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भारतीय ज्ञान-परंपरा का मूल स्रोत है संस्कृत : कुलपति
Wed, 24 Jul 2024 03:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 24 Jul 2024 03:09 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय हरियाणा की ओर से स्थापित भारतीय ज्ञान-परंपरा शोध एवं प्रशिक्षण केंद्र के सौजन्य से भारतीय ज्ञान-परंपरा के मूल स्रोत संस्कृत में कौशल संवर्धन के प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत की। प्रशिक्षण कार्यक्रम के संयोजक डॉ. नवीन शर्मा ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यशाला 23 से 30 जुलाई तक महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय टीक परिसर में आयोजित होगी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज ने प्रशिक्षण को सभी विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से करने हेतु प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारतीय ज्ञान-परम्परा का मूल स्रोत है।
श्रावण मास के शुरू होते ही विश्वविद्यालय में नव सत्र के शुभारंभ पर सभी विद्यार्थियों को संस्कृत से भली-भांति परिचित कराने,संस्कृत को रुचि पूर्ण तरीके से पढ़ने,संस्कृत की सरलता का बोध कराने व संस्कृत संवाद कौशल संवर्धन हेतु इस प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा क्षेत्र के सभी स्तरों पर संस्कृत को जीवन जीने की मुख्य धारा में शामिल कर अपनाने पर बल दिया है। प्रशिक्षण मेे विद्यार्थियों को न केवल संस्कृत अध्ययन में रुचि होगी अपितु संस्कृत की सरसता व सरलता का बोध भी होगा, जिससे विद्यार्थी भारतीय ज्ञान को आत्मसात करके जीवन को सफल कर सकेंगे।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य रूप से संचालित की जा रही है। शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. सत्य प्रकाश दुबे ने भी प्रशिक्षण के उद्घाटन कार्यक्रम में कहा। संस्कृत को विशेष सम्मान व संस्कृत के प्रति अपनी श्रद्धा एवं भाव को प्रकट करने के लिए श्रावणी पूर्णिमा क रक्षाबंधन प्रतिवर्ष संस्कृत दिवस के रूप में मनाया जाता है। अधिकतर राज्यों में श्रावण मास को संस्कृत मास के रूप में भी मनाया जाता है। उन्होंने प्रशिक्षण में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को पूर्ण मनोयोग से प्रशिक्षण प्राप्त करने हेतु प्रेरित किया। इस उद्घाटन कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के आचार्य भी उपस्थित रहे।
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कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय हरियाणा की ओर से स्थापित भारतीय ज्ञान-परंपरा शोध एवं प्रशिक्षण केंद्र के सौजन्य से भारतीय ज्ञान-परंपरा के मूल स्रोत संस्कृत में कौशल संवर्धन के प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत की। प्रशिक्षण कार्यक्रम के संयोजक डॉ. नवीन शर्मा ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यशाला 23 से 30 जुलाई तक महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय टीक परिसर में आयोजित होगी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज ने प्रशिक्षण को सभी विद्यार्थियों को अनिवार्य रूप से करने हेतु प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारतीय ज्ञान-परम्परा का मूल स्रोत है।
श्रावण मास के शुरू होते ही विश्वविद्यालय में नव सत्र के शुभारंभ पर सभी विद्यार्थियों को संस्कृत से भली-भांति परिचित कराने,संस्कृत को रुचि पूर्ण तरीके से पढ़ने,संस्कृत की सरलता का बोध कराने व संस्कृत संवाद कौशल संवर्धन हेतु इस प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा क्षेत्र के सभी स्तरों पर संस्कृत को जीवन जीने की मुख्य धारा में शामिल कर अपनाने पर बल दिया है। प्रशिक्षण मेे विद्यार्थियों को न केवल संस्कृत अध्ययन में रुचि होगी अपितु संस्कृत की सरसता व सरलता का बोध भी होगा, जिससे विद्यार्थी भारतीय ज्ञान को आत्मसात करके जीवन को सफल कर सकेंगे।
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इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य रूप से संचालित की जा रही है। शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. सत्य प्रकाश दुबे ने भी प्रशिक्षण के उद्घाटन कार्यक्रम में कहा। संस्कृत को विशेष सम्मान व संस्कृत के प्रति अपनी श्रद्धा एवं भाव को प्रकट करने के लिए श्रावणी पूर्णिमा क रक्षाबंधन प्रतिवर्ष संस्कृत दिवस के रूप में मनाया जाता है। अधिकतर राज्यों में श्रावण मास को संस्कृत मास के रूप में भी मनाया जाता है। उन्होंने प्रशिक्षण में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को पूर्ण मनोयोग से प्रशिक्षण प्राप्त करने हेतु प्रेरित किया। इस उद्घाटन कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के आचार्य भी उपस्थित रहे।
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