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Kaithal News: पूंडरी मंडी में बारदाना देने का किया विरोध
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पूंडरी। नई अनाज मंडी एसोसिएशन की बैठक मंडी में हुई। इसकी अध्यक्षता प्रधान रणजीत सिंह टाया ने की। कार्यकारिणी के सभी सदस्यों व आढ़तियों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि उन्हें मंडी में अब बारदाना नहीं चाहिए। उन्हें पता चला था कि एजेंसी मंडी में बारदाना देने की तैयारी कर रही है। मंडी के किसानों का अधिकतर गेहूं साइलो गोदामों में चला गया है और शेष भी वहीं भेजा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में मंडी में बारदाना दिया जाता है तो आढ़तियों को परेशानी रहेगी कि उनके पास मजदूर भी नहीं है। उन्हें और किसानों को अतिरिक्त मजदूरी वहन करनी पड़ती है। वहीं सरकार को भी गेहूं के रखरखाव व अन्य जगह गेहूं भेजने में लगभग 300 रुपये प्रति क्विंटल का खर्च आएगा। सरकार को बारदाना देना था तो सीजन के शुरू में देते, अब मुश्किल के पांच प्रतिशत किसानों का गेहूं शेष है।
उधर, पुरानी अनाज मंडी के प्रधान काका गोयल ने भी बारदाना देने का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें भी बारदाना नहीं चाहिए और वे भी साइलो गोदामों में किसान का गेहूं भेजने के हक में है। अब तो साइलो गोदाम में भी किसानों का ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता है और पांच से छह घंटे के समय में किसान अपना गेहूं डालकर आ जाते है।
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प्रधान रणजीत टाया, कार्यकारिणी सदस्य व पुरानी मंडी कार्यकारिणी के सदस्य कैथल में डीसी जगदीश शर्मा, हैफेड के डीएम सुरेश कुमार व डीएफएससी कैथल से मिले और उन्हें पूरी स्थिति से अवगत करवाया। डीसी कैथल ने और एजेंसी अधिकारियों ने आढ़तियों की बात सुनने के बाद उन्हें बारदाना न देने का आश्वासन दिया।
उधर, नई अनाज मंडी एसोसिएशन के आढ़तियों ने जिला प्रशासनिक अधिकारियों से मिलने के बाद प्रधान रणजीत टाया की अध्यक्षता में बैठक की। सभी ने फैसला लिया कि इसके बावजूद भी एजेंसी बारदाना देती है तो उनकी एसोसिएशन को कोई भी आढ़ती बारदाना नहीं लेगा। इस मौके पर पूर्वी प्रधान रामपाल बरसाना, पूर्व प्रधान नरेंद्र सिंह करोड़ा, महेंद्र गोलन, गुलाब जांबा, संजीव कुमार मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में मंडी में बारदाना दिया