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पीआर धान की खरीद न होने व बारीक धान के रेट न मिलने से किसान संगठन ने किया रोष प्रकट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 11 Nov 2019 12:42 AM IST
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sell in rice
sell in rice - फोटो : Kaithal
अनाज मंडी में पीआर धान की सरकारी खरीद न होने व बारीक धान के सही दाम न मिलने के कारण प्रदर्शन कर किसानों ने रोष प्रकट किया। किसान नेता सतपाल दिल्लोंवाली ने कहा कि किसान अपने खून पसीने की मेहनत से फसल पैदा करते हैं उसे बेचने के लिए उनको भारी मशक्कत का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने पीआर धान की सरकारी खरीद पिछले 15 दिनों से बंद कर दी है। जिन किसानों ने पीआर धान लगाया है वे अब उसे बेचने कहां जाएं? उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों में तो ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसान को उसकी फसल बेचने के लिए पापड़ बेलने पड़ें। किसान ने आढ़ती से कर्जा उठा कर फसल अपने खेत या घर में रखने के लिए पैदा नहीं की है। किसान पर कर्जा पहले से ही अधिक चढ़ा है ऐसे में किसान तो पूरी तरह से कर्ज के बोझ में ही डूब जाएगा। सरकार को चाहिए कि वह मंडी में पड़ी पीआर धान की सरकारी तौर पर खरीद करवाए। कृष्ण शिमला ने कहा कि बारीक धान के दाम भी पिछले वर्ष की तुलना में करीब एक हजार रुपये कम मिल रहे हैं। किसान को धान की फसल तैयार करने में करीब 50 हजार रुपये की लागत आती है। एक तो इस सीजन में पिछले वर्ष की तुलना में पैदावार काफी कम है ऊपर से दाम भी करीब एक हजार रुपये प्रति क्विंटल कम मिल रहे हैं। सरकार एक ओर तो किसान की आय को दोगुना करने की बात कर रही है, दूसरी ओर उसकी धान की फसल को मंडियों में रुला रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में 20 नवंबर को कैथल में सभी किसान संगठनों की सांझा बैठक बुलाई गई है। इसमें सर्वसम्मति से आगामी कार्ययोजना तैयार की जाएगी। किसान सुरेंद्र ढूंढवा, रमेश रामगढ़, बलिंद अंबरसर व सुखपाल बात्ता ने बताया कि अनाज मंडी धान से लबालब भरी है, लेकिन बिक्री नहीं हो पा रही। दूसरी ओर अनाज मंडी के प्रधान राजेंद्र राणा ने कहा कि रविवार को अनाज मंडी में खरीद सुचारु रूप से हुई। उन्होंने कहा कि फसल के मिलने वाले दाम तो उनके हाथ में नही हैं। मंडी में आने के बाद किसान को किसी किस्म की दिक्कत न हो इसके लिए उनका संगठन पूरी तरह से मुस्तैद है।
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