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Kaithal News: त्याग, संयम है भरत चरित्र में ः स्वामी ध्रुव
Sun, 24 Nov 2024 03:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 24 Nov 2024 03:29 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर के हनुमान वाटिका मंदिर में शनिवार को पांच दिवसीय श्री राम चरित मानस के पाठ की शुरुआत की गई। पहले दिन स्वामी ध्रुव चैतन्य सरस्वती ने अपने मुखारविंद से भरत चरित्र का वर्णन किया। कहा कि भरत चरित्र में त्याग, संयम, धैर्य सब नजर आता है।
इस मौके पर मंदिर में भव्य श्री राम दरबार सजाया गया है, जो बेहद आकर्षण का केंद्र बन रहा है। भरत चरित्र का वर्णन करते हुए स्वामी ध्रुव चैतन्य सरस्वती ने बताया कि भ्रातृत्व प्रेम किसी का है तो वह हैं भरत जी। वर्तमान समय में भरत चरित्र की बहुत बड़ी प्राथमिकता है। जिस स्वार्थ के कारण आज भाई-भाई जहां दुश्मन जैसा व्यवहार करते हैं। वहीं भरत का विग्रह या स्वरूप श्री राम प्रेम मूर्ति के समान है। जिससे भाई के प्रति प्रेम की शिक्षा मिलती है।
उन्होंने कहा कि इस मनुष्य जीवन में भाई व ईश्वर के प्रति प्रेम नहीं है तो यह जीवन पशु समान होता है। भरत और राम से भाई व ईश्वर से प्रेम की सीख लेनी चाहिए। रामायण में भरत जी ही एक ऐसा पात्र है, जिसमें स्वार्थ व परमार्थ दोनों को समान दर्जा दिया गया है। इस लिए भरत जी का चरित्र अनुकरणीय है। भरत जी का एक-एक प्रसंग धर्मसार है। क्योंकि भरत का सिद्धांत लक्ष्य की प्राप्ति व राम प्रेम को दर्शाता है। हनुमान वाटिका के मुख्य पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि यह कथा दोपहर साढ़े तीन बजे शुरू होती है, जो शाम साढ़े पांच संपन्न होती है। कथा को लेकर शहर के लोगों में काफी उत्साह है। इस मौके पर सोनाली, बृजेश, ईवा, सरोज, मनप्रीत, दिनेश आदि श्रद्धालुगण मौजूद रहे।
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कैथल। शहर के हनुमान वाटिका मंदिर में शनिवार को पांच दिवसीय श्री राम चरित मानस के पाठ की शुरुआत की गई। पहले दिन स्वामी ध्रुव चैतन्य सरस्वती ने अपने मुखारविंद से भरत चरित्र का वर्णन किया। कहा कि भरत चरित्र में त्याग, संयम, धैर्य सब नजर आता है।
इस मौके पर मंदिर में भव्य श्री राम दरबार सजाया गया है, जो बेहद आकर्षण का केंद्र बन रहा है। भरत चरित्र का वर्णन करते हुए स्वामी ध्रुव चैतन्य सरस्वती ने बताया कि भ्रातृत्व प्रेम किसी का है तो वह हैं भरत जी। वर्तमान समय में भरत चरित्र की बहुत बड़ी प्राथमिकता है। जिस स्वार्थ के कारण आज भाई-भाई जहां दुश्मन जैसा व्यवहार करते हैं। वहीं भरत का विग्रह या स्वरूप श्री राम प्रेम मूर्ति के समान है। जिससे भाई के प्रति प्रेम की शिक्षा मिलती है।
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उन्होंने कहा कि इस मनुष्य जीवन में भाई व ईश्वर के प्रति प्रेम नहीं है तो यह जीवन पशु समान होता है। भरत और राम से भाई व ईश्वर से प्रेम की सीख लेनी चाहिए। रामायण में भरत जी ही एक ऐसा पात्र है, जिसमें स्वार्थ व परमार्थ दोनों को समान दर्जा दिया गया है। इस लिए भरत जी का चरित्र अनुकरणीय है। भरत जी का एक-एक प्रसंग धर्मसार है। क्योंकि भरत का सिद्धांत लक्ष्य की प्राप्ति व राम प्रेम को दर्शाता है। हनुमान वाटिका के मुख्य पुजारी पंडित विशाल शर्मा ने बताया कि यह कथा दोपहर साढ़े तीन बजे शुरू होती है, जो शाम साढ़े पांच संपन्न होती है। कथा को लेकर शहर के लोगों में काफी उत्साह है। इस मौके पर सोनाली, बृजेश, ईवा, सरोज, मनप्रीत, दिनेश आदि श्रद्धालुगण मौजूद रहे।
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