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स्वास्थ्य विभाग सहित प्रशासन की खुली नींद, गांव में लगाया जांच शिविर
ब्यूरो कैथल
Updated Sun, 12 Feb 2017 01:09 AM IST
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गांव पहुंची स्वास्थ्य, वन, शिक्षा व आयूष विभाग की टीमें
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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गांव जाखौली के मिडिल स्कूल में छात्राओं में फैली खुजली की बीमारी को लेकर आखिरकार स्वास्थ्य विभाग की तीन दिन बाद नींद टूट ही गई। सुबह सीएमओ के नेतृत्व में विभाग की टीम गांव में पहुंची और डोर टू डोर सर्वे करके गांव में खुजली की बीमारी का कारण जानने का प्रयास किया। वहीं वन विभाग सहित आयूष विभाग की टीमों ने भी गांव का दौरा किया। दोपहर बाद एसडीएम मनदीप कौर ने भी गांव में दौरा कर बीमारी के बारे में जानकारी हासिल की। उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश जारी किए।
बता दें कि गांव जाखौली के कन्या मिडिल स्कूल में करीब 86 छात्राओं को खुजली की बीमारी सामने आई थी। इस बीमारी का कारण समझ में ना आने के कारण लोगों में दहशत बनी हुई थी। वीरवार व शुक्रवार तक कोई भी स्वास्थ्य विभाग का अधिकारी गांव में नहीं पहुंचा और ना ही बीमारी का कारण जानने का प्रयास किया। अमर उजाला द्वारा स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया।
त्वचा रोग विशेषज्ञ डा. मीनाक्षी की देखरेख में गांव में चिकित्सा शिविर में करीब 68 छात्राओं व महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गई। पानी के 3 सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए। सीएमओ ने स्कूल के आस-पास के गंदगी के माहौल को भी जांचा। साथ ही 5 टीमें बनाकर गांव में डोर टू डोर जांच की गई और सैंपल लिए गए। आयूष विभाग की तितरम से डा. शकुंतला दहिया व वन विभाग के प्रीतपाल राणा व महाबीर सिंह ने अपने-अपने विभागीय निर्देशानुसार पेड़-पौधों की जांच की। साथ ही डिप्टी डीईओ शमशेर सिरोही भी स्कूल में पहुंचे। अधिकारियों ने फैसला लिया कि सोमवार व मंगलवार को भी इस स्कूल की छुट्टियां रहेंगी। वहीं बीमार हुई 86 छात्राओं को एक सप्ताह की छुट्टी दे दी गई। छात्राओं तनु, टीना, निशा व अन्य ने कहा कि अभी हलकी खुजली है। लेकिन पहले से आराम है। इस अवसर पर गांव के सरपंच रत्न सिंह कादियान व अनिल मलिक भी मौजूद थे।
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सीएमओ डा. मनीष बंसल ने बताया कि गांव में जांच की जा रही है। स्कूल के चारों ओर गंदगी का आलम है। जांच पूरी होने के बाद ही पता चल सकेगा कि बीमारी का क्या कारण है। फिलहाल पानी के भी सैंपल लिए गए हैं। स्कूल में साफ-सफाई ठीक पाई गई।
एसडीएम ने किया अधिकारियों व गांव के लोगों के साथ विचार-विमर्श
एसडीएम मनदीप कौर ने दौरा कर लोगों से बातचीत की। उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर बीमारी के कारणों की जांच की। बाद में उन्होंने बताया कि कीटनाशक दवाइयों व डी वार्मिंग के प्रभाव के कारण यह बीमारी हुई है। स्कूली बच्चों में हाल ही में हुई एलर्जी की शिकायत डी वार्मिंग और खेतों में प्रयोग में लाई जा रही अत्याधिक कीटनाशक दवाइयों का प्रभाव है, जो कुछ दिन की दवा लेने के बाद सामान्य हो जाएगा और बच्चे ठीक-ठाक हो जाएंगे। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों व उनकी टीम से स्कूल में लगे वृक्षों व पौधों की भी जांच करवाने के उपरांत जानकारी दी कि जांच में ऐसा कोई भी पौधा नहीं पाया गया, जिसकी वजह से बच्चों में एलर्जी की शिकायत होने की संभावना हो। बच्चों को सिर्टीजन, टेबलेट तथा डी वार्मिंग टेबलेट दी गई हैं। उन्होंने कहा कि उपायुक्त ने बच्चों की इस एलर्जी की घटना के बाद इसे गंभीरता से लेते हुए स्कूल में स्प्रे करवाने के निर्देश दिए और स्कूल परिसर व आस-पास सफाई भी करवाई। सरपंच ने स्कूल के आसपास की झाड़ियां भी कटवाई है और गांव के दोनों सरपंचों ने गांव को खुले से शौचमुक्त करने की भी अपील ग्रामीणों से की है।
