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Kaithal News: शनि जयंती पर मंदिरों में हुई विशेष आराधना
Fri, 07 Jun 2024 03:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 07 Jun 2024 03:18 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिलेभर में वीरवार को शनि जयंती का पर्व मनाया गया। इस मौके पर जिले के विभिन्न शनि मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा। श्रद्धालुओं ने मंदिर में स्थित शनि शिला पर सरसों का तेल, तिल के साथ गुड़ चना चढ़ाकर पूजा-अर्चना की।
शहर के माता गेट स्थित प्राचीन महाभारत कालीन शनि कुंड, शनि मंदिर व सूर्यकुंड मंदिर, सनातन धर्म स्थित शनि मंदिर व अन्य शनि मंदिरों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। ज्योतिषों के अनुसार इस बार शनि जयंती पर काफी सालाें के बाद शुभ संयोग एक साथ बने। दरअसल, वर्षों बाद शनि देव अपनी ही राशि कुंभ में गोचर कर रहे हैं। इस मौके पर चंद्रमा का भी साथ उन्हें मिल रहा है। ज्योतिषीय गणना के लिहाज से ये अद्भुत संयोग है। हिंदू धर्म में हर माह की अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है।
यह तिथि पितरों के तर्पण और दान, पुण्य के लिए बहुत ही शुभ तिथि मानी जाती है। हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। इस तिथि पर न्याय और कर्म के देवता शनि की जयंती मनाई जाती है। इसके अलावा ज्येष्ठ अमावस्या तिथि पर पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए वट सावित्री का व्रत रखा जाता है।
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर शनिदेव का जन्म हुआ था। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को कर्म का देवता माना जाता है। शनि जयंती पर भगवान शनि की पूजा-अर्चना करने पर व्यक्ति के कष्टों में कमी आती है। शनि जयंती के अवसर पर शहर में कई स्थानों पर भंडारे लगाए गए।
इसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। प्राचीन शनि मंदिर के पुजारी रविंद्र भार्गव ने कहा कि जेष्ठ माह में जब भी शनि अमावस्या आती है तो उस दिन शनि भगवान का जन्म माना जाता है।
इस दिन सुबह शनि महाराज का तेल अभिषेक कर भव्य वस्त्र पहना कर पूजा अर्चना की जाती है। शनि मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचे श्रद्धालु विनय कुमार और रिया ने कहा कि आज के पावन पर्व पर वह परिवार सहित शनि मंदिर में पूजा अर्चना करने पहुंचे।
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कैथल। जिलेभर में वीरवार को शनि जयंती का पर्व मनाया गया। इस मौके पर जिले के विभिन्न शनि मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा। श्रद्धालुओं ने मंदिर में स्थित शनि शिला पर सरसों का तेल, तिल के साथ गुड़ चना चढ़ाकर पूजा-अर्चना की।
शहर के माता गेट स्थित प्राचीन महाभारत कालीन शनि कुंड, शनि मंदिर व सूर्यकुंड मंदिर, सनातन धर्म स्थित शनि मंदिर व अन्य शनि मंदिरों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। ज्योतिषों के अनुसार इस बार शनि जयंती पर काफी सालाें के बाद शुभ संयोग एक साथ बने। दरअसल, वर्षों बाद शनि देव अपनी ही राशि कुंभ में गोचर कर रहे हैं। इस मौके पर चंद्रमा का भी साथ उन्हें मिल रहा है। ज्योतिषीय गणना के लिहाज से ये अद्भुत संयोग है। हिंदू धर्म में हर माह की अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है।
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यह तिथि पितरों के तर्पण और दान, पुण्य के लिए बहुत ही शुभ तिथि मानी जाती है। हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। इस तिथि पर न्याय और कर्म के देवता शनि की जयंती मनाई जाती है। इसके अलावा ज्येष्ठ अमावस्या तिथि पर पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए वट सावित्री का व्रत रखा जाता है।
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पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर शनिदेव का जन्म हुआ था। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को कर्म का देवता माना जाता है। शनि जयंती पर भगवान शनि की पूजा-अर्चना करने पर व्यक्ति के कष्टों में कमी आती है। शनि जयंती के अवसर पर शहर में कई स्थानों पर भंडारे लगाए गए।
इसमें भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। प्राचीन शनि मंदिर के पुजारी रविंद्र भार्गव ने कहा कि जेष्ठ माह में जब भी शनि अमावस्या आती है तो उस दिन शनि भगवान का जन्म माना जाता है।
इस दिन सुबह शनि महाराज का तेल अभिषेक कर भव्य वस्त्र पहना कर पूजा अर्चना की जाती है। शनि मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचे श्रद्धालु विनय कुमार और रिया ने कहा कि आज के पावन पर्व पर वह परिवार सहित शनि मंदिर में पूजा अर्चना करने पहुंचे।