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एक ही नंबर, दो एफआईआर, आरोप अलग-अलग
ब्यूरो कैथल
Updated Sun, 06 Nov 2016 12:07 AM IST
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आम आदमी पार्टी ने चीका पुलिस पर लगाया फर्जीवाड़े का आरोप
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पोल खोल अभियान के सदस्यों पर दर्ज किए जा रहे मुकदमों में पुलिस की उस समय पोल खुल गई। जब एक ही एफआईआर नंबर पर दो अलग-अलग मामले बना दिए गए। पुलिस प्रवक्ता द्वारा जारी सूचना में शिकायतकर्ता पुलिस कर्मी ने जहां खुद के साथ मारपीट का आरोप लगाया। वहीं उन्हीं आरोपियों पर इसी नंबर की एफआईआर में दूसरे पुलिस कर्मचारी ने महज जाम लगाकर जनता को परेशान करने का आरोप लगाया। यह गफलत कैसे हुई? पुलिस के पास इसका जवाब दिए नहीं बन रहा। आम आदमी पार्टी ने पुलिस द्वारा किए जा रहे इन कारनामों की विस्तृत जांच की मांग की है। वहीं नियमानुसार एक बार दर्ज होने के बाद एफआईआर के तथ्यों में बदलाव नहीं हो सकता।
पोल खोल के संयोजक जगजीत सिंह आम आदमी पार्टी के सदस्यों के साथ एसपी कैथल से मिले। जगजीत सिंह ने बताया कि उनके अभियान को दबाने के लिए पहले मारपीट और बाद में मुकदमेबाजी का सहारा लिया गया। मगर जब वे नहीं झुके तो पुलिस ने संगीन मामले बनाने के चक्कर में एक पुलिस वाले की ही पिटाई करने का उन पर आरोप जड़ दिया। शाम होते होते जब पुलिस को अपनी गलती का अहसास हुआ तो उन्होंने मुकदमा ही बदल दिया और उसे जाम लगाने वालों के खिलाफ पर्चे में तब्दील कर दिया। पुलिस गलती यह कर बैठी कि उसने पहले पर्चे की तफसील रूटीन क्राइम रिपोर्ट में जारी कर दी मगर कोर्ट में बाद में बनाई एफआईआर भेज दी।
ये है दोनों मुकदमों में फर्क
मुकदमा नंबर 278 के तहत जो क्राइम रिपोर्ट जिला पुलिस के पीआरओ रोशन लाल खटकड़ ने इमेल के जरिए पचास से अधिक मीडियाकर्मियों को भेजी है, उसमें चीका थाना के एएसआई राम निवास पेटी नंबर 360 की ओर से आरोप लगाया गया है कि वह 3 तारीख को जब शहीद ऊधम सिंह चौक पर जा रहा था वहां जगजीत सिंह, शेर सिंह, साहब सिंह व मंगू राम ने उसे जबरन पकड़ा, लाठियों व डंडों से पीटा और जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने उक्त चारों आरोपियों के खिलाफ भादस की धारा 148, 149, 341 व 506 के तहत मामला दर्ज कर लिया।
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अब जो एफआईआर पोल खोल अभियान वालों ने कोर्ट से ली है उसका भी मुकदमा नंबर 278 है। मगर उसमें एएसआई भागीरथ पेटी नंबर 521 ने आरोप लगाया है कि 3 नवंबर को अपने साथी पुलिस कर्मियों के साथ शहीद ऊधम सिंह चौक पर तैनात था तो वहां मौजूद जगजीत सिंह, शेर सिंह, साहब सिंह, मंगू राम व डेढ़ दो सौ महिलाएं व पुरुष जो कि इंसाफ की मांग के नारे लगा रहे थे उन्होंने चौक पर चारों तरफ जाम लगा दिया। पुलिस ने उन्हें रास्ता खोलने को कहा लेकिन वो नहीं माने। इस मामले में भी पुलिस ने 148, 149, 341 व 506 धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। दोनों मामलों में आईओ चीका थाना प्रभारी रणबीर सिंह को बताया गया है।
आम आदमी पार्टी के स्टेट ऑब्जर्वर सुखबीर चहल ने जिला पुलिस से इस मामले को लेकर कई सवाल पूछे हैं। एसपी से मिलकर आए पार्टी नेता ने कहा कि अब पुलिस कह रही है कि जाम वाला पर्चा सही है तो फिर इसका मतलब हुआ कि पुलिसकर्मी की पिटाई वाला पर्चा फर्जी था? आखिर किसके इशारे पर चीका पुलिस शांतिपूर्ण आंदोलन चला रहे लोगों पर इतना संगीन मामला दर्ज करने पर तुली हुई थी?
