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जिले की केवल राजौंद अनाज मंडी में मिली पीआर धान
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sell in rice
- फोटो : Kaithal
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कैथल। पिछले बीस दिनों से की जा रही आढ़तियों द्वारा पीआर धान की खरीद को लेकर सरकार ने धान की स्थिति की जांच करवाई तो केवल राजौंद अनाज मंडी में पीआर धान मिला। जहां से विभाग ने करीब 2000 क्विंटल धान की खरीद की। वहीं कई अनाज मंडियों में सरकारी खरीद की मांग की जा रही थी। लेकिन सरकार ने तीन स्तरों पर जांच करवाने के बाद खरीद की गई।
इस बार 26 अक्तूबर को धान की सरकारी खरीद बंद कर दी गई थी। इसके बाद आढ़तियों की मांग पर 30 अक्तूबर को आखिरी बार खरीद की गई। इसके बाद आढ़ती मांग करते रहे किसान किसान मंडियों में पीआर धान लिए बैठा है। उसकी धान की खरीद की जाए। लेकिन धान की खरीद नहीं की गई। जिस कारण अधिकतर अनाज मंडियों से किसान अपनी धान औने-पौने दामों पर बेचकर गेहूं की बीजाई में जुट गए।
सरकार द्वारा डीएफएससी, प्रशासन सहित मार्केटिंग बोर्ड के माध्यम से जांच करवाई गई कि मंडियों में धान है या नहीं। कैथल अनाज मंडी में तहसीलदार द्वारा जांच की गई। पूरे जिले की सभी अनाज मंडियों में से केवल राजौंद अनाज मंडी में पीआर धान मिला। जहां से करीब 2000 क्विंटल धान की खरीद की गई।
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कैथल राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि कैथल अनाज मंडी से पीआर धान की खरीद नहीं हुई।
राइस मिलर सचिन मित्तल ने कहा कि हिमांक राइस लैंड के लिए राजौंद में वीरवार को धान की खरीद की गई है। जितना भी धान मिला, उसे खरीद लिया गया है।
एक सप्ताह पहले होती खरीद तो किसानों को होता फायदा
आढ़तियों का कहना है कि सरकार यदि यही एक दिन की खरीद एक सप्ताह पहले करवा देती तो जो किसान 1500 से लेकर 1600 रुपये तक निजी व्यापारियों को अपनी धान बेचकर चला गया, उसे 1835 रुपये प्रति क्विंटल के रेट मिल जाते। लेकिन अब अधिकतर किसान अपनी पीआर धान बेचकर जा चुके हैं। जिससे उन्हें अब इस धान की खरीद से ज्यादा फायदा नहीं होगा।
बासमती धान के लिए नहीं मिल रही अच्छी कीमत
इस समय अनाज मंडी में बासमती ग्रुप के धान आ रहे हैं। जिसमें ज्यादा मात्रा में 1121 किस्म आ रही है। इसकी कीमतों में भी अभी तक उछाल नहीं आया है। मंडी में आए किसान होशियार सिंह गिल ने कहा कि पिछले साल 1121 धान की कीमतें 4000 रुपये प्रति क्विंटल तक मिलीं थीं। जो इस बार गिरकर अधिकतम 2900 व कंबाईन से कटी हुई महज 2200 रुपये प्रति क्विंटल तक ही मिल रही हैं।
किसान सतपाल दिल्लो वाली ने कहा कि परंपरागत बासमती की कीमतें भी इस बार पिछले साल से कम हैं। यह पिछले साल 5 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी थी। जो इस बार मुश्किल से 3700 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही है।
किसान राजेंद्र शेरू खेड़ी ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि सरकार किसानों की ओर ध्यान दे। धान की कीमतों के कम होने के कारणों का पता लगाकर कीमतें बढ़ाने के उपाय करे। ताकि किसान को कम से कम उसका खर्च तो निकलने में मदद मिल सके।
