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लैब टेक्नीशियन हड़ताल पर, जांच को भटकते रहे मरीज
ब्यूरो कैथल
Updated Mon, 19 Sep 2016 11:56 PM IST
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हड़ताल पर बैठे लैब टेक्नीशियन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिला अस्पताल में लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन की हड़ताल के कारण पूरे दिन मरीज परेशान रहे। जिलेभर से आए लोग विभिन्न बीमारियों के इलाज के दौरान होने वाले टेस्टों के लिए भटकते रहे और निराश होकर वापस चले गए। अनेक मरीजों को बाहर से प्राइवेट लैब में महंगे रेट में टेस्ट करवाने पड़े। वहीं एसोसिएशन ने फैसला लिया है कि यह हड़ताल 20 सितंबर को भी जारी रहेगी। इसके अलावा यह हड़ताल अनिश्चितकालीन भी हो सकती है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 500 से अधिक लोगों के टेस्ट होते हैं। सुबह लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन ने अस्पताल के बाहर बैठकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों को प्रति रोष प्रकट किया।
जिला प्रधान रमेश चंद ने बताया कि जिले के लैब टेक्नीशियन 13 से लेकर 18 सितंबर तक काले बिल्ले लगाकर कार्य कर रहे थे। जिस पर राज्य सरकार ने कोई सकारात्मक रवैया नहीं दिखाया। जिसके कारण अब पूरी तरह हड़ताल पर जाकर सरकार को चेताना चाहते हैं। अगर दो दिन तक सरकार हमारी मांगों पर विचार नहीं करती है तो हड़ताल अनिश्चितकालीन कर दी जाएगी। जिला अस्पताल व पीएचसी, सीएचसी के करीब 50 लैब टेक्नीशियनों ने भाग लिया।
प्राइवेट लैब टेक्नीशियन ने किया समर्थन
धरने पर बैठे लैब टेक्नीशियनों की हड़ताल का प्राइवेट लैब टेक्नीशियनों ने समर्थन किया है। धरने पर करीब जिले भर से 50 प्राइवेट लैब टेक्नीशियनों ने आकर समर्थन किया है।
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अस्पताल में प्रतिदिन होते हैं 1500 से 3000 टेस्ट
अस्पताल में प्रतिदिन 500 लोगों के 1500 से 3500 टेस्ट होते हैं। ऐसे में टेस्ट न होने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। लोग लैब के बाहर चक्कर काटते रहे। लेकिन वहां पर उनकी सुनने वाला कोई नहीं था। वहीं लैब टेक्नीशियनों ने इमरजेंसी, गर्भवती महिला व रोड एक्सीडेंट में घायल मरीजों का टेस्ट किया।
अस्ताल से निराश लौटे मरीज
अस्पताल में आए गांव क्योड़क के सुल्तान सिंह, बहादुर, कुतारन निवासी दर्शन, कौल निवासी संदीप, राजेश, रामबत्तेहरी, जोगिन्द, संतोष ने बताया कि सुबह अस्पताल दवाई लेने के लिए आए थे। डॉक्टर ने चेकअप करने के बाद टेस्ट लिख दिया। टेस्ट न होने के कारण उनका इलाज नहीं हो सका है। जिसके कारण उनको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जांच करवाने के लिए भटकते रहे मरीज
कलायत। कलायत के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहले ही स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई थी, लेकिन सोमवार को लैब टेक्नीशियनों की शुरू हुई दो दिवसीय हड़ताल के चलते मरीजों को और अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। करीब पौने 2 लाख की आबादी वाले कलायत क्षेत्र में केवल मात्र एक ही चिकित्सक तैनात होने के कारण कलायत व इसके आसपास के दर्जनों गांवों के मरीज स्वास्थ्य लाभ लेने के लिए कलायत के स्वास्थ्य केंद्र में ही आते हैं। गांव कमालपुर, खरक पांडवा, कलायत, मटौर, रामगढ़ पांडवा के साथ कई अन्य गांव के मरीज भटकते रहे। गांव कमालपुर से आई बीरमति देवी ने बताया कि गत दिवस से ही उसकी बेटी भावना व बेटा साहिल बुखार की चपेट में हैं। उन्होंने बताया कि बुखार की जांच करवाए बिना जहां इसकी किस्म का पता नहीं चल रहा वहीं बच्चों को आराम भी नहीं हो रहा।
