{"_id":"393d915d79717dbc6e0547e84dd20680","slug":"pundri-teacher-did-fraud-in-hra-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पूंडरी डीएवी कॉलेज में एचआरए के नाम पर 12 लाख की फर्जी वसूली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पूंडरी डीएवी कॉलेज में एचआरए के नाम पर 12 लाख की फर्जी वसूली
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
Updated Wed, 10 Jun 2015 12:14 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पूंडरी। सरकारी कर्मचारी और अधिकारी हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) के नाम पर सरकार को भारी चूना लगा रहे हैं। फर्जी पता देकर कर्मी और अधिकारी हाउस रेंट अलाउंस ले रहे हैं। डीएवी कालेज पूंडरी में इस संबंध में जांच की गई, जिसमें पता चला है कि इस कॉलेज में एक साल में हाउस रेंट अलाउंस के नाम पर 12 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा हुआ है। यदि सभी विभागों में जांच की जाए तो यह फर्जीवाड़ा अरबों रुपये में हो सकता है।
शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर फर्जीवाड़ा करने वाले प्राध्यापकों पर कानूनी कार्यवाई करने की मांग भी की है। शिकायतकर्ता रणदीप आर्य का कहना है कि किसान संघ की ओर से वर्ष 2013 में ग्राम बचाओ अभियान के तहत फर्जी तरीके से एचआरए लेने पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी, तहसीलदार, उप-तहसीलदार, कृषि विकास अधिकारी, चिकित्सक, पशु चिकित्सक, एसडीओ, कालेजों तथा स्कूलों के मुखिया व अध्यापक गांवों में रहते नहीं हैं। जबकि फर्जी तरीके से एचआरए योजना का लाभ लेेते हैं। संघ ने निर्णय लिया था कि वह सरकार से मांग करेगी कि प्रदेश के ग्रामीण आंचल में पंजाब सिविल सर्विस रूल्स वोल्यूम-1 को व्यवहारी व उपयोगी बनाया जाए।
सीएम से मिलकर दी थी शिकायत
रणदीप आर्य ने बताया कि वर्ष 2013 में वे तत्कालीन मुख्यमंत्री से एचआरए के फर्जीवाड़े की जांच करवाने के लिए मिले थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें कमिश्नर ऑफ हायर एजुकेशन के पास जाने को कहा था। सबसे पहले उन्होंने शिक्षा विभाग में 26 अक्तूबर 2013 को वे कमिश्नर एसएस प्रसाद से मिले। उन्हें बताया कि किस प्रकार झूठे शपथ पत्रों पर डीएवी कालेज के प्रोफेसर एचआरए क्लेम कर रहे हैं। कमिश्नर प्रसाद ने डीएचई पंचकूला को इसकी जांच के आदेश दिए। डीएचई अंकुर गुप्ता ने अरुण जोशी उपनिदेशक कैडेट कॉप्स महानिदेशक कार्यालय की अध्यक्षता में कमेटी गठित की। इस कमेटी ने डीएवी कालेज में जाकर जांच की तो शिकायत को सही पाया। कमिश्नर प्रसाद ने एसडीएम कैथल से जांच करवाई तो पाया गया कि एचआरए लेने के लिए जो शपथ पत्र दिए गए हैं, उनका पूंडरी तहसील से पंजीकरण भी नहीं हुआ है। अकेले पूंडरी के डीएवी कॉलेज में एक साल में 12 लाख रुपये का एचआरए के नाम पर फर्जीवाड़ा सामने आया है।
