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अदालतों में लंबित केसों के अंबार
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कोरोना का अदालतों और अधिवक्ताओं के कामकाज पर भी काफी प्रभाव पड़ा है। एक तरफ जहां हजारों की संख्या में इस दौरान केस लंबित हैं, वहीं वकीलों को आर्थिक परेशानी से भी जूझना पड़ रहा है।
जिला बार एसोसिएशन के अनुसार कैथल बार एसोसिएशन मेें 1300 से ज्यादा वकील जुड़े हैं। कोर्ट परिसर में 304 चेंबर वकीलों को उपलब्ध हैं। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि कोरोना काल में बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ताओं के 10 हजार से ज्यादा केस लंबित हैं। अब वकीलों ने कोर्ट में आना शुरू कर दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही कोरोना का प्रभाव समाप्त होगा और उनका कार्य फिर से पटरी पर लौटेगा। -संवाद
जिला बार एसोसिएशन के प्रधान अधिवक्ता नफे सिंह बेरवाल ने बताया कि कैथल में 14 अदालतें हैं, जिनमें अब सभी में काम हो रहा है। सुरक्षित हरियाणा महामारी अलर्ट के दौरान काम पहले की अपेक्षा काफी कम हो गया था। अब उनके पास 20 प्रतिशत तक काम फिर से हो गया है, जो एक समय बिलकुल बंद ही हो गया था। उन्होंने बताया कि कैथल के सभी वकील कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करते हुए कार्य कर रहे हैं।
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बार एसोसिएशन के सचिव अधिवक्ता मनीष राठी का कहना है कि कोरोना काल ने उनके कार्य को इतना ज्यादा प्रभावित किया है कि इस समय भी कई वकीलों का तो खर्च भी पूरा नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि वकीलों के संगठनों द्वारा किसी अधिवक्ता के बीमार होने पर 50 हजार रुपये और उसकी मौत होने पर एक लाख रुपये तक आर्थिक सहायता दी जा रही है। सरकार को भी चाहिए कि वकीलों को सहायता के लिए प्रावधान करे।
उप प्रधान अधिवक्ता प्रदीप धारीवाल ने बताया कि बार एसोसिएशन से जुड़े ज्यादातर वकील इस समय केवल महत्वपूर्ण केसों को लेकर ही कार्य कर रहे हैं। क्लाइंट से मिलने तक में भी सावधानी बरत रहे हैं। सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करते हुए कार्य किया जा रहा है। फिलहाल उनके पास केस काफी कम आ रहे हैं। उम्मीद है कि कोरोना खत्म होने के साथ ही एकबार फिर से कोर्ट में कामकाज सुचारु हो सकेगा।
कोषाध्यक्ष अधिवक्ता हेमराज वधवा ने कहा कि कोरोना काल में काम न के बराबर हो गया था और अब भी स्थिति वैसी ही है। जिस प्रकार बार काउंसिल ऑफ हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट चंडीगढ़ द्वारा जरूरतमंद वकीलों की आर्थिक सहायता की जा रही है, उसी प्रकार सरकार को भी अधिवक्ताओं की मदद के लिए पहल करनी चाहिए। संकट के दौर में हर व्यक्ति सरकार से सहायता की उम्मीद करता ही है।
संयुक्त सचिव अधिवक्ता रितेश सिरोही ने कहा कि महामारी के समय में अदालतों में काम बंद रहने से वकीलों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा है। वकीलों को भी सरकार की ओर से राहत दी जानी चाहिए। कई बार उनके पास जिले से बाहर का कोई केस आ जाता है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वकीलों को भी बाहर आते-जाते समय विशेष छूट दी जाए।
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जिला बार एसोसिएशन के अनुसार कैथल बार एसोसिएशन मेें 1300 से ज्यादा वकील जुड़े हैं। कोर्ट परिसर में 304 चेंबर वकीलों को उपलब्ध हैं। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि कोरोना काल में बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ताओं के 10 हजार से ज्यादा केस लंबित हैं। अब वकीलों ने कोर्ट में आना शुरू कर दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि जल्द ही कोरोना का प्रभाव समाप्त होगा और उनका कार्य फिर से पटरी पर लौटेगा। -संवाद
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जिला बार एसोसिएशन के प्रधान अधिवक्ता नफे सिंह बेरवाल ने बताया कि कैथल में 14 अदालतें हैं, जिनमें अब सभी में काम हो रहा है। सुरक्षित हरियाणा महामारी अलर्ट के दौरान काम पहले की अपेक्षा काफी कम हो गया था। अब उनके पास 20 प्रतिशत तक काम फिर से हो गया है, जो एक समय बिलकुल बंद ही हो गया था। उन्होंने बताया कि कैथल के सभी वकील कोरोना से बचाव के नियमों का पालन करते हुए कार्य कर रहे हैं।
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बार एसोसिएशन के सचिव अधिवक्ता मनीष राठी का कहना है कि कोरोना काल ने उनके कार्य को इतना ज्यादा प्रभावित किया है कि इस समय भी कई वकीलों का तो खर्च भी पूरा नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि वकीलों के संगठनों द्वारा किसी अधिवक्ता के बीमार होने पर 50 हजार रुपये और उसकी मौत होने पर एक लाख रुपये तक आर्थिक सहायता दी जा रही है। सरकार को भी चाहिए कि वकीलों को सहायता के लिए प्रावधान करे।
उप प्रधान अधिवक्ता प्रदीप धारीवाल ने बताया कि बार एसोसिएशन से जुड़े ज्यादातर वकील इस समय केवल महत्वपूर्ण केसों को लेकर ही कार्य कर रहे हैं। क्लाइंट से मिलने तक में भी सावधानी बरत रहे हैं। सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करते हुए कार्य किया जा रहा है। फिलहाल उनके पास केस काफी कम आ रहे हैं। उम्मीद है कि कोरोना खत्म होने के साथ ही एकबार फिर से कोर्ट में कामकाज सुचारु हो सकेगा।
कोषाध्यक्ष अधिवक्ता हेमराज वधवा ने कहा कि कोरोना काल में काम न के बराबर हो गया था और अब भी स्थिति वैसी ही है। जिस प्रकार बार काउंसिल ऑफ हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट चंडीगढ़ द्वारा जरूरतमंद वकीलों की आर्थिक सहायता की जा रही है, उसी प्रकार सरकार को भी अधिवक्ताओं की मदद के लिए पहल करनी चाहिए। संकट के दौर में हर व्यक्ति सरकार से सहायता की उम्मीद करता ही है।
संयुक्त सचिव अधिवक्ता रितेश सिरोही ने कहा कि महामारी के समय में अदालतों में काम बंद रहने से वकीलों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा है। वकीलों को भी सरकार की ओर से राहत दी जानी चाहिए। कई बार उनके पास जिले से बाहर का कोई केस आ जाता है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वकीलों को भी बाहर आते-जाते समय विशेष छूट दी जाए।