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Kaithal News: जिला परिषद में आई ग्रांट में हुए सात करोड़ रुपये घोटाले के आरोप में एक्सईएन व जेई सहित सात गिरफ्तार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 29 May 2024 05:29 AM IST
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Seven arrested including XEN and JE on charges of scam of Rs 7 crore in grant received in Zilla Parishad

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कैथल। कोरोना महामारी के समय वर्ष 2020-2021 में सरकार की ओर से जिला परिषद के माध्यम से गांवों में सफाई के लिए जारी की गई विशेष ग्रांट के तहत सात करोड़ रुपये के घोटाले मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत एसीबी कैथल की टीम ने एक्सईएन, जेई व एक लेखाकार सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसमें चार ठेकेदारों को भी गिरफ्तार किया गया है।

इन आरोपियों में फर्जी बिल बनाकर अपने खाते में सरकारी राशि को डाला था। एसीबी ने रोहतक में कार्यरत एक्सईएन नवीन (पहले कैथल में यह एसडीओ पद पर थे), पिहोवा में कार्यरत जेई जसबीर, नारनौल में कार्यरत लेखाकार कुलवंत सहित गांव फतेहपुर निवासी ठेकेदार अभय संधू, गांव फरियाबाद निवासी दिलबाग, पूंडरी निवासी अनिल और राजेश को गिरफ्तार किया है। इस मामले में पिछले करीब चार साल से एसीबी की 10 टीमें जांच में जुटी हुई थी। इसमें नौ इंस्पेक्टर सहित दो डीएसपी जांच में जुटे हैं। पूरे मामले में एसीबी के डीजीपी अभिताभ ढिल्लों व अंबाला के एसपी कुशल के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई है जबकि इस मामले में डीएसपी पवन और ओमप्रकाश भी जांच कर रहे हैं।
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गौरतलब है कि 16 करोड़ रुपये की ग्रांट में 10 करोड़ रुपये की राशि जारी हुई थी। इसमें से आरोपियों ने गांवों में महज तीन करोड़ रुपये के ही काम करवाए थे जबकि सात करोड़ रुपये की राशि के गांवों में काम न करवाकर आरोपियों ने अपने खाते में ट्रांसफर कर लिए थे। अब एसीबी की टीम इन आरोपियों को बुधवार को न्यायालय में पेश करेगी। इस मामले में भाजपा विधायक लीला राम की ओर से सरकार को दी गई शिकायत के बाद जांच शुरू हुई थी। इसके बाद एसीबी ने करीब तीन साल तक चली जांच के आधार पर सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अभी आठ आरोपियों की ओर गिरफ्तारी किया जाना बाकी है। एसीबी के अनुसार जिप के पूर्व डिप्टी सीईओ जसविंद्र इसके मुख्य आरोपी हैं। इन आरोपियों ने फर्जी बिल बनाकर राशि पास करवाई थी और बाद में गांवों में काम न करवा उसे अपने खातों में डाल दिया था।
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गांव के स्वच्छता अभियान में हुआ सात करोड़ का घोटाला

2021 में ग्रामीण क्षेत्र के विकास कार्यों को लेकर इस साल जिला परिषद में 16 करोड़ रुपये की राशि आई थी। इसमें से करीब 10 करोड़ की राशि गांव में स्वच्छता अभियान पर खर्च होनी थी। यह राशि कागजों में तो खर्च हुई दिखाई गई, लेकिन गांव में सफाई नहीं हुई और फर्जी बिल तैयार कर आठ फर्मों को राशि जारी कर दी। इनमें से भी दो फर्मों को राशि ज्यादा मात्रा में दी गई। सफाई के नाम पर हुई करोड़ों रुपये के गोलमाल को लेकर भाजपा विधायक लीला राम, पूर्व सीपीएस व इनेलो प्रदेशाध्यक्ष रामपाल माजरा, जिला परिषद वार्ड नंबर सात से पूर्व जिला पार्षद बबली चंदाना ने अपने पति बिल्लू चंदाना के साथ सांकेतिक देकर पूरे मामले को उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव में सफाई के नाम पर भारी गोलमाल किया गया है। सफाई तो हुई नहीं, लेकिन फर्जी बिल तैयार कर फर्मों के खाता में राशि डाली दी गई।






वर्जन-

वर्ष 2020-2021 में सरकार की ओर से जिला परिषद के माध्यम से गांवों में सफाई के लिए जारी की गई विशेष ग्रांट में 15 लोगों ने करीब सात करोड़ रुपये का गबन किया है। इस मामले में अभी तक पंचायती राज के एक्सईएन, जेई व लेखाकार और ठेकेदार सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने करीब पांच करोड़ रुपये फर्जी बिल बनाकर अपने खाते में रुपये ट्रांसफर किए हैं। -महेंद्र सिंह, प्रभारी, एंटी करप्शन ब्यूरो कैथल
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