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Kaithal News: रेडियोलॉजिस्ट अवकाश पर, अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए भटक रहे मरीज
Mon, 20 Apr 2026 03:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 20 Apr 2026 03:52 AM IST
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सिविल अस्पताल स्थित बंद अल्ट्रासाउंड कक्ष
कैथल। जिला अस्पताल में पिछले पांच दिनों से अल्ट्रासाउंड सेवा बंद होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जांच न होने से दूर-दराज से आने वाले मरीज इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं, जबकि कई मरीज बिना जांच कराए ही खाली हाथ घर लौट रहे हैं।
अस्पताल में सुविधा बंद होने के चलते मरीजों को निजी लैब और डायग्नोस्टिक सेंटरों का रुख करना पड़ रहा है। यहां अल्ट्रासाउंड जांच के लिए 800 से 1500 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
जानकारी के अनुसार नागरिक अस्पताल का अल्ट्रासाउंड कक्ष केवल एक रेडियोलॉजिस्ट के भरोसे संचालित हो रहा है। संबंधित डॉक्टर के अवकाश पर जाने के बाद विभाग की ओर से यहां पर अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। अस्पताल प्रशासन ने कक्ष के बाहर नोटिस चस्पा कर बताया है कि डॉक्टर 20 मई तक अवकाश पर रहेंगे, लेकिन इस दौरान गर्भवती महिलाओं को छोड़कर अन्य मरीजों की जांच के लिए कोई अन्य प्रबंध नहीं किया गया है।
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स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं को निजी केंद्रों पर भी निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा दी जा रही है। हालांकि निजी केंद्रों में पर्ची जमा कराने के बाद चार से पांच दिन का समय दिया जा रहा है, जिससे गर्भवतियों को समय पर जांच नहीं मिल पा रही। मरीजों और उनके परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जिला अस्पताल में एक से अधिक रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने। एक ही डॉक्टर के भरोसे इतनी महत्वपूर्ण सेवा चलाना स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही है। संवाद
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अस्पताल में सुविधा बंद होने के चलते मरीजों को निजी लैब और डायग्नोस्टिक सेंटरों का रुख करना पड़ रहा है। यहां अल्ट्रासाउंड जांच के लिए 800 से 1500 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
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जानकारी के अनुसार नागरिक अस्पताल का अल्ट्रासाउंड कक्ष केवल एक रेडियोलॉजिस्ट के भरोसे संचालित हो रहा है। संबंधित डॉक्टर के अवकाश पर जाने के बाद विभाग की ओर से यहां पर अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। अस्पताल प्रशासन ने कक्ष के बाहर नोटिस चस्पा कर बताया है कि डॉक्टर 20 मई तक अवकाश पर रहेंगे, लेकिन इस दौरान गर्भवती महिलाओं को छोड़कर अन्य मरीजों की जांच के लिए कोई अन्य प्रबंध नहीं किया गया है।
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स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं को निजी केंद्रों पर भी निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा दी जा रही है। हालांकि निजी केंद्रों में पर्ची जमा कराने के बाद चार से पांच दिन का समय दिया जा रहा है, जिससे गर्भवतियों को समय पर जांच नहीं मिल पा रही। मरीजों और उनके परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जिला अस्पताल में एक से अधिक रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने। एक ही डॉक्टर के भरोसे इतनी महत्वपूर्ण सेवा चलाना स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही है। संवाद