चिकित्सा अधिकारी डा. बलविंद्र गर्ग ने बताया कि लैब टेक्नीशियनों की हड़ताल के चलते प्रयोगशाला में मरीजों की जांच का कार्य पूरी तरह बंद है। जिस मरीज की आपात स्थिति में अगर जांच करवानी भी है तो उसे कैथल नागरिक अस्पताल में रेफर किया जा रहा है।
यह है लैब टैक्रीशियनों की मांगें
1. सभी परियोजनाओं में कार्यरत एलटी को नियमित किया जाए।
2. समान काम व समान वेतन लागू किया जाए।
3. छटे वेतन आयोग की विंसगतियों को दूर करके सांतवा वेतन आयोग शीघ्र लागू किया जाए।
4. एलटी की पदोन्नति कैडर केन्द्र के अनुसार किया जाए।
5. मरीज की देखभाल-भत्ता दिया जाए।
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जिला प्रधान रमेश चंद ने बताया कि जिले के लैब टेक्नीशियन 13 से लेकर 18 सितंबर तक काले बिल्ले लगाकर कार्य कर रहे थे। जिस पर राज्य सरकार ने कोई सकारात्मक रवैया नहीं दिखाया। जिसके कारण अब पूरी तरह हड़ताल पर जाकर सरकार को चेताना चाहते हैं। अगर दो दिन तक सरकार हमारी मांगों पर विचार नहीं करती है तो हड़ताल अनिश्चितकालीन कर दी जाएगी। जिला अस्पताल व पीएचसी, सीएचसी के करीब 50 लैब टेक्नीशियनों ने भाग लिया।
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प्राइवेट लैब टेक्नीशियन ने किया समर्थन
धरने पर बैठे लैब टेक्नीशियनों की हड़ताल का प्राइवेट लैब टेक्नीशियनों ने समर्थन किया है। धरने पर करीब जिले भर से 50 प्राइवेट लैब टेक्नीशियनों ने आकर समर्थन किया है।
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अस्पताल में प्रतिदिन होते हैं 1500 से 3000 टेस्ट
अस्पताल में प्रतिदिन 500 लोगों के 1500 से 3500 टेस्ट होते हैं। ऐसे में टेस्ट न होने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। लोग लैब के बाहर चक्कर काटते रहे। लेकिन वहां पर उनकी सुनने वाला कोई नहीं था। वहीं लैब टेक्नीशियनों ने इमरजेंसी, गर्भवती महिला व रोड एक्सीडेंट में घायल मरीजों का टेस्ट किया।
अस्ताल से निराश लौटे मरीज
अस्पताल में आए गांव क्योड़क के सुल्तान सिंह, बहादुर, कुतारन निवासी दर्शन, कौल निवासी संदीप, राजेश, रामबत्तेहरी, जोगिन्द, संतोष ने बताया कि सुबह अस्पताल दवाई लेने के लिए आए थे। डॉक्टर ने चेकअप करने के बाद टेस्ट लिख दिया। टेस्ट न होने के कारण उनका इलाज नहीं हो सका है। जिसके कारण उनको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जांच करवाने के लिए भटकते रहे मरीज
कलायत। कलायत के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहले ही स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई थी, लेकिन सोमवार को लैब टेक्नीशियनों की शुरू हुई दो दिवसीय हड़ताल के चलते मरीजों को और अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। करीब पौने 2 लाख की आबादी वाले कलायत क्षेत्र में केवल मात्र एक ही चिकित्सक तैनात होने के कारण कलायत व इसके आसपास के दर्जनों गांवों के मरीज स्वास्थ्य लाभ लेने के लिए कलायत के स्वास्थ्य केंद्र में ही आते हैं। गांव कमालपुर, खरक पांडवा, कलायत, मटौर, रामगढ़ पांडवा के साथ कई अन्य गांव के मरीज भटकते रहे। गांव कमालपुर से आई बीरमति देवी ने बताया कि गत दिवस से ही उसकी बेटी भावना व बेटा साहिल बुखार की चपेट में हैं। उन्होंने बताया कि बुखार की जांच करवाए बिना जहां इसकी किस्म का पता नहीं चल रहा वहीं बच्चों को आराम भी नहीं हो रहा।
चिकित्सा अधिकारी डा. बलविंद्र गर्ग ने बताया कि लैब टेक्नीशियनों की हड़ताल के चलते प्रयोगशाला में मरीजों की जांच का कार्य पूरी तरह बंद है। जिस मरीज की आपात स्थिति में अगर जांच करवानी भी है तो उसे कैथल नागरिक अस्पताल में रेफर किया जा रहा है।
यह है लैब टैक्रीशियनों की मांगें
1. सभी परियोजनाओं में कार्यरत एलटी को नियमित किया जाए।
2. समान काम व समान वेतन लागू किया जाए।
3. छटे वेतन आयोग की विंसगतियों को दूर करके सांतवा वेतन आयोग शीघ्र लागू किया जाए।
4. एलटी की पदोन्नति कैडर केन्द्र के अनुसार किया जाए।
5. मरीज की देखभाल-भत्ता दिया जाए।