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मिलर्स के गले की फांस बना 1509 किस्म का धान

Fri, 22 Jan 2016 11:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल Updated Fri, 22 Jan 2016 11:39 PM IST
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सरकार ने मिलर्स को चावल निकालने के लिए लाखों रुपये का 1509 किस्म का धान दिया है जो अब मिलर्स के लिए परेशानी का सबब बन गया है। पिछले दिनों विवाद उत्पन्न होने पर सरकार ने इस धान को मिलर्स के यहां ही साल कर दिया था। इस धान को ऑनलाइन बेचा जाना था लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है।  मिलर्स को अब चिंता सता रही है कि कहीं इस धान की गुणवत्ता पर असर न पड़े, क्योंकि मिलों में यह धान खुले में रखा गया है। शुक्रवार को मिलर्स ने बैठक करके सरकार से इस संबंध में उचित निर्णय लेने की मांग की।
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धान के सीजन में सरकार ने मंडियों से 1509 किस्म का धान खरीदकर मिलर्स को मिलिंग के लिए दिया था। जिसके बदले में मिलर्स को चावल निकालकर सरकार को देना था। इसी बीच विपक्ष द्वारा लगाए गए घोटालों के आरोपों के बाद सरकार ने सभी मिलर्स के यहां दिए गए 1509 किस्म के धान की फिजिकल वेरिफिकेशन करवाई थी।
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एक अनुमान के अनुसार जिले में 74 मिलों में लगभग तीन लाख क्विंटल 1509 किस्म के धान को सील किया गया था। इसके बाद से इस धान को लेकर सरकार द्वारा निर्णय न लेने पर मिलर्स चिंतित हैं।
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विमला इंटरनेशनल राइस मिल में शुक्रवार को मिलर्स की बैठक लाला कश्मीरी लाल की अध्यक्षता में हुई जिसमें मिलर्स ने इस संबंध में चिंता प्रकट की। मिलर्स रामनिवास खुरानिया, सतीश गर्ग, सुशील कुमार, अशोक कुमार, संजय गर्ग, आदर्श कुमार, सुशील गर्ग, रविंद्र कुमार, पंकज, संजय कुमार ने सरकार से निर्णय लेने की मांग की।

मिलर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष संजय गर्ग ने बताया कि सरकार ने इस धान को ऑनलाइन बेचने का फैसला लिया था लेकिन अब तक इसकी खरीद के लिए कोई आगे नहीं आ रहा। मिलों में इस धान को सील किया गया है। अक्तूबर में खरीदा गया यह धान खुले में भंडारित है। हर रोज मौसम खराब रहता है जिस कारण इसकी गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। यदि सरकार इस धान को इसी मूल्य पर बाजार में भी बेचती है तो सरकार को ही प्रति क्विंटल कम से कम 250 रुपये का नुकसान होगा। जबकि मिलर्स को तीन-चार माह तक इसके रखरखाव पर भी खर्च करना पड़ रहा है। सरकार से मांग है कि मिलर्स को इस दुविधा से निकाला जाए।

जिले भर की सौ से अधिक राइस मिलों में सरकार द्वारा गठित टीमों द्वारा फिजिकल वेरिफिकेशन करवाई गई थी जिसमें करीब 74 मिलों में 1509 किस्म का धान भंडारित है।

सीजन के समय अधिक नमी वाले धान को भी खरीदा गया था। इसे गोदामों में यदि एक ही जगह सील किया गया है तो यह खराब हो सकता है। इसके चावल निकालते समय चावल के टूटने और डिस्कलर होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं जिसका गुणवत्ता पर सीधा असर होगा।


ऐसा नहीं है कि मिलों में रखे धान को पूरी तरह से सील किया गया है। मिलर्स जैसे दूसरे धान का रखरखाव करते हैं उसी तरह से इस धान का भी रखरखाव करें। सरकार द्वारा लिए गए निर्णय से उन्हें अवगत करवा दिया जाएगा। यह उनकी कस्टडी में है। उन्हीं की जिम्मेदारी बनती है कि वे धान का रखरखाव करें।
मोनिका मलिक, डीएफएससी, कैथल।
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