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विजिलेंस की ओर से वकील बोले-पांच हजार रुपये बरामद कर पूछताछ करनी है
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कैथल। रिश्वतखोरी में फंसे चीका थाना प्रभारी जयवीर शर्मा को वीरवार को कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान विजिलेंस ने पूछताछ के लिए सात दिन की रिमांड मांगी, लेकिन अदालत ने केवल एक दिन की रिमांड मंजूर की। साथ ही आदेश दिया कि पूछताछ और रिकवरी के समय आरोपी के वकील भी साथ रहेंगे। विजिलेंस ने तर्क दिया कि एसएचओ से यह पूछा जाएगा कि पांच रुपये की रकम किस-किस के बीच बांटी जानी थी। इसे कोर्ट ने इस आधार पर तवज्जो नहीं दी कि पांच हजार रुपये इतनी बड़ी रकम नहीं कि औरों में बांटी जाए।
चीका एसएचओ को बुधवार को विजिलेंस टीम ने थाने में चांद राम नामक व्यक्ति से रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था लेकिन उनसे रिश्वत की राशि बरामद नहीं हुई। वीरवार को एसएचओ को एसीजेएम प्रवेश सिंगला की अदालत में पेश किया गया। एसएचओ की ओर से एडवोकेट अजय गुप्ता, अर्पित गुप्ता और बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान अशोक गौतम ने पक्ष रखे। वहीं विजिलेंस की ओर से सरकारी वील लवजिंद्र सिंह और रवि बराड़ ने बहस की। एडवोकेट अर्पित गुप्ता ने बताया कि विजिलेंस के वकीलों ने न्यायालय को बताया कि एसएचओ को रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया गया है। उनसे पांच हजार रुपये बरामद किया जाना है। साथ ही वह शिकायत भी, जिसे खुर्द-बुर्द करने के एवज में एसएचओ ने पांच हजार रुपये की राशि भी मांगी थी। साथ ही यह भी पता किया जाना है कि यह धनराशि किस-किस में बांटी जानी है। एडवोकेट गुप्ता ने बताया कि न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया कि महज पांच हजार रुपये की राशि को आगे भी बांटा जाना था? विजिलेंस ने बताया कि शिकायतकर्ता चांद राम पांच हजार रुपये की राशि देकर दो मिनट में बाहर आ गया और विजिलेंस की टीम ने रेड कर दी लेकिन रुपये बरामद नहीं हुए। इस पर न्यायालय ने पूछा कि दो मिनट में रुपये कहां गायब हो गए? अर्पित गुप्ता ने बताया कि उनके पक्ष की ओर से दलील दी गई कि रुपये दिए ही नहीं गए। यदि दिए गए होते तो दो मिनट में कहां गायब हो गए? उन्होंने यह तर्क भी दिया कि शिकायतकर्ता ने इस तरह की कई शिकायतें की हैं। इसके बाद विजिलेंस ने एक रिकॉर्डिंग सुनाई, जिसमें शिकायतकर्ता और एसएचओ के बीच बातचीत की बात कही गई थी। उसमें शिकायतकर्ता पांच हजार रुपये की राशि देने के लिए थाने में आने की बात कहते हुए सुन रहा है। इस पर न्यायालय ने एसएचओ जयवीर से पूछा कि यह पांच हजार रुपये कौन से देने की बात की जा रही है? इस पर एसएचओ जयवीर ने बताया कि शिकायतकर्ता ने 10 हजार रुपये उधारे लिए थे जिसमें से वह पांच हजार रुपये देने की बात कह रहा है। लेकिन वह रुपये लेकर नहीं आया। न ही उसने उसे पांच हजार रुपये की राशि दी। इस पर न्यायालय ने विजिलेंस से पूछा कि क्या आपने केवल इस ऑडियो के आधार पर केस दर्ज कर लिया? इसके बाद विजिलेंस के वकीलों ने भी अपने तर्क प्रस्तुत किए। अंत में न्यायालय ने एसएचओ को एक दिन की रिमांड पर भेजने की बात कही। शनिवार को फिर से एसएचओ को न्यायालय में पेश किया जाएगा।
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चीका एसएचओ को बुधवार को विजिलेंस टीम ने थाने में चांद राम नामक व्यक्ति से रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था लेकिन उनसे रिश्वत की राशि बरामद नहीं हुई। वीरवार को एसएचओ को एसीजेएम प्रवेश सिंगला की अदालत में पेश किया गया। एसएचओ की ओर से एडवोकेट अजय गुप्ता, अर्पित गुप्ता और बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान अशोक गौतम ने पक्ष रखे। वहीं विजिलेंस की ओर से सरकारी वील लवजिंद्र सिंह और रवि बराड़ ने बहस की। एडवोकेट अर्पित गुप्ता ने बताया कि विजिलेंस के वकीलों ने न्यायालय को बताया कि एसएचओ को रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया गया है। उनसे पांच हजार रुपये बरामद किया जाना है। साथ ही वह शिकायत भी, जिसे खुर्द-बुर्द करने के एवज में एसएचओ ने पांच हजार रुपये की राशि भी मांगी थी। साथ ही यह भी पता किया जाना है कि यह धनराशि किस-किस में बांटी जानी है। एडवोकेट गुप्ता ने बताया कि न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया कि महज पांच हजार रुपये की राशि को आगे भी बांटा जाना था? विजिलेंस ने बताया कि शिकायतकर्ता चांद राम पांच हजार रुपये की राशि देकर दो मिनट में बाहर आ गया और विजिलेंस की टीम ने रेड कर दी लेकिन रुपये बरामद नहीं हुए। इस पर न्यायालय ने पूछा कि दो मिनट में रुपये कहां गायब हो गए? अर्पित गुप्ता ने बताया कि उनके पक्ष की ओर से दलील दी गई कि रुपये दिए ही नहीं गए। यदि दिए गए होते तो दो मिनट में कहां गायब हो गए? उन्होंने यह तर्क भी दिया कि शिकायतकर्ता ने इस तरह की कई शिकायतें की हैं। इसके बाद विजिलेंस ने एक रिकॉर्डिंग सुनाई, जिसमें शिकायतकर्ता और एसएचओ के बीच बातचीत की बात कही गई थी। उसमें शिकायतकर्ता पांच हजार रुपये की राशि देने के लिए थाने में आने की बात कहते हुए सुन रहा है। इस पर न्यायालय ने एसएचओ जयवीर से पूछा कि यह पांच हजार रुपये कौन से देने की बात की जा रही है? इस पर एसएचओ जयवीर ने बताया कि शिकायतकर्ता ने 10 हजार रुपये उधारे लिए थे जिसमें से वह पांच हजार रुपये देने की बात कह रहा है। लेकिन वह रुपये लेकर नहीं आया। न ही उसने उसे पांच हजार रुपये की राशि दी। इस पर न्यायालय ने विजिलेंस से पूछा कि क्या आपने केवल इस ऑडियो के आधार पर केस दर्ज कर लिया? इसके बाद विजिलेंस के वकीलों ने भी अपने तर्क प्रस्तुत किए। अंत में न्यायालय ने एसएचओ को एक दिन की रिमांड पर भेजने की बात कही। शनिवार को फिर से एसएचओ को न्यायालय में पेश किया जाएगा।
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