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बता दें कि गांव जाखौली के कन्या मिडिल स्कूल में करीब 86 छात्राओं को खुजली की बीमारी सामने आई थी। इस बीमारी का कारण समझ में ना आने के कारण लोगों में दहशत बनी हुई थी। वीरवार व शुक्रवार तक कोई भी स्वास्थ्य विभाग का अधिकारी गांव में नहीं पहुंचा और ना ही बीमारी का कारण जानने का प्रयास किया। अमर उजाला द्वारा स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया।
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त्वचा रोग विशेषज्ञ डा. मीनाक्षी की देखरेख में गांव में चिकित्सा शिविर में करीब 68 छात्राओं व महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गई। पानी के 3 सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए। सीएमओ ने स्कूल के आस-पास के गंदगी के माहौल को भी जांचा। साथ ही 5 टीमें बनाकर गांव में डोर टू डोर जांच की गई और सैंपल लिए गए। आयूष विभाग की तितरम से डा. शकुंतला दहिया व वन विभाग के प्रीतपाल राणा व महाबीर सिंह ने अपने-अपने विभागीय निर्देशानुसार पेड़-पौधों की जांच की। साथ ही डिप्टी डीईओ शमशेर सिरोही भी स्कूल में पहुंचे। अधिकारियों ने फैसला लिया कि सोमवार व मंगलवार को भी इस स्कूल की छुट्टियां रहेंगी। वहीं बीमार हुई 86 छात्राओं को एक सप्ताह की छुट्टी दे दी गई। छात्राओं तनु, टीना, निशा व अन्य ने कहा कि अभी हलकी खुजली है। लेकिन पहले से आराम है। इस अवसर पर गांव के सरपंच रत्न सिंह कादियान व अनिल मलिक भी मौजूद थे।
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सीएमओ डा. मनीष बंसल ने बताया कि गांव में जांच की जा रही है। स्कूल के चारों ओर गंदगी का आलम है। जांच पूरी होने के बाद ही पता चल सकेगा कि बीमारी का क्या कारण है। फिलहाल पानी के भी सैंपल लिए गए हैं। स्कूल में साफ-सफाई ठीक पाई गई।
एसडीएम ने किया अधिकारियों व गांव के लोगों के साथ विचार-विमर्श
एसडीएम मनदीप कौर ने दौरा कर लोगों से बातचीत की। उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर बीमारी के कारणों की जांच की। बाद में उन्होंने बताया कि कीटनाशक दवाइयों व डी वार्मिंग के प्रभाव के कारण यह बीमारी हुई है। स्कूली बच्चों में हाल ही में हुई एलर्जी की शिकायत डी वार्मिंग और खेतों में प्रयोग में लाई जा रही अत्याधिक कीटनाशक दवाइयों का प्रभाव है, जो कुछ दिन की दवा लेने के बाद सामान्य हो जाएगा और बच्चे ठीक-ठाक हो जाएंगे। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों व उनकी टीम से स्कूल में लगे वृक्षों व पौधों की भी जांच करवाने के उपरांत जानकारी दी कि जांच में ऐसा कोई भी पौधा नहीं पाया गया, जिसकी वजह से बच्चों में एलर्जी की शिकायत होने की संभावना हो। बच्चों को सिर्टीजन, टेबलेट तथा डी वार्मिंग टेबलेट दी गई हैं। उन्होंने कहा कि उपायुक्त ने बच्चों की इस एलर्जी की घटना के बाद इसे गंभीरता से लेते हुए स्कूल में स्प्रे करवाने के निर्देश दिए और स्कूल परिसर व आस-पास सफाई भी करवाई। सरपंच ने स्कूल के आसपास की झाड़ियां भी कटवाई है और गांव के दोनों सरपंचों ने गांव को खुले से शौचमुक्त करने की भी अपील ग्रामीणों से की है।