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Kaithal News: जैव विविधता के लिए मृदा अमूल्य
Fri, 06 Dec 2024 02:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 06 Dec 2024 02:07 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। विश्व मृदा दिवस पर वीरवार को मृदा के महत्व, मृदा को स्वस्थ रखने के उपायों, मृदा प्रदूषण के कारणों और मृदा के नमूने लेने की प्रक्रिया के बारे में छात्रों को जागरूक किया गया। आईटीआई कलायत के प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने जैव विविधता के लिए मृदा को अमूल्य बताया। साथ ही रासायनिक उर्वरकों की बजाय जैविक खाद उपयोग की सलाह दी।
कार्यक्रम में खंड कृषि अधिकारी कलायत डाॅ. विजय मान, डाॅ. नरेश नैन, डाॅ. जोगिंद्र सिंह व डाॅ. रमेश समध्यान ने शिरकत की। असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर, रमेश समध्यान ने बताया कि मृदा पृथ्वी का एक अमूल्य संसाधन है, जो कृषि, जलवायु परिवर्तन नियंत्रण, जल संरक्षण और जैव विविधता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। मृदा पौधों को पोषक तत्व प्रदान करती है जिससे खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है। इसके अलावा, मृदा प्राकृतिक जल शोधन, जल संचयन और कार्बन को संचित करने का कार्य भी करती है।
उन्होंने कहा कि यदि मृदा स्वस्थ नहीं होगी तो यह हमारे जीवन के लिए खतरे की घंटी हो सकती है। उन्होंने छात्रों को बताया कि फसल चक्रीयकरण विभिन्न प्रकार की फसलों का प्रयोग मृदा की उर्वरकता को बनाए रखने में मदद करता है और कीटों की समस्या को नियंत्रित करता है। मृदा में रासायनिक उर्वरकों की बजाय जैविक खाद का उपयोग मृदा की संरचना और पोषक तत्वों की उपलब्धता को बेहतर बनाता है।
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उन्होंने कहा कि मृदा संरक्षण विधियां मृदा के कटाव को रोकने के लिए मल्चिंग, भूमि के ढलान को नियंत्रित करना और मृदा में पानी की अवशोषण क्षमता को बढ़ाना महत्वपूर्ण है। फसलों में खाद संतुलित मात्रा में प्रयोग कर मृदा को स्वस्थ रख सकते है।
खंड कृषि अधिकारी डाॅ. विजय मान ने कहा की पेड़ और पौधे मृदा की संरचना को सुधारते हैं। कटाव को रोकते हैं और मृदा के पोषक तत्वों को बचाते हैं। मृदा प्रदूषण मुख्य रूप से रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों, प्लास्टिक, औद्योगिक अपशिष्टों और भारी धातुओं के कारण होता है। इन प्रदुषकों के कारण मृदा की उर्वरक क्षमता घट जाती है और मानव जीवन के लिए खतरे की स्थिति उत्पन्न होती है।
डाॅ. नरेश नैन ने कहा कि मृदा के स्वास्थ्य की सही जानकारी प्राप्त करने के लिए मृदा के नमूने लेना आवश्यक है। प्रधानाचार्य ने कहा कि यदि मृदा स्वस्थ रहेगी तभी हमारा पर्यावरण और खाद्य उत्पादन सुरक्षित रहेगा। विद्यार्थियों को यह समझना चाहिए कि मृदा के संरक्षण में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। हमें मिलकर मृदा के प्रदूषण को रोकने और उसे स्वस्थ रखने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। मृदा के स्वास्थ्य की देखभाल करना हमारी जिम्मेदारी है। इस अवसर पर संस्थान के सेंकडो छात्र छात्राओं सहित लैब टेक्नीशियन सौभीत, सतबीर राणा, निरीक्षक मुकेश कुमार, अधीक्षक जगदीशचंद, अध्यापक रवींद्र सिंह, रामफल सिंह, दलशेर सिंह, बीरेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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कलायत। विश्व मृदा दिवस पर वीरवार को मृदा के महत्व, मृदा को स्वस्थ रखने के उपायों, मृदा प्रदूषण के कारणों और मृदा के नमूने लेने की प्रक्रिया के बारे में छात्रों को जागरूक किया गया। आईटीआई कलायत के प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने जैव विविधता के लिए मृदा को अमूल्य बताया। साथ ही रासायनिक उर्वरकों की बजाय जैविक खाद उपयोग की सलाह दी।
कार्यक्रम में खंड कृषि अधिकारी कलायत डाॅ. विजय मान, डाॅ. नरेश नैन, डाॅ. जोगिंद्र सिंह व डाॅ. रमेश समध्यान ने शिरकत की। असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर, रमेश समध्यान ने बताया कि मृदा पृथ्वी का एक अमूल्य संसाधन है, जो कृषि, जलवायु परिवर्तन नियंत्रण, जल संरक्षण और जैव विविधता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। मृदा पौधों को पोषक तत्व प्रदान करती है जिससे खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है। इसके अलावा, मृदा प्राकृतिक जल शोधन, जल संचयन और कार्बन को संचित करने का कार्य भी करती है।
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उन्होंने कहा कि यदि मृदा स्वस्थ नहीं होगी तो यह हमारे जीवन के लिए खतरे की घंटी हो सकती है। उन्होंने छात्रों को बताया कि फसल चक्रीयकरण विभिन्न प्रकार की फसलों का प्रयोग मृदा की उर्वरकता को बनाए रखने में मदद करता है और कीटों की समस्या को नियंत्रित करता है। मृदा में रासायनिक उर्वरकों की बजाय जैविक खाद का उपयोग मृदा की संरचना और पोषक तत्वों की उपलब्धता को बेहतर बनाता है।
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उन्होंने कहा कि मृदा संरक्षण विधियां मृदा के कटाव को रोकने के लिए मल्चिंग, भूमि के ढलान को नियंत्रित करना और मृदा में पानी की अवशोषण क्षमता को बढ़ाना महत्वपूर्ण है। फसलों में खाद संतुलित मात्रा में प्रयोग कर मृदा को स्वस्थ रख सकते है।
खंड कृषि अधिकारी डाॅ. विजय मान ने कहा की पेड़ और पौधे मृदा की संरचना को सुधारते हैं। कटाव को रोकते हैं और मृदा के पोषक तत्वों को बचाते हैं। मृदा प्रदूषण मुख्य रूप से रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों, प्लास्टिक, औद्योगिक अपशिष्टों और भारी धातुओं के कारण होता है। इन प्रदुषकों के कारण मृदा की उर्वरक क्षमता घट जाती है और मानव जीवन के लिए खतरे की स्थिति उत्पन्न होती है।
डाॅ. नरेश नैन ने कहा कि मृदा के स्वास्थ्य की सही जानकारी प्राप्त करने के लिए मृदा के नमूने लेना आवश्यक है। प्रधानाचार्य ने कहा कि यदि मृदा स्वस्थ रहेगी तभी हमारा पर्यावरण और खाद्य उत्पादन सुरक्षित रहेगा। विद्यार्थियों को यह समझना चाहिए कि मृदा के संरक्षण में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है। हमें मिलकर मृदा के प्रदूषण को रोकने और उसे स्वस्थ रखने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। मृदा के स्वास्थ्य की देखभाल करना हमारी जिम्मेदारी है। इस अवसर पर संस्थान के सेंकडो छात्र छात्राओं सहित लैब टेक्नीशियन सौभीत, सतबीर राणा, निरीक्षक मुकेश कुमार, अधीक्षक जगदीशचंद, अध्यापक रवींद्र सिंह, रामफल सिंह, दलशेर सिंह, बीरेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।