विज्ञापन
ऐसे मिलता है एचआरए, कैसे हो रहा फर्जीवाड़ा
रणदीप आर्य ने बताया कि उन्होंने सभी कालेजों में फर्जीवाड़े की शिकायत दी है और आरटीआई के माध्यम से उनसे जानकारी भी मांगी, लेकिन कालेजों के मुखिया जानकारी देने में आनाकानी कर रहे हैं। जो जानकारी दे रहे वह अधूरी है। सरकार की व्यवस्था के अनुसार एचआरए व मेडिकल क्लेम करने के लिए पहले अपनी जेब से खर्च किया जाता है। मकान मालिक की दी रसीद-वाउचर फाइल में लगाया जाता है। फिर वेतन बिल बनता है। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्य में 500 रुपये के भुगतान के लिए चेक इस्तेमाल होता है।
ये हो सकती है कार्रवाई
रणदीप ने बताया कि एडमिनिस्ट्रेशन रिफोर्म एंड डिपार्टमेंट वाइड इट्स लेटर नंबर के-11022/67/2012 एआर डेटेड 13/2013 को भारत सरकार ने आदेश दे रखे है कि यदि कोई व्यक्ति या कर्मचारी सेल्फ डिक्लेरेशन व सेल्फ एटेश्ट स्वयं करेगा तो उसके खिलाफ 420 आईपीसी की कार्रवाई होनी चाहिए।
कोट
जिस तरह महंगाई और चिकित्सा भत्ता मिलता है, उसी तरह एचआरए मिलता है। हरियाणा में एचआरए भत्ता देने के नियम बहुत पुराने है, जिसमें संसोधन की जरूरत है। दिल्ली सरकार के कर्मचारियों की तर्ज पर प्रदेश सरकार को एचआरए के नियम बनाए जाने चाहिए। रणदीप का टारगेट कुछ विशेष कर्मचारी हैं, जबकि यदि कोई जांच होती है प्राचार्य समेत सभी की होनी चाहिए।
रविंद्र गासो, डॉक्टर।
अभी तक मामले का पूरा निर्णय नहीं हुआ है। हमने जो कागज लगाए हैं, वे प्राचार्य ने सत्यापित किए हैं। उन्होंने उच्चतर शिक्षा विभाग के पास पुन: जांच की अपील डाल रखी है, जिस पर कार्रवाई चल रही है।
रामजश स्वामी, एसोसिएट प्रोफेसर।
महानिदेशक उच्चतर शिक्षा ने कालेज के प्रोफेसरों की ओर से फर्जी तरीके से एचआरए लेने की रिपोर्ट मांगी थी। कालेज के 9 प्रोफेसरों की लिखित सूचना व वर्ष 2013 से 2015 से ली गई 12 लाख 9147 रुपये की राशि की डिटेल भी विभाग को भेज दी है।
डॉ. सुभाष तंवर, प्राचार्य।
विज्ञापन
शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर फर्जीवाड़ा करने वाले प्राध्यापकों पर कानूनी कार्यवाई करने की मांग भी की है। शिकायतकर्ता रणदीप आर्य का कहना है कि किसान संघ की ओर से वर्ष 2013 में ग्राम बचाओ अभियान के तहत फर्जी तरीके से एचआरए लेने पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी, तहसीलदार, उप-तहसीलदार, कृषि विकास अधिकारी, चिकित्सक, पशु चिकित्सक, एसडीओ, कालेजों तथा स्कूलों के मुखिया व अध्यापक गांवों में रहते नहीं हैं। जबकि फर्जी तरीके से एचआरए योजना का लाभ लेेते हैं। संघ ने निर्णय लिया था कि वह सरकार से मांग करेगी कि प्रदेश के ग्रामीण आंचल में पंजाब सिविल सर्विस रूल्स वोल्यूम-1 को व्यवहारी व उपयोगी बनाया जाए।
विज्ञापन
सीएम से मिलकर दी थी शिकायत
