{"_id":"67253c13dbb0c8c50e0e0735","slug":"sangats-bowed-their-heads-with-reverence-at-gurudwara-sahib-kaithal-news-c-18-1-knl1004-511033-2024-11-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kaithal News: गुरुद्वारा साहिब में संगतों ने श्रद्धा संग टेका माथा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kaithal News: गुरुद्वारा साहिब में संगतों ने श्रद्धा संग टेका माथा
Sat, 02 Nov 2024 02:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 02 Nov 2024 02:07 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर के डोगरा गेट स्थित श्री गुरुद्वारा नीम साहिब काफी ऐतिहासिक है। दिवाली के दिन अमावस्या पर यहां पर जबरदस्त रौनक रही। सिख संगत ने यहां पहुंचकर मोमबत्तियां जलाईं और श्री गुरुग्रंथ साहिब का माथा टेका।
मान्यता है कि मुगलों से युद्ध के दौरान सिखों के नौंवे गुरु गुरु श्री तेग बहादुर दिल्ली जाते समय से यहां रुके थे और उन्होंने नीम के वृक्ष के नीचे बैठकर ध्यान लगाया था। यह नीम आज भी गुरुद्वारे में स्थित है।
यहां पर हर अमावस्या के दिन श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है और वे यहां शीश नवाते हैं।
इस गुरुद्वारा के परिसर में मुख्य भवन के अंदर श्री गुरु ग्रंथ साहिब विराजमान है। गुरुद्वारे में स्थापित सरोवर में श्रद्धालु अमावस्या के दिन सुबह के समय स्नान करने के लिए पहुंचते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
कैथल। शहर के डोगरा गेट स्थित श्री गुरुद्वारा नीम साहिब काफी ऐतिहासिक है। दिवाली के दिन अमावस्या पर यहां पर जबरदस्त रौनक रही। सिख संगत ने यहां पहुंचकर मोमबत्तियां जलाईं और श्री गुरुग्रंथ साहिब का माथा टेका।
मान्यता है कि मुगलों से युद्ध के दौरान सिखों के नौंवे गुरु गुरु श्री तेग बहादुर दिल्ली जाते समय से यहां रुके थे और उन्होंने नीम के वृक्ष के नीचे बैठकर ध्यान लगाया था। यह नीम आज भी गुरुद्वारे में स्थित है।
विज्ञापन
यहां पर हर अमावस्या के दिन श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है और वे यहां शीश नवाते हैं।
इस गुरुद्वारा के परिसर में मुख्य भवन के अंदर श्री गुरु ग्रंथ साहिब विराजमान है। गुरुद्वारे में स्थापित सरोवर में श्रद्धालु अमावस्या के दिन सुबह के समय स्नान करने के लिए पहुंचते हैं।
विज्ञापन