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दिल्ली के प्राचीन रविदास मंदिर का दोबारा निर्माण करवाए केंद्र सरकार ः सुरजेवाला
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23-कैथल। विधायक रणदीप सुरजेवाला
- फोटो : Kaithal
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अखिल भारतीय कांग्रेस कोर कमेटी सदस्य, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी व कैथल से विधायक रणदीप सिंह सुरजेवाला ने रविदास मंदिर ढहाए जाने पर किसान भवन अपने निवास पर एक बयान जारी किया है। बयान में उन्होंने कहा कि दिल्ली के तुगलकाबाद में प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक रविदास मंदिर को केंद्रीय एजेंसियों द्वारा गिराना एक जघन्य अपराध है और इससे संत रविदास के करोड़ों शिष्यों और श्रद्धालुओं की भावनाओं का अपमान हुआ है। हम मांग करते हैं कि केंद्र सरकार दिल्ली के प्राचीन रविदास मंदिर का दोबारा निर्माण करवाए।
संत रविदास की याद में बना यह मंदिर जिस रोड पर स्थित है, उसका नामकरण भी संत रविदास के नाम पर किया गया था। किवंदती के अनुसार जब संत रविदास बनारस से पंजाब की ओर जा रहे थे, तब उन्होंने 1509 में इस स्थान पर आराम किया था। यहां पर एक बावड़ी भी बनवाई गई थी, जो आज भी मौजूद है। कहा जाता है कि स्वयं सिकंदर लोदी ने संत रविदास से नामदान लेने के बाद उन्हें यहां जमीन दान की थी, जिस पर यह मंदिर बना था। आजाद भारत में 1954 में इस जगह पर एक मंदिर का निर्माण हुआ था। वर्षों पुरानी इस धरोहर को बचाने के लिए केंद्र की भाजपा सरकार ने कोई प्रयास नहीं किए, जिससे उनका दलित विरोधी चेहरा एक बार फिर उजागर हो गया है। सरकार द्वारा गिराए गए प्राचीन रविदास मंदिर को दोबारा बनाया जाए और अदालत से जो आदेश लेने हैं, वे लिए जाएं।
इसके अलावा यह भी काफी चिंताजनक है कि भारत सरकार में 89 सचिवों में केवल एक अनुसूचित वर्ग से है जबकि पिछड़ा वर्ग से कोई भी नहीं है, जो बेहद आपत्तिजनक है। इस खुलासे से साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की आधी आबादी दलित व पिछड़ों पर भरोसा नहीं करते और उनसे भेदभाव व अनदेखी अब भाजपा का रास्ता बन गया है।
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संत रविदास की याद में बना यह मंदिर जिस रोड पर स्थित है, उसका नामकरण भी संत रविदास के नाम पर किया गया था। किवंदती के अनुसार जब संत रविदास बनारस से पंजाब की ओर जा रहे थे, तब उन्होंने 1509 में इस स्थान पर आराम किया था। यहां पर एक बावड़ी भी बनवाई गई थी, जो आज भी मौजूद है। कहा जाता है कि स्वयं सिकंदर लोदी ने संत रविदास से नामदान लेने के बाद उन्हें यहां जमीन दान की थी, जिस पर यह मंदिर बना था। आजाद भारत में 1954 में इस जगह पर एक मंदिर का निर्माण हुआ था। वर्षों पुरानी इस धरोहर को बचाने के लिए केंद्र की भाजपा सरकार ने कोई प्रयास नहीं किए, जिससे उनका दलित विरोधी चेहरा एक बार फिर उजागर हो गया है। सरकार द्वारा गिराए गए प्राचीन रविदास मंदिर को दोबारा बनाया जाए और अदालत से जो आदेश लेने हैं, वे लिए जाएं।
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इसके अलावा यह भी काफी चिंताजनक है कि भारत सरकार में 89 सचिवों में केवल एक अनुसूचित वर्ग से है जबकि पिछड़ा वर्ग से कोई भी नहीं है, जो बेहद आपत्तिजनक है। इस खुलासे से साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की आधी आबादी दलित व पिछड़ों पर भरोसा नहीं करते और उनसे भेदभाव व अनदेखी अब भाजपा का रास्ता बन गया है।
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