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राजेंद्र सिंह ने बॉक्सिंग को दिलाई नई पहचान
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
Updated Sat, 05 Sep 2015 12:06 AM IST
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कैथल के द्रोणाचार्य कहलाने वाले बॉक्सिंग कोच राजेंद्र सिंह उनसे शिक्षा लेने वाले के लिए किसी भगवान से कम नहीं हैं। राजेंद्र सिंह से ली गई शिक्षा के बल पर 40 से अधिक बच्चे सरकारी नौकरी विभिन्न पदों पर काम कर रहे हैं। आज रिटायर्ड होने के बाद भी राजेंद्र सिंह प्रतिदिन 110 लड़कों एवं 40 लड़कियों को नि:शुल्क कोचिंग दे रहे हैं।
राजेंद्र सिंह ने बताया कि 1983 में उन्होंने खेल विभाग में बतौर बॉक्सिंग कोच ज्वाइन किया। इसके बाद उन्होंने कुछ वर्ष गुड़गांव, भिवानी एवं सिरसा में नौकरी की।
इसके बाद वर्ष 1993 में कैथल में बतौर बॉक्सिंग कोच ज्वाइन किया। उस समय यहां एक भी बच्चा बॉक्सिंग सीखने नहीं आता था। इसके बाद करीब 4-5 बच्चे आना शुरू हुए।
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बाद में वह स्वयं स्कूलों एवं कॉलेजों में गए। वहां से अच्छे बच्चों को छांटकर उनके अभिभावकों से बातचीत की गई। धीरे-धीरे बच्चे आना शुरू हो गए। बाद में लड़कियों को भी बुलाया।
इस तरह से 22 सालों तक लगातार यहां सेवा जारी रही। उसी का नतीजा है कि करीब 40 बच्चों को सरकारी नौकरियां मिली। इनमें रेलवे, हरियाणा पुलिस, आर्मी, बीएसएफ, शिक्षा, रोडवेज, खेल विभाग के अलावा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में बच्चों को नौकरी मिल चुकी है।
खिलाड़ियों ने पाया मुकाम
इसके अलावा 55 बच्चों को नेशनल मेडल हासिल हुआ है। तो 500 बच्चे स्टेट आवार्डी हैं। इसके अलावा बॉक्सर मनोज कुमार ओलंपिक में खेल चुके हैं तो विक्रम ढुल व कुलविंद्र सिंह भी दो बार इंटरनेशनल खेल चुके हैं।
सेवानिवृति के बाद भी जारी है सेवा
मूलत: सुनाम के रहने वाले कोच राजेंद्र सिंह जून 2014 में सेवानिवृत हो चुके हैं। उन्हें बॉक्सिंग में अच्छा प्रशिक्षण देने के लिए दो बार स्टेट आवार्ड मिल चुका है। वे सेवानिवृत्त होने के बावजूद आरकेएसडी कॉलेज में सुबह-शाम प्रशिक्षण दे रहे हैं। जिसमें 110 लड़के एवं 40 लड़कियां उनसे प्रशिक्षण ले रही हैं।
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राजेंद्र सिंह ने बताया कि 1983 में उन्होंने खेल विभाग में बतौर बॉक्सिंग कोच ज्वाइन किया। इसके बाद उन्होंने कुछ वर्ष गुड़गांव, भिवानी एवं सिरसा में नौकरी की।
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इसके बाद वर्ष 1993 में कैथल में बतौर बॉक्सिंग कोच ज्वाइन किया। उस समय यहां एक भी बच्चा बॉक्सिंग सीखने नहीं आता था। इसके बाद करीब 4-5 बच्चे आना शुरू हुए।
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बाद में वह स्वयं स्कूलों एवं कॉलेजों में गए। वहां से अच्छे बच्चों को छांटकर उनके अभिभावकों से बातचीत की गई। धीरे-धीरे बच्चे आना शुरू हो गए। बाद में लड़कियों को भी बुलाया।
इस तरह से 22 सालों तक लगातार यहां सेवा जारी रही। उसी का नतीजा है कि करीब 40 बच्चों को सरकारी नौकरियां मिली। इनमें रेलवे, हरियाणा पुलिस, आर्मी, बीएसएफ, शिक्षा, रोडवेज, खेल विभाग के अलावा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में बच्चों को नौकरी मिल चुकी है।
खिलाड़ियों ने पाया मुकाम
इसके अलावा 55 बच्चों को नेशनल मेडल हासिल हुआ है। तो 500 बच्चे स्टेट आवार्डी हैं। इसके अलावा बॉक्सर मनोज कुमार ओलंपिक में खेल चुके हैं तो विक्रम ढुल व कुलविंद्र सिंह भी दो बार इंटरनेशनल खेल चुके हैं।
सेवानिवृति के बाद भी जारी है सेवा
मूलत: सुनाम के रहने वाले कोच राजेंद्र सिंह जून 2014 में सेवानिवृत हो चुके हैं। उन्हें बॉक्सिंग में अच्छा प्रशिक्षण देने के लिए दो बार स्टेट आवार्ड मिल चुका है। वे सेवानिवृत्त होने के बावजूद आरकेएसडी कॉलेज में सुबह-शाम प्रशिक्षण दे रहे हैं। जिसमें 110 लड़के एवं 40 लड़कियां उनसे प्रशिक्षण ले रही हैं।