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Kaithal News: कलायत में दिवाली की तरह मनाएंगे रोशन महोत्सव
Thu, 05 Dec 2024 01:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Thu, 05 Dec 2024 01:05 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। कलायत मेंं फकीर नौगजा पीर धार्मिक स्थल पर 12 दिसंबर को वार्षिक रोशनी महोत्सव दिवाली की तरह मनाया जाएगा। महंत प्रकाश मुनि की रहनुमाई मेंं मनाए जाने वाले उत्सव की शुरुआत हवन से होगी। इसमें देश और विश्व शांति की कामना करते हुए आहुतियां डाली जाएगी। बाद में पूजा स्थल पर वंदना और पूजन का कार्य शुरू होगा।
प्रकाश मुनि ने बताया कि उत्सव में सभी धर्म और वर्गों के लोग मनके की माला की तरह एकता के सूत्र में बंधकर हिस्सा लेेंगे। परंपरा के अनुसार नगाड़े बजाकर समूचे क्षेत्र को उत्सव का न्योता दिया जा रहा है। व्यवस्था और सुरक्षा की दृष्टि से कार सेवक एवं पुलिस कर्मी गतिशील रहेंगे। महोत्सव उपलक्ष्य में मेले और भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
महंत ने बताया कि सदियों से कलायत में धान कटाई के उपरांत दीपावली की भांति रोशन उत्सव मनाने की परंपरा चली आ रही है।
इस स्थल पर फकीर बाबा नौगजा पीर ने मानव कल्याण के लिए घोर तप करते हुए समाधि ली थी। स्थल परिसर में सभी धर्मों की आस्था के प्रतीक देवी-देवताओं और महान विभूतियों की प्रतिमा हैं।
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इसके साथ ही प्रकृति तालाब चरम रोगों को दूर करने का सदैव सशक्त जरिया बना रहता है।
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कलायत। कलायत मेंं फकीर नौगजा पीर धार्मिक स्थल पर 12 दिसंबर को वार्षिक रोशनी महोत्सव दिवाली की तरह मनाया जाएगा। महंत प्रकाश मुनि की रहनुमाई मेंं मनाए जाने वाले उत्सव की शुरुआत हवन से होगी। इसमें देश और विश्व शांति की कामना करते हुए आहुतियां डाली जाएगी। बाद में पूजा स्थल पर वंदना और पूजन का कार्य शुरू होगा।
प्रकाश मुनि ने बताया कि उत्सव में सभी धर्म और वर्गों के लोग मनके की माला की तरह एकता के सूत्र में बंधकर हिस्सा लेेंगे। परंपरा के अनुसार नगाड़े बजाकर समूचे क्षेत्र को उत्सव का न्योता दिया जा रहा है। व्यवस्था और सुरक्षा की दृष्टि से कार सेवक एवं पुलिस कर्मी गतिशील रहेंगे। महोत्सव उपलक्ष्य में मेले और भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
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महंत ने बताया कि सदियों से कलायत में धान कटाई के उपरांत दीपावली की भांति रोशन उत्सव मनाने की परंपरा चली आ रही है।
इस स्थल पर फकीर बाबा नौगजा पीर ने मानव कल्याण के लिए घोर तप करते हुए समाधि ली थी। स्थल परिसर में सभी धर्मों की आस्था के प्रतीक देवी-देवताओं और महान विभूतियों की प्रतिमा हैं।
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