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Kaithal News: फतेहगढ़ साहिब गुरुद्वारा के लिए श्रद्धालु रवाना
Fri, 19 Dec 2025 12:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 19 Dec 2025 12:52 AM IST
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गुहला चीका: सरहिंद में गुरू घर के दर्शन के लिए बसों को हरी झंडी दिखाते हुए गुरुद्वारा प्रबंधक स
संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला चीका। हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य मेजर सिंह के प्रयासों से गुरुद्वारा प्रबंधक सुरजीत सिंह मलिकपुर ने गुरुद्वारा पातशाही छेवीं एवं नौवीं, चीका से फ्री बस यात्रा का आयोजन किया। श्रद्धालुओं का जत्था फतेहगढ़ साहिब, सरहिंद (पंजाब) स्थित गुरुद्वारा में दर्शन कर वापस लौटेगा।
सुरजीत मलिकपुर ने बताया कि फतेहगढ़ साहिब सिखों का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। वर्ष 1705 में साहिबजादा फतेह सिंह और साहिबजादा जोरावर सिंह को सरहिंद के फौजदार वजीर खान के आदेश पर दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया था। यह गुरुद्वारा उन्हीं की शहादत की याद में निर्मित किया गया है।
गुरुद्वारे परिसर में कई प्रसिद्ध संरचनाएं गुरुद्वारा भोरा साहिब, गुरुद्वारा बुर्ज माता गुजरी, गुरुद्वारा शहीद गंज, टोडरमल जैन हॉल और सरोवर हैं। गुरुद्वारे का प्रवेशद्वार सफेद पत्थर से निर्मित है, जो संगमरमर की सड़क की ओर जाता है। मुख्य भवन में सिख वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना देखने को मिलता है, जिसमें सफेद पत्थर की संरचनाएं और स्वर्ण गुंबद शामिल हैं।
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सुरजीत मलिकपुर ने कहा कि ठंडे बुर्ज में पोह की सर्द रातों में बाबा मोती राम महिरा ने साहिबजादों और माता गुजरी जी के लिए गर्म दूध की सेवा की थी। इसके बाद उन्हें मुगलों ने शहीद कर दिया। छोटे साहिबजादों ने धर्म की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपनी जान न्योछावर की। उनकी यह शहादत मुगल हुकूमत के पतन का कारण बनी और बाद में बाबा बंदा सिंह बहादुर ने इसका बदला लिया।
उन्होंने कहा कि आज भी ठंडे बुर्ज में संगत श्रद्धा अर्पित करने आती है। इस अवसर पर गुरुद्वारा हेड ग्रंथी रणजीत सिंह, गुरुद्वारा इंस्पेक्टर हर्षदीप सिंह, बलजीत सिंह, गुरजीत सिंह, गुरपिंदर सिंह और गुरसेवक सिंह भी मौजूद रहे।
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दशम गुरु प्रकाश पर्व की तैयारियां पूरी
सुरजीत सिंह मलिकपुर ने बताया कि दशम गुरु गोबिंद सिंह का प्रकाश पर्व और छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह, बाबा फतेह सिंह व माता गुजरी के बलिदान दिवस की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
25 दिसंबर: सुबह 9:30 बजे अखंड पाठ साहिब का शुभारंभ
इसी दिन गुरुद्वारा साहिब में धार्मिक दीवान सजाए जाएंगे
27 दिसंबर: अखंड पाठ साहिब का भोग डाला जाएगा
फोटो-22 – सुरजीत मलिकपुर श्रद्धालुओं को भेजते हुए
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गुहला चीका। हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य मेजर सिंह के प्रयासों से गुरुद्वारा प्रबंधक सुरजीत सिंह मलिकपुर ने गुरुद्वारा पातशाही छेवीं एवं नौवीं, चीका से फ्री बस यात्रा का आयोजन किया। श्रद्धालुओं का जत्था फतेहगढ़ साहिब, सरहिंद (पंजाब) स्थित गुरुद्वारा में दर्शन कर वापस लौटेगा।
सुरजीत मलिकपुर ने बताया कि फतेहगढ़ साहिब सिखों का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। वर्ष 1705 में साहिबजादा फतेह सिंह और साहिबजादा जोरावर सिंह को सरहिंद के फौजदार वजीर खान के आदेश पर दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया था। यह गुरुद्वारा उन्हीं की शहादत की याद में निर्मित किया गया है।
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गुरुद्वारे परिसर में कई प्रसिद्ध संरचनाएं गुरुद्वारा भोरा साहिब, गुरुद्वारा बुर्ज माता गुजरी, गुरुद्वारा शहीद गंज, टोडरमल जैन हॉल और सरोवर हैं। गुरुद्वारे का प्रवेशद्वार सफेद पत्थर से निर्मित है, जो संगमरमर की सड़क की ओर जाता है। मुख्य भवन में सिख वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना देखने को मिलता है, जिसमें सफेद पत्थर की संरचनाएं और स्वर्ण गुंबद शामिल हैं।
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सुरजीत मलिकपुर ने कहा कि ठंडे बुर्ज में पोह की सर्द रातों में बाबा मोती राम महिरा ने साहिबजादों और माता गुजरी जी के लिए गर्म दूध की सेवा की थी। इसके बाद उन्हें मुगलों ने शहीद कर दिया। छोटे साहिबजादों ने धर्म की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपनी जान न्योछावर की। उनकी यह शहादत मुगल हुकूमत के पतन का कारण बनी और बाद में बाबा बंदा सिंह बहादुर ने इसका बदला लिया।
उन्होंने कहा कि आज भी ठंडे बुर्ज में संगत श्रद्धा अर्पित करने आती है। इस अवसर पर गुरुद्वारा हेड ग्रंथी रणजीत सिंह, गुरुद्वारा इंस्पेक्टर हर्षदीप सिंह, बलजीत सिंह, गुरजीत सिंह, गुरपिंदर सिंह और गुरसेवक सिंह भी मौजूद रहे।
दशम गुरु प्रकाश पर्व की तैयारियां पूरी
सुरजीत सिंह मलिकपुर ने बताया कि दशम गुरु गोबिंद सिंह का प्रकाश पर्व और छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह, बाबा फतेह सिंह व माता गुजरी के बलिदान दिवस की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
25 दिसंबर: सुबह 9:30 बजे अखंड पाठ साहिब का शुभारंभ
इसी दिन गुरुद्वारा साहिब में धार्मिक दीवान सजाए जाएंगे
27 दिसंबर: अखंड पाठ साहिब का भोग डाला जाएगा
फोटो-22 – सुरजीत मलिकपुर श्रद्धालुओं को भेजते हुए