बताया कि कार्य करते हुए एक सप्ताह हो गया है। मजदूर रुपये मांग रहे हैं। लेकिन नोटबंदी के कारण खुद को ही रुपये नहीं मिल रहे तो दूसरे मजदूरों को कहां से देंगे। काफी परेशानी आ रही है।
मिल में पेराई का काम प्रभावित ना हो, इसके लिए अधिकारियों को कहा गया है। वे गन्ने के नियमित आपूर्ति पर ध्यान रखें। प्रयास किया जा रहा है कि इस बार मिल में अच्छी रिकवरी हो।
कैप्टन शक्ति सिंह, एडीसी एवं मिल प्रबंधक कैथल।
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नोटबंदी का असर ऐसा हुआ कि इस बार बड़े नोटों के परेशानी के साथ लेबर भी काफी कम आए हैं। शुगर में तीन शिफ्टों में होने वाले कार्य के अनुसार प्रतिदिन 300 ट्रालियां आती थीं, जो घटकर अब केवल 100 ही रह गई हैं। नोटबंदी के कारण शुगर मिल मे काम कर रहे मजदूरों को भी काम शुरू होने के पांच दिन बाद भी अभी तक एक रुपया भी नहीं मिला है। मजदूरों ने बताया कि ठेकेदार द्वारा उन्हें रुपये तो दिये जा रहे हैं। लेकिन बड़े नोट दिये जाते हैं। जिस कारण उन्हें हर जगह पर भारी कठिनाई होती है।
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मजदूर की ध्याड़ी 500 तो भी दिक्कत
कुरुक्षेत्र के गांव हथीरा से आए शलिंद्र ने बताया कि गन्ने को लेकर लेबर के लिए काफी दिक्कतें आ रही हैं। बड़ नोट चल नहीं रहे और कहीं छोटे नोट मिलते नहीं। एक मजदूर की ध्याड़ी भी कम से कम 500 रुपये है। जिस वजह से भी दिक्कत आ रही है। लेकिन सरकार का कदम अच्छा है।
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मजदूरों की भारी कमी
कुरुक्षेत्र के ही गांव मढ़ाडो के किसान जसबीर ने कहा कि नोटबंदी को लेकर एक तरफ तो मजदूरों की भारी कमी है। दूसरी ओर मजदूरों के मिलने के बाद छूटे रुपयों को लेकर परेशानी हैं। सरकार को इस ओर खास ध्यान रखना होगा।
दर दर भटकना पड़ता है फुटकर के लिए
क्योड़क गांव के श्यामलाल ने कहा कि बैंकों में घंटो लाइन में लगने के बाद रुपये मिलते हैं। लेकिन वह भी दो हजार रुपये का नोट। बाद में लेबर के पेमेंट के लिए उसे फुटकर करवाने को दर दर भटकना पड़ता है।
नहीं ले रहे बड़े नोट
यूपी से आए मजदूर सादिकी ने बताया कि उन्हें बड़े नोट दिये जा रहे हैं। लेकिन नोटबंदी के चलते वह उन्हें मना कर रहे है। अगर मजबूरी में एकआध बार लेना भी पड़ता है तो उसे चलाने में दिक्कत होती है।
वहीं लेबर के ठेकेदार सलमान ने बताया कि कार्य करते हुए एक सप्ताह हो गया है। मजदूर रुपये मांग रहे हैं। लेकिन नोटबंदी के कारण खुद को ही रुपये नहीं मिल रहे तो दूसरे मजदूरों को कहां से देंगे। काफी परेशानी आ रही है।
मिल में पेराई का काम प्रभावित ना हो, इसके लिए अधिकारियों को कहा गया है। वे गन्ने के नियमित आपूर्ति पर ध्यान रखें। प्रयास किया जा रहा है कि इस बार मिल में अच्छी रिकवरी हो।
कैप्टन शक्ति सिंह, एडीसी एवं मिल प्रबंधक कैथल।