डीएफएससी विरेंद्र सिंह ने कहा कि पूरे जिले में पता करवाया गया है। मंडियों में इस समय पीआर धान नहीं मिला। केवल राजौंद में पीआर धान मिला। जहां से जितना भी धान मिला। सारा का सारा खरीद लिया है। प्राइवेट जो खरीद चल रही है। उसकी कीमतें खरीददार द्वारा मार्केट के हिसाब से तय की जाती हैं।
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इस बार 26 अक्तूबर को धान की सरकारी खरीद बंद कर दी गई थी। इसके बाद आढ़तियों की मांग पर 30 अक्तूबर को आखिरी बार खरीद की गई। इसके बाद आढ़ती मांग करते रहे किसान किसान मंडियों में पीआर धान लिए बैठा है। उसकी धान की खरीद की जाए। लेकिन धान की खरीद नहीं की गई। जिस कारण अधिकतर अनाज मंडियों से किसान अपनी धान औने-पौने दामों पर बेचकर गेहूं की बीजाई में जुट गए।
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सरकार द्वारा डीएफएससी, प्रशासन सहित मार्केटिंग बोर्ड के माध्यम से जांच करवाई गई कि मंडियों में धान है या नहीं। कैथल अनाज मंडी में तहसीलदार द्वारा जांच की गई। पूरे जिले की सभी अनाज मंडियों में से केवल राजौंद अनाज मंडी में पीआर धान मिला। जहां से करीब 2000 क्विंटल धान की खरीद की गई।
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कैथल राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मित्तल ने कहा कि कैथल अनाज मंडी से पीआर धान की खरीद नहीं हुई।
राइस मिलर सचिन मित्तल ने कहा कि हिमांक राइस लैंड के लिए राजौंद में वीरवार को धान की खरीद की गई है। जितना भी धान मिला, उसे खरीद लिया गया है।
एक सप्ताह पहले होती खरीद तो किसानों को होता फायदा
आढ़तियों का कहना है कि सरकार यदि यही एक दिन की खरीद एक सप्ताह पहले करवा देती तो जो किसान 1500 से लेकर 1600 रुपये तक निजी व्यापारियों को अपनी धान बेचकर चला गया, उसे 1835 रुपये प्रति क्विंटल के रेट मिल जाते। लेकिन अब अधिकतर किसान अपनी पीआर धान बेचकर जा चुके हैं। जिससे उन्हें अब इस धान की खरीद से ज्यादा फायदा नहीं होगा।
बासमती धान के लिए नहीं मिल रही अच्छी कीमत
इस समय अनाज मंडी में बासमती ग्रुप के धान आ रहे हैं। जिसमें ज्यादा मात्रा में 1121 किस्म आ रही है। इसकी कीमतों में भी अभी तक उछाल नहीं आया है। मंडी में आए किसान होशियार सिंह गिल ने कहा कि पिछले साल 1121 धान की कीमतें 4000 रुपये प्रति क्विंटल तक मिलीं थीं। जो इस बार गिरकर अधिकतम 2900 व कंबाईन से कटी हुई महज 2200 रुपये प्रति क्विंटल तक ही मिल रही हैं।
किसान सतपाल दिल्लो वाली ने कहा कि परंपरागत बासमती की कीमतें भी इस बार पिछले साल से कम हैं। यह पिछले साल 5 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बिकी थी। जो इस बार मुश्किल से 3700 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रही है।
किसान राजेंद्र शेरू खेड़ी ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि सरकार किसानों की ओर ध्यान दे। धान की कीमतों के कम होने के कारणों का पता लगाकर कीमतें बढ़ाने के उपाय करे। ताकि किसान को कम से कम उसका खर्च तो निकलने में मदद मिल सके।
डीएफएससी विरेंद्र सिंह ने कहा कि पूरे जिले में पता करवाया गया है। मंडियों में इस समय पीआर धान नहीं मिला। केवल राजौंद में पीआर धान मिला। जहां से जितना भी धान मिला। सारा का सारा खरीद लिया है। प्राइवेट जो खरीद चल रही है। उसकी कीमतें खरीददार द्वारा मार्केट के हिसाब से तय की जाती हैं।