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Kaithal News: टटियाना-संगतपुरा बार्डर पर सुरक्षा और कड़ी

Tue, 20 Feb 2024 03:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Tue, 20 Feb 2024 03:13 AM IST
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Security tightened at Tatiana-Sangatpura border
संवाद न्यूज एजेंसी
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गुहला-चीका/कैथल। केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों और किसान नेताओं के बीच रविवार को चंडीगढ़ में हुई चौथे दौर की वार्ता का कोई ठोस नतीजा न निकलने पर सरकार व प्रशासन एक बार फिर से सतर्क हो गया है। नाराज किसानों की ओर से 21 फरवरी को दिल्ली कूच के आह्वान के बाद टटियाना-संगतपुरा बार्डर पर सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है।

दिल्ली कूच के आह्वान के बाद टटियाना संगतपुरा बार्डरों पर कंटीली तार लगा दिए गए हैं। उधर, गुहला के टटियाना बार्डर पर सात चरण की सुरक्षा कर दी गई। अब पंजाब जाने के लिए वहां के केवल पेैदल ही जाया जा सकता है।
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टटियाना बॉर्डर पर लगे अस्थायी नाके की किलेबंदी करके उसे ओर मजबूत किया जा रहा है। पिछले एक सप्ताह से चीका से टटियाना बार्डर व पंजाब के साथ लगते अन्य रास्तों पर भी पुलिस व पैरा मिलेट्री फोर्स किसान जत्थेबंदी को दिल्ली जाने से रोकने के लिए मुस्तैद हैं। हालांकि वार्ता के बाद किसानों ने 21 फरवरी तक दिल्ली ना जाने बारे घोषणा की हुई है, लेकिन सरकार व प्रशासन किसी प्रकार का जोखिम नहीं लेना चाहता।
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सूत्रों के अनुसार, सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रशासकीय अधिकारियों को 24 घंटे तक पूरी तरह से सतर्क रहने का आदेश दिया है। इस बीच हर रोज की भांति सोमवार को भी बार्डर लांघने वाले यात्रियों को आने व जाने के लिए अपने सामान व बच्चों के साथ भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा। दूसरी तरफ गुहला-चीका में पंजाब की तरफ 13 नाके लगे हैं और उन रास्तों पर भी लोगों की परेशानी बढ़ रही है। हालांकि एक-दो नाकों पर पैदल व हलके वाहन निकलने के अस्थायी तौर पर रास्ते खोले गए हैं, लेकिन लोग लगातार बाड़े-बंदी से काफी गुस्से में हैं।

उधर, चढ़ूनी गुट ने भी आंदोलनरत किसान जत्थेबंदी का समर्थन कर दिया है, जिसके चलते इस क्षेत्र में चढ़ूनी गुट से जुड़े हजारों किसान भी सक्रिय हो गए हैं और वे भी कभी भी दिल्ली कूच करने का प्रयास कर रहे किसानों के साथ बार्डर पर पहुंच सकते हैं, जिस कारण यदि समझौता ना हुआ तो फिर आने वाले दिनों में सरकार की परेशानियां बढ़ सकती हैं।

वरिष्ठ किसान नेता लखविंद्र सिंह ने कहा कि बैठक में समझौता न होने से एक बार फिर यह जाहिर हो गया है कि सरकार के मन में खोट है और वह किसानों की मांगों को पूरा करने के मूड में नहीं है, जिसके चलते किसानों ने भी अंदर खाते दिल्ली कूच के लिए बड़ी तैयारियां


शुरू कर दी हैं और यदि 21 फरवरी को भी सरकार ने किसानों की मांगों को पूरा नहीं किया तो फिर किसान सरकार की ओर से बॉर्डरों पर की गई सुरक्षा को धता बताते उन्हें उखाड़ फेंकेंगे और दिल्ली कूच करके ही दम लेंगे।
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