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Kaithal News: साक्षी महाराज ने सुनाया भगवान कृष्ण के सारथी बनने का प्रसंग
Thu, 19 Jun 2025 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 19 Jun 2025 01:04 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। इस्कॉन प्रचार समिति कैथल की सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार को कथा व्यास श्रीमान साक्षी गोपाल दास ने भगवान श्रीकृष्ण के अर्जुन के सारथी बनने की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कथा आरंभ करते हुए उन्होंने कहा कि जब महाभारत का युद्ध अवश्यंभावी हो गया, तब अर्जुन और दुर्योधन दोनों भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगने
द्वारका पहुंचे।
दुर्योधन पहले पहुंचा और श्रीकृष्ण के सिरहाने बैठ गया, जबकि अर्जुन भगवान के चरणों में खड़े हो गए। नेत्र खोलने पर भगवान की दृष्टि पहले अर्जुन पर पड़ी और उन्होंने पूछा, “हे अर्जुन! तुम कब आए?” तभी दुर्योधन बोला, “प्रभु, मैं आपसे पहले आया हूं।”
भगवान ने दोनों का स्वागत करते हुए कहा कि वे निःशस्त्र रहेंगे, केवल एक का साथ देंगे, जबकि दूसरी ओर उनकी नारायणी सेना होगी। भगवान ने अर्जुन को पहले चुनाव करने का अवसर दिया। अर्जुन ने कहा, “हे प्रभु! मुझे तो केवल आप चाहिए।” यह सुन दुर्योधन मन ही मन मुस्कराया और सेना लेकर चला गया।
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तब भगवान ने अर्जुन से पूछा कि उन्होंने निःशस्त्र रहने की शर्त के बावजूद उन्हें क्यों चुना। इस पर अर्जुन ने कहा, “हे प्रभु! आप युद्ध भले ही न करें, पर मेरा मार्गदर्शन कर सकते हैं, मेरे सारथी बन सकते हैं।” यह प्रसंग भगवान के प्रति निष्ठा, भक्ति और समर्पण का जीवंत उदाहरण है।
प्रेस सचिव भारत मदान ने बताया कि इस अवसर पर यजमान चौधरी शमशेर सिंह मानस वाले ने दीप प्रज्वलित कर कथा का शुभारंभ किया तथा कथा व्यास का पुष्पमालाओं से अभिनंदन किया।
कथा के समापन पर पवन बंसल (पवन मार्बल वाले), सोनू वर्मा, सुनील खुराना (लोहे वाले), सुरेंद्र खोखरी ने आरती उतारी।
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कैथल। इस्कॉन प्रचार समिति कैथल की सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन बुधवार को कथा व्यास श्रीमान साक्षी गोपाल दास ने भगवान श्रीकृष्ण के अर्जुन के सारथी बनने की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कथा आरंभ करते हुए उन्होंने कहा कि जब महाभारत का युद्ध अवश्यंभावी हो गया, तब अर्जुन और दुर्योधन दोनों भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगने
द्वारका पहुंचे।
दुर्योधन पहले पहुंचा और श्रीकृष्ण के सिरहाने बैठ गया, जबकि अर्जुन भगवान के चरणों में खड़े हो गए। नेत्र खोलने पर भगवान की दृष्टि पहले अर्जुन पर पड़ी और उन्होंने पूछा, “हे अर्जुन! तुम कब आए?” तभी दुर्योधन बोला, “प्रभु, मैं आपसे पहले आया हूं।”
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भगवान ने दोनों का स्वागत करते हुए कहा कि वे निःशस्त्र रहेंगे, केवल एक का साथ देंगे, जबकि दूसरी ओर उनकी नारायणी सेना होगी। भगवान ने अर्जुन को पहले चुनाव करने का अवसर दिया। अर्जुन ने कहा, “हे प्रभु! मुझे तो केवल आप चाहिए।” यह सुन दुर्योधन मन ही मन मुस्कराया और सेना लेकर चला गया।
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तब भगवान ने अर्जुन से पूछा कि उन्होंने निःशस्त्र रहने की शर्त के बावजूद उन्हें क्यों चुना। इस पर अर्जुन ने कहा, “हे प्रभु! आप युद्ध भले ही न करें, पर मेरा मार्गदर्शन कर सकते हैं, मेरे सारथी बन सकते हैं।” यह प्रसंग भगवान के प्रति निष्ठा, भक्ति और समर्पण का जीवंत उदाहरण है।
प्रेस सचिव भारत मदान ने बताया कि इस अवसर पर यजमान चौधरी शमशेर सिंह मानस वाले ने दीप प्रज्वलित कर कथा का शुभारंभ किया तथा कथा व्यास का पुष्पमालाओं से अभिनंदन किया।
कथा के समापन पर पवन बंसल (पवन मार्बल वाले), सोनू वर्मा, सुनील खुराना (लोहे वाले), सुरेंद्र खोखरी ने आरती उतारी।