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Kaithal News: बसों की कमी से बढ़ी यात्रियों की परेशानी, डिपो को 92 नई बसों की दरकार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jun 2026 01:47 AM IST
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Shortage of buses has increased the problems of passengers, the depot needs 92 new buses.
शाम के समय बस देरी से आने पर धक्का मुक्की करते हुए यात्री। संवाद
फोटो- 5
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कैथल।
रोडवेज डिपो में बसों की लगातार घटती संख्या यात्रियों के लिए परेशानी बन रही है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार बीते एक वर्ष के दौरान करीब 90 बसें जर्जर घोषित हो चुकी हैं, जबकि इसके मुकाबले डिपो को केवल 20 नई बसें ही मिल सकी हैं। नई बसों की आपूर्ति जरूरत के अनुरूप नहीं होने से परिवहन व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
जर्जर घोषित होने के बाद डिपो में बसों की संख्या घटकर करीब 158 रह जाएगी। जिले में यात्रियों की संख्या और विभिन्न रूटों की जरूरत को देखते हुए डिपो के पास करीब 250 बसें होनी चाहिए। ऐसे में वर्तमान समय में डिपो को लगभग 92 नई बसों की आवश्यकता है। यात्री रामजुवारी, मनप्रीत, सुरेंद्र, मनोज, बंटी ने बताया कि बसों की कमी का सबसे अधिक प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है।
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कई गांवों में बसों के फेरे कम कर दिए गए हैं जिसके कारण लोगों को निजी वाहनों या अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे यात्रियों के समय और पैसे दोनों की अतिरिक्त खपत हो रही है। डिपो में बसों की कमी का असर कई प्रमुख रूटों पर साफ दिखाई दे रहा है। रात के समय सबसे ज्यादा यात्रियों को बस न मिलने की दिक्कत आ रही है। दिल्ली, असंध, जींद, करनाल, चंडीगढ़, हिसार और कुरुक्षेत्र सहित अनेक इंटरसिटी व स्थानीय मार्गों पर बसों की संख्या कम करनी पड़ी है। कई रूटों पर समय सारिणी भी प्रभावित हुई है जिससे यात्रियों को लंबे समय तक बसों का इंतजार करना पड़ रहा है।
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पुरानी बसें बीच रास्ते हो रही खराब
वर्तमान में 158 में से करीब 90 बसें काफी पुरानी हो चुकी हैं। इनमें तकनीकी खामियां बार-बार सामने आ रही हैं और कई बार बसें रास्ते में ही बंद हो जाती हैं। यात्रियों को घंटों तक सड़क पर खड़ा रहना पड़ता है। इन बसों को वर्कशॉप में मरम्मत कर दोबारा रूटों पर भेजा जा रहा है लेकिन यह व्यवस्था स्थायी समाधान साबित नहीं हो रही। लगातार बढ़ती खराबियों के कारण रोडवेज सेवा की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।

मुख्यालय को नई बसों के बारे में अवगत करवाया हुआ है। जुलाई तक 15 नई बसें मिलने की उम्मीद है। यात्रियों की मांग और आवश्यकता के अनुसार बसों का संचालन किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। - अनिल कुमार, वर्कशॉप मैनेजर

शाम के समय बस देरी से आने पर धक्का मुक्की करते हुए यात्री। संवाद

शाम के समय बस देरी से आने पर धक्का मुक्की करते हुए यात्री। संवाद

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