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Kaithal News: तकनीकी स्टाफ के अभाव में जूझ रही रोडवेज की वर्कशॉप, 204 में से 155 पद खाली
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बस अड्डा की वर्कशॉप में खड़ी बसें। संवाद
कैथल। रोडवेज डिपो की वर्कशॉप में कर्मचारियों की भारी कमी बनी हुई है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्कशॉप में कुल 204 स्वीकृत पद हैं लेकिन इनमें से केवल 52 कर्मचारी ही कार्यरत हैं, यानी 155 पद खाली पड़े हैं।
कर्मचारियों और यात्रियों का कहना है कि मैकेनिक और अन्य तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण शाम को डिपो में लौटने वाली बसों की नियमित जांच भी नहीं हो पाती। टायर पंचर, कमानी टूटने और अन्य तकनीकी खराबियों के कारण कई बसें रास्ते में ही खराब हो जाती हैं। इस कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। नियमित कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए विभाग आईटीआई के ट्रेनी विद्यार्थियों से काम करा रहा है। हालांकि अनुभवी कर्मचारियों की कमी के कारण वर्कशॉप का काम प्रभावित हो रहा है और बसों की मरम्मत में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। रूटों पर बसों की उपलब्धता भी घट रही है।
वर्कशॉप में बस लेकर पहुंचे एक चालक ने बताया कि तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण एक बस को ठीक होने में 5 से 7 दिन तक लग जाते हैं। इससे कई रूटों पर बसों की संख्या कम हो जाती है और यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है। यात्रियों ने सरकार से रोडवेज में जल्द भर्ती कर खाली पद भरने की मांग की है।
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यात्री मनोज कुमार ने बताया कि दो दिन पहले कुरुक्षेत्र रूट पर बस खराब हो गई थी। करीब एक घंटा तक बस ठीक होने का इंतजार करना पड़ता था। इसके अलावा कोई न कोई बस डिपो की खराब हो जाती है। डिपो में बसें काफी पुरानी हो चुकी हैं। डिपो को कर्मचारियों की जरूरत है। जल्द से जल्द सरकार को भर्ती कर वर्कशॉप में कर्मचारी लगाने चाहिए, ताकि बसों का संचालन सही ढंग से हो सके।
ये है सबसे ज्यादा पद खाली
पद कुल पद खाली पद
मैकेनिक 46 41
इलेक्ट्रीशियन 7 7
बैटरी अटेंडेंट 1 1
कारपेंटर 8 6
ब्लैकस्मिथ 9 8
वेल्डर 3 2
पेंटर 4 4
टर्नर 1 1
टायरमैन 9 4
रेडियेटर रिपेयर 3 3
सहायक मैकेनिक 20 20
सहायक इलेक्ट्रीशियन 8 8
सहायक कारपेंटर 4 4
सहायक वेल्डर 2 2
सहायक टायरमैन 5 5
वॉशिंग बॉय 8 5
स्टोरमैन 4 1
हेल्पर 41 18
कर्मचारियों की कमी के बारे में मुख्यालय को लिखा हुआ है। जल्द कर्मचारी मिलने की उम्मीद है। बसों की समय पर मरम्मत की जा रही है। लोगों को परेशान नहीं होने दिया जा रहा है।
- अनिल कुमार, वर्कशॉप मैनेजर कैथल
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कर्मचारियों और यात्रियों का कहना है कि मैकेनिक और अन्य तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण शाम को डिपो में लौटने वाली बसों की नियमित जांच भी नहीं हो पाती। टायर पंचर, कमानी टूटने और अन्य तकनीकी खराबियों के कारण कई बसें रास्ते में ही खराब हो जाती हैं। इस कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। नियमित कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए विभाग आईटीआई के ट्रेनी विद्यार्थियों से काम करा रहा है। हालांकि अनुभवी कर्मचारियों की कमी के कारण वर्कशॉप का काम प्रभावित हो रहा है और बसों की मरम्मत में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। रूटों पर बसों की उपलब्धता भी घट रही है।
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वर्कशॉप में बस लेकर पहुंचे एक चालक ने बताया कि तकनीकी स्टाफ की कमी के कारण एक बस को ठीक होने में 5 से 7 दिन तक लग जाते हैं। इससे कई रूटों पर बसों की संख्या कम हो जाती है और यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है। यात्रियों ने सरकार से रोडवेज में जल्द भर्ती कर खाली पद भरने की मांग की है।
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यात्री मनोज कुमार ने बताया कि दो दिन पहले कुरुक्षेत्र रूट पर बस खराब हो गई थी। करीब एक घंटा तक बस ठीक होने का इंतजार करना पड़ता था। इसके अलावा कोई न कोई बस डिपो की खराब हो जाती है। डिपो में बसें काफी पुरानी हो चुकी हैं। डिपो को कर्मचारियों की जरूरत है। जल्द से जल्द सरकार को भर्ती कर वर्कशॉप में कर्मचारी लगाने चाहिए, ताकि बसों का संचालन सही ढंग से हो सके।
ये है सबसे ज्यादा पद खाली
पद कुल पद खाली पद
मैकेनिक 46 41
इलेक्ट्रीशियन 7 7
बैटरी अटेंडेंट 1 1
कारपेंटर 8 6
ब्लैकस्मिथ 9 8
वेल्डर 3 2
पेंटर 4 4
टर्नर 1 1
टायरमैन 9 4
रेडियेटर रिपेयर 3 3
सहायक मैकेनिक 20 20
सहायक इलेक्ट्रीशियन 8 8
सहायक कारपेंटर 4 4
सहायक वेल्डर 2 2
सहायक टायरमैन 5 5
वॉशिंग बॉय 8 5
स्टोरमैन 4 1
हेल्पर 41 18
कर्मचारियों की कमी के बारे में मुख्यालय को लिखा हुआ है। जल्द कर्मचारी मिलने की उम्मीद है। बसों की समय पर मरम्मत की जा रही है। लोगों को परेशान नहीं होने दिया जा रहा है।
- अनिल कुमार, वर्कशॉप मैनेजर कैथल

बस अड्डा की वर्कशॉप में खड़ी बसें। संवाद