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Kaithal News: बरसे बदरा पर खेतों की न बुझी प्यास, किसान मायूस

Wed, 31 Jul 2024 05:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 31 Jul 2024 05:30 AM IST
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Rains on Badra unquenched thirst of fields, farmers disappointed
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। जिले में मंगलवार को मौसम बदला और दोपहर बाद झमाझम बारिश हुई। हालांकि महज आधे घंटे हुई बारिश से किसान नाखुश दिखे। उधर, बारिश के दौरान सड़कों पर जिलावासी बारिश का आनंद लेते हुए दिखाई दिए।

बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली लेकिन बाद में फिर उमस और गर्मी से वे परेशान हो गए। इससे पहले भी लोग पूरा दिन खिली हुई धूप से परेशान हो रहे। मंगलवार को औसतन 10 एमएम बारिश दर्ज की गई।
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गौरतलब है कि पिछले तीन दिन से जिले में उमस भरी गर्मी ने लोगों के बेहाल किया हुआ है। दूसरी ओर मौसम विभाग ने मंगलवार को बारिश की संभावनाएं जताई थी। मौसम में बदलाव दोपहर के समय देख गया, जहां दोपहर को आसमान में काली घटा छाई दिखाई दी। जिससे लोगों में बारिश आने की आस जगी। शहर में दोपहर को हुई बारिश के बाद मौसम में हल्का सा उतार-चढ़ाव देखने को मिला। साथ में जिले में हुई बारिश से किसानों के चेहरे पर एक बार खुशी देखने को मिली।
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यदि जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई तो जिले में धान की फसल खराब हो जाएगी। दरअसल, इस समय धान की फसल को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है। यदि पानी न मिला तो धान के पौधे में फुटाव नहीं हो सकेगा। पौधे में फुटाव नहीं होगा तो धान की फसल में पीला पन अधिक आएगा। इसलिए ही फसलों में पानी की अधिक आवश्यकता है। -डॉ. रमेश चंद्र वर्मा, हरियाणा कृषि विवि के अधीनस्थ कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ

उम्मीद के अनुरूप अब तक बारिश नहीं

कैथल। जिले में इस बार मानसून सीजन में किसानों की उम्मीद के अनुरूप अभी तक बारिश नहीं हुई है। इस बार जून व जुलाई माह में कुल 210 एमएम बारिश ही दर्ज की गई है। जबकि यह पिछले वर्ष इतनी अधिक अधिक बारिश आई थी कि गुहला क्षेत्र में आई और लोगाें को बाढ़ का सामना करना पड़ा था परंतु इस साल जून में 67 और जुलाई में अब तक हुई है 143 एमएम बारिश ही हो पाई है।


इस बार बारिश की कमी के कारण कई क्षेत्रों में धान की फसल सूखने की कगार पर पहुंचे। इसके बाद यहां के कई किसानों ने ट्यूबवेल के पानी से दोबारा सिंचाई की है। जिले में यह नौबत कलायत क्षेत्र में आई है। हालांकि कृषि विभाग के अनुसार अभी तक धान के रकबा का क्षेत्र नहीं घटाया गया है। संवाद
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