रणदीप आर्य ने बताया कि वर्ष 2013 में वे तत्कालीन मुख्यमंत्री से एचआरए के फर्जीवाड़े की जांच करवाने के लिए मिले थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें कमिश्नर ऑफ हायर एजुकेशन के पास जाने को कहा था। सबसे पहले उन्होंने शिक्षा विभाग में 26 अक्तूबर 2013 को वे कमिश्नर एसएस प्रसाद से मिले। उन्हें बताया कि किस प्रकार झूठे शपथ पत्रों पर डीएवी कालेज के प्रोफेसर एचआरए क्लेम कर रहे हैं। कमिश्नर प्रसाद ने डीएचई पंचकूला को इसकी जांच के आदेश दिए। डीएचई अंकुर गुप्ता ने अरुण जोशी उपनिदेशक कैडेट कॉप्स महानिदेशक कार्यालय की अध्यक्षता में कमेटी गठित की। इस कमेटी ने डीएवी कालेज में जाकर जांच की तो शिकायत को सही पाया। कमिश्नर प्रसाद ने एसडीएम कैथल से जांच करवाई तो पाया गया कि एचआरए लेने के लिए जो शपथ पत्र दिए गए हैं, उनका पूंडरी तहसील से पंजीकरण भी नहीं हुआ है। अकेले पूंडरी के डीएवी कॉलेज में एक साल में 12 लाख रुपये का एचआरए के नाम पर फर्जीवाड़ा सामने आया है।
विज्ञापन
ऐसे मिलता है एचआरए, कैसे हो रहा फर्जीवाड़ा
रणदीप आर्य ने बताया कि उन्होंने सभी कालेजों में फर्जीवाड़े की शिकायत दी है और आरटीआई के माध्यम से उनसे जानकारी भी मांगी, लेकिन कालेजों के मुखिया जानकारी देने में आनाकानी कर रहे हैं। जो जानकारी दे रहे वह अधूरी है। सरकार की व्यवस्था के अनुसार एचआरए व मेडिकल क्लेम करने के लिए पहले अपनी जेब से खर्च किया जाता है। मकान मालिक की दी रसीद-वाउचर फाइल में लगाया जाता है। फिर वेतन बिल बनता है। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्य में 500 रुपये के भुगतान के लिए चेक इस्तेमाल होता है।
ये हो सकती है कार्रवाई
रणदीप ने बताया कि एडमिनिस्ट्रेशन रिफोर्म एंड डिपार्टमेंट वाइड इट्स लेटर नंबर के-11022/67/2012 एआर डेटेड 13/2013 को भारत सरकार ने आदेश दे रखे है कि यदि कोई व्यक्ति या कर्मचारी सेल्फ डिक्लेरेशन व सेल्फ एटेश्ट स्वयं करेगा तो उसके खिलाफ 420 आईपीसी की कार्रवाई होनी चाहिए।
कोट
जिस तरह महंगाई और चिकित्सा भत्ता मिलता है, उसी तरह एचआरए मिलता है। हरियाणा में एचआरए भत्ता देने के नियम बहुत पुराने है, जिसमें संसोधन की जरूरत है। दिल्ली सरकार के कर्मचारियों की तर्ज पर प्रदेश सरकार को एचआरए के नियम बनाए जाने चाहिए। रणदीप का टारगेट कुछ विशेष कर्मचारी हैं, जबकि यदि कोई जांच होती है प्राचार्य समेत सभी की होनी चाहिए।
रविंद्र गासो, डॉक्टर।
अभी तक मामले का पूरा निर्णय नहीं हुआ है। हमने जो कागज लगाए हैं, वे प्राचार्य ने सत्यापित किए हैं। उन्होंने उच्चतर शिक्षा विभाग के पास पुन: जांच की अपील डाल रखी है, जिस पर कार्रवाई चल रही है।
रामजश स्वामी, एसोसिएट प्रोफेसर।
महानिदेशक उच्चतर शिक्षा ने कालेज के प्रोफेसरों की ओर से फर्जी तरीके से एचआरए लेने की रिपोर्ट मांगी थी। कालेज के 9 प्रोफेसरों की लिखित सूचना व वर्ष 2013 से 2015 से ली गई 12 लाख 9147 रुपये की राशि की डिटेल भी विभाग को भेज दी है।
डॉ. सुभाष तंवर, प्राचार्य।