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Kaithal News: रावण के कुनबे का किया अंत
Fri, 03 Oct 2025 03:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 03 Oct 2025 03:17 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर के चांदना गेट पर वीरवार को दशहरे पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया गया। इस दौरान शहर और आसपास के क्षेत्र के लोग रावण का दहन देखने पहुंचे।
इस दौरान महिलाओं और बच्चों ने दशहरे पर लगे मेले में खरीदारी भी की। श्रीराम और रावण के युद्ध के दौरान पूरा मैदान जय श्रीराम और जय हनुमान के नारों से गूंज उठा। इस दौरान कुछ लोग इस दृश्य को अपने कैमरे में रिकॉर्ड करते भी नजर आए। मेला परिसर के आस पास पुलिस की मौजूदगी बनी रही। इस दौरान सीसीटीवी से भी पुलिस प्रशासन पैनी नजर रखे हुए था।रामलीला कमेटी की ओर से पिछले कई दिनों से रामलीला के प्रसंगों का मंचन किया जा रहा था। वीरवार शाम होते ही मंच पर भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण की झांकी सजाई गई। 23 सितंबर से शुरू हुई रामलीला का समापन रावण और उसके भाइयों के वध के दृश्य के साथ हुआ। भगवान श्रीराम ने जैसे ही तीर चलाया, रावण का विशालकाय पुतला आग की लपटों में समा गया। इसके साथ ही मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले भी राख में बदल गए।
देखते ही देखते आसमान आतिशबाजी से जगमगा उठा और लोगों ने एक-दूसरे को विजय दशमी पर्व की बधाई दी। इस मौके पर चंदाना गेट पर मेले का आयोजन भी किया गया। यहां छोटे-बड़े बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चे रामलीला मैदान में लगे खिलौनों जैसे गदा, तलवार, धनुष बाण खरीदते हुए दिखाई दिए। दुकानदार सुरेंद्र कुमार ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी बच्चे रामायण से जुड़े खिलौने बच्चों की पसंद बने रहे। वहीं, एक अन्य दुकानदार मनोज ने कहा कि विजय दशमी पर खिलौनों और मिठाइयों की बिक्री दोगुनी हो जाती है। इस बार भी कारोबार अच्छा रहा।
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स्थानीय निवासी राकेश ने बताया कि ऐसे पर्व बच्चों को हमारी परंपराओं और संस्कृति से जोड़ते हैं। रावण दहन केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक नहीं बल्कि समाज को सच्चाई और धर्म के मार्ग पर चलना सिखाता है।
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कैथल। शहर के चांदना गेट पर वीरवार को दशहरे पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया गया। इस दौरान शहर और आसपास के क्षेत्र के लोग रावण का दहन देखने पहुंचे।
इस दौरान महिलाओं और बच्चों ने दशहरे पर लगे मेले में खरीदारी भी की। श्रीराम और रावण के युद्ध के दौरान पूरा मैदान जय श्रीराम और जय हनुमान के नारों से गूंज उठा। इस दौरान कुछ लोग इस दृश्य को अपने कैमरे में रिकॉर्ड करते भी नजर आए। मेला परिसर के आस पास पुलिस की मौजूदगी बनी रही। इस दौरान सीसीटीवी से भी पुलिस प्रशासन पैनी नजर रखे हुए था।रामलीला कमेटी की ओर से पिछले कई दिनों से रामलीला के प्रसंगों का मंचन किया जा रहा था। वीरवार शाम होते ही मंच पर भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण की झांकी सजाई गई। 23 सितंबर से शुरू हुई रामलीला का समापन रावण और उसके भाइयों के वध के दृश्य के साथ हुआ। भगवान श्रीराम ने जैसे ही तीर चलाया, रावण का विशालकाय पुतला आग की लपटों में समा गया। इसके साथ ही मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले भी राख में बदल गए।
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देखते ही देखते आसमान आतिशबाजी से जगमगा उठा और लोगों ने एक-दूसरे को विजय दशमी पर्व की बधाई दी। इस मौके पर चंदाना गेट पर मेले का आयोजन भी किया गया। यहां छोटे-बड़े बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। बच्चे रामलीला मैदान में लगे खिलौनों जैसे गदा, तलवार, धनुष बाण खरीदते हुए दिखाई दिए। दुकानदार सुरेंद्र कुमार ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी बच्चे रामायण से जुड़े खिलौने बच्चों की पसंद बने रहे। वहीं, एक अन्य दुकानदार मनोज ने कहा कि विजय दशमी पर खिलौनों और मिठाइयों की बिक्री दोगुनी हो जाती है। इस बार भी कारोबार अच्छा रहा।
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स्थानीय निवासी राकेश ने बताया कि ऐसे पर्व बच्चों को हमारी परंपराओं और संस्कृति से जोड़ते हैं। रावण दहन केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक नहीं बल्कि समाज को सच्चाई और धर्म के मार्ग पर चलना सिखाता है।