हाईकोर्ट में जाएंगे
पोल खोल अभियान के सह संयोजक विनोद कुमार उर्फ नोदी चीका के पिता शेर सिंह ने कहा कि उनके बेटे पर जानलेवा हमला हुआ वह मरते मरते बड़ी मुश्किल से बचा लेकिन मजलूमों की रक्षा के लिए तैनात पुलिस बल जालिमों के ही हाथ का खिलौना बन गया। अब जुल्म की इंतिहा यह हो रही है कि पुलिस उन पर व उनका समर्थन करने वाले लोगों पर ताबड़ तोड़ मुकदमे दर्ज करने में लगी है। न्याय न मिलने पर वे हाईकोर्ट में जाएंगे।
जाम का ही पर्चा है, और तो कोई नहीं : डीएसपी
डीएसपी गुहला सुलतान सिंह ने बताया कि मुकदमा नंबर 278 के तहत जाम लगाने वालों के खिलाफ पर्चा दर्ज किया गया है। दूसरा और कोई पर्चा इस नंबर के तहत नहीं है।
प्रेस को दी इमेल की प्रतियां
आम आदमी पार्टी ने पत्रकारों, जिला पुलिस के पीआरओ रोशन लाल खटकड़ द्वारा प्रेस को जारी क्राइम रिपोर्ट व गुहला अदालत से निकलवाई गई एफआईआर की प्रतियां उपलब्ध करवाई। उन्होंने पुलिस से सवाल पूछा कि पुलिस खुद ही बता दे कि इसमें से अगर दूसरी एफआईआर सही है तो पहले वाली एफआईआर का उसने क्या किया। क्योंकि दर्ज एफआईआर को रद्द करने की भी एक प्रक्रिया होती है, क्या वह अपनाई।
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पोल खोल के संयोजक जगजीत सिंह आम आदमी पार्टी के सदस्यों के साथ एसपी कैथल से मिले। जगजीत सिंह ने बताया कि उनके अभियान को दबाने के लिए पहले मारपीट और बाद में मुकदमेबाजी का सहारा लिया गया। मगर जब वे नहीं झुके तो पुलिस ने संगीन मामले बनाने के चक्कर में एक पुलिस वाले की ही पिटाई करने का उन पर आरोप जड़ दिया। शाम होते होते जब पुलिस को अपनी गलती का अहसास हुआ तो उन्होंने मुकदमा ही बदल दिया और उसे जाम लगाने वालों के खिलाफ पर्चे में तब्दील कर दिया। पुलिस गलती यह कर बैठी कि उसने पहले पर्चे की तफसील रूटीन क्राइम रिपोर्ट में जारी कर दी मगर कोर्ट में बाद में बनाई एफआईआर भेज दी।
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ये है दोनों मुकदमों में फर्क
मुकदमा नंबर 278 के तहत जो क्राइम रिपोर्ट जिला पुलिस के पीआरओ रोशन लाल खटकड़ ने इमेल के जरिए पचास से अधिक मीडियाकर्मियों को भेजी है, उसमें चीका थाना के एएसआई राम निवास पेटी नंबर 360 की ओर से आरोप लगाया गया है कि वह 3 तारीख को जब शहीद ऊधम सिंह चौक पर जा रहा था वहां जगजीत सिंह, शेर सिंह, साहब सिंह व मंगू राम ने उसे जबरन पकड़ा, लाठियों व डंडों से पीटा और जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने उक्त चारों आरोपियों के खिलाफ भादस की धारा 148, 149, 341 व 506 के तहत मामला दर्ज कर लिया।
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अब जो एफआईआर पोल खोल अभियान वालों ने कोर्ट से ली है उसका भी मुकदमा नंबर 278 है। मगर उसमें एएसआई भागीरथ पेटी नंबर 521 ने आरोप लगाया है कि 3 नवंबर को अपने साथी पुलिस कर्मियों के साथ शहीद ऊधम सिंह चौक पर तैनात था तो वहां मौजूद जगजीत सिंह, शेर सिंह, साहब सिंह, मंगू राम व डेढ़ दो सौ महिलाएं व पुरुष जो कि इंसाफ की मांग के नारे लगा रहे थे उन्होंने चौक पर चारों तरफ जाम लगा दिया। पुलिस ने उन्हें रास्ता खोलने को कहा लेकिन वो नहीं माने। इस मामले में भी पुलिस ने 148, 149, 341 व 506 धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। दोनों मामलों में आईओ चीका थाना प्रभारी रणबीर सिंह को बताया गया है।
आम आदमी पार्टी के स्टेट ऑब्जर्वर सुखबीर चहल ने जिला पुलिस से इस मामले को लेकर कई सवाल पूछे हैं। एसपी से मिलकर आए पार्टी नेता ने कहा कि अब पुलिस कह रही है कि जाम वाला पर्चा सही है तो फिर इसका मतलब हुआ कि पुलिसकर्मी की पिटाई वाला पर्चा फर्जी था? आखिर किसके इशारे पर चीका पुलिस शांतिपूर्ण आंदोलन चला रहे लोगों पर इतना संगीन मामला दर्ज करने पर तुली हुई थी?
हाईकोर्ट में जाएंगे
पोल खोल अभियान के सह संयोजक विनोद कुमार उर्फ नोदी चीका के पिता शेर सिंह ने कहा कि उनके बेटे पर जानलेवा हमला हुआ वह मरते मरते बड़ी मुश्किल से बचा लेकिन मजलूमों की रक्षा के लिए तैनात पुलिस बल जालिमों के ही हाथ का खिलौना बन गया। अब जुल्म की इंतिहा यह हो रही है कि पुलिस उन पर व उनका समर्थन करने वाले लोगों पर ताबड़ तोड़ मुकदमे दर्ज करने में लगी है। न्याय न मिलने पर वे हाईकोर्ट में जाएंगे।
जाम का ही पर्चा है, और तो कोई नहीं : डीएसपी
डीएसपी गुहला सुलतान सिंह ने बताया कि मुकदमा नंबर 278 के तहत जाम लगाने वालों के खिलाफ पर्चा दर्ज किया गया है। दूसरा और कोई पर्चा इस नंबर के तहत नहीं है।
प्रेस को दी इमेल की प्रतियां
आम आदमी पार्टी ने पत्रकारों, जिला पुलिस के पीआरओ रोशन लाल खटकड़ द्वारा प्रेस को जारी क्राइम रिपोर्ट व गुहला अदालत से निकलवाई गई एफआईआर की प्रतियां उपलब्ध करवाई। उन्होंने पुलिस से सवाल पूछा कि पुलिस खुद ही बता दे कि इसमें से अगर दूसरी एफआईआर सही है तो पहले वाली एफआईआर का उसने क्या किया। क्योंकि दर्ज एफआईआर को रद्द करने की भी एक प्रक्रिया होती है, क्या वह अपनाई।