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Kaithal News: खाद के लिए मेरी फसल मेरा ब्योरा पर पंजीकरण अनिवार्य

Sun, 07 Jun 2026 06:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sun, 07 Jun 2026 06:02 AM IST
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Registration on Meri Fasal Mera Byora is mandatory for fertilizers
नरेंद्र पंडित
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कैथल। इस सीजन में जिले के किसानों के लिए कुल 90 हजार मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता है। अभी पांच जून तक करीब 44922 एमटी यूरिया आ चुका है। इसमें से 23782 मीट्रिक टन यूरिया का स्टॉक उपलब्ध है। यानी के अभी भी करीब 50 प्रतिशत यूरिया की कमी है। किसानों को 13 हजार एमटी डीएपी की जरूरत है और विभाग के पास 3872 उपलब्ध है। वहीं जो किसान पैक्स से डिफाल्टर हैं और जिनका अकाउंट नहीं है, उनको भी खाद नहीं मिलेगा।
नए अकाउंट भी नहीं खोले जा रहे हैं। जिन किसानों का मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण नहीं होगा, उनको भी खाद नहीं मिलेगी। अब कई किसान ऐसे हैं जो किन्हीं कारणों से पंजीकरण नहीं करा पाए। ऐसे में उन्हें परेशानी हो गई है। विभाग की तरफ से कुल स्टाक का 60 प्रतिशत पैक्स और 40 प्रतिशत निजी दुकानदारों के माध्यम से वितरित किया जाएगा। जिले में 124 पैक्स और 510 निजी लाइसेंस हैं। इसके बाद भी किसानों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं जिन किसानों का पोर्टल पर पंजीकरण नहीं है, उनको दिक्कत आ रही है। क्योंकि कई बार सर्वर डाउन होने, इंटरनेट की धीमी गति और तकनीकी खराबी के चलते पोर्टल पर डेटा समय पर अपलोड नहीं हो पा रहा है। विभाग की तरफ से भी पोर्टल तय समय अवधि के लिए खोला जाता है। ऐसे में जो किसान अपनी फसलों जैसे ज्वार, सूरजमुखी आदि की बुआई कर चुके हैं, वे खाद के लिए सुबह से शाम तक सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) और पैक्स (प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां) के चक्कर काटने को मजबूर हैं। संवाद
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इन फसलों के लिए अभी जरूरत
इस समय खेतों में खड़ी ज्वार, धान की पौध (पनीरी), और सूरजमुखी जैसी फसलों को यूरिया की सबसे ज्यादा और तत्काल जरूरत है। यदि इन फसलों को सही समय पर नाइट्रोजन (यूरिया) नहीं मिला, तो पौधों का विकास रुक जाएगा और सीधे तौर पर उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। समय पर खाद न मिलने से किसान खासे चिंतित और परेशान नजर आ रहे हैं।
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ये कहते किसान
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- किसान होशियार गिल का कहना है कि इस जटिल प्रक्रिया के कारण उन्हें समय पर यूरिया नहीं मिल पा रहा है, जिससे फसलों की ग्रोथ प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है।

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- भाकियू चढूनी के युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कसाना ने बताया कि सरकारी नियमों की वजह से किसानों को खाद नहीं मिल पा रहा है। गोदाम खाली पड़े हैं। किसान परेशान है।

- क्योड़क के किसान जयभगवान ने बताया कि वह गांव की पैक्स में यूरिया लेने के लिए कई बार चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन उन्हें यूरिया नहीं मिल रहा है। किसान को आनलाइन के फेर में उलझा दिया है।

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वर्जन
कृषि उप-निदेशक डा. रविंद्र ने बताया कि जिन किसानों ने मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण कराया है, उनको ही खाद मिलेगी। जिले में खाद की कमी नहीं है। क्योड़क में सोमवार तक खाद पहुंच जाएगी।
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