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रूठे रहे प्रभु, निराश हुए जिला वासी
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल
Updated Thu, 25 Feb 2016 11:56 PM IST
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केंद्रीय रेल बजट में कैथल जिले की पूरी तरह से अनदेखी की गई जिससे लोगों में भारी मायूसी है। न तो नई ट्रेन की घोषणा हुई न ही स्टेशन पर सुविधाओं में बढ़ोतरी। यहां तक कि यमुनानगर-पटियाला वाया गुहला-चीका रेलवे लाइन की मांग भी अधूरी ही रह गई। रेल यात्री कल्याण समिति ने इस बजट पर निराशा प्रकट की है। रेलयात्री कल्याण समिति के अध्यक्ष सतपाल गुप्ता ने कहा कि इस रेल बजट से जिले को कुछ भी हासिल नहीं हो पाया। समिति द्वारा रखी गई एक भी मांग पूरी नहीं हुई है।
शहरवासी अनुराग सिक्का ने कहा कि रेल बजट में कई ट्रेनों को शुरू करने की उम्मीद थी। गुड़गांव से चंडीगढ़ वाया कैथल सहित कैथल से लखनऊ तक के रेल मार्ग को रेलगाड़ियों के माध्यम से जोड़ने जाने की उम्मीद थी लेकिन एक भी मांग पूरी नहीं हो पाई।
समाज सेवी डा. अश्विनी हृतवाल ने कहा कि इस रेल बजट में कुछ भी ऐसा नहीं है कि हम कह सकें कि सरकार ने कुछ राहत देने का प्रयास किया है। जो किराया पहले कई बार बढ़ा दिया गया है, अब उसे न बढ़ाकर वाहवाही लूटने का प्रयास किया जा रहा है जबकि जनता सब जानती है।
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लाजपत राय सिंगला ने कहा कि रेल बजट में कैथल जैसे रेलवे स्टेशनों पर सुधार पर जोर दिया जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यहां सुविधाओं का बड़ा अभाव है। बुलेट ट्रेन तो ठीक है लेकिन सामान्य ट्रेनों की भी सुध ली जानी चाहिए।
बलवंत जाटान का कहना है कि कैथल को रेल नेटवर्क से जोड़ने की जरूरत है। यहां से महज तीन रूटों के लिए ट्रेनें हैं। यहां विद्युतीकरण जैसा कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। छोटे रूट की ट्रेनें भी शुरू कर दी जाएं तो कैथल बड़े बरूट से अपने आप जुड़ जाएगा। लेकिन ऐसी किसी बात पर ध्यान नहीं दिया गया।
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शहरवासी अनुराग सिक्का ने कहा कि रेल बजट में कई ट्रेनों को शुरू करने की उम्मीद थी। गुड़गांव से चंडीगढ़ वाया कैथल सहित कैथल से लखनऊ तक के रेल मार्ग को रेलगाड़ियों के माध्यम से जोड़ने जाने की उम्मीद थी लेकिन एक भी मांग पूरी नहीं हो पाई।
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समाज सेवी डा. अश्विनी हृतवाल ने कहा कि इस रेल बजट में कुछ भी ऐसा नहीं है कि हम कह सकें कि सरकार ने कुछ राहत देने का प्रयास किया है। जो किराया पहले कई बार बढ़ा दिया गया है, अब उसे न बढ़ाकर वाहवाही लूटने का प्रयास किया जा रहा है जबकि जनता सब जानती है।
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लाजपत राय सिंगला ने कहा कि रेल बजट में कैथल जैसे रेलवे स्टेशनों पर सुधार पर जोर दिया जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यहां सुविधाओं का बड़ा अभाव है। बुलेट ट्रेन तो ठीक है लेकिन सामान्य ट्रेनों की भी सुध ली जानी चाहिए।
बलवंत जाटान का कहना है कि कैथल को रेल नेटवर्क से जोड़ने की जरूरत है। यहां से महज तीन रूटों के लिए ट्रेनें हैं। यहां विद्युतीकरण जैसा कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। छोटे रूट की ट्रेनें भी शुरू कर दी जाएं तो कैथल बड़े बरूट से अपने आप जुड़ जाएगा। लेकिन ऐसी किसी बात पर ध्यान नहीं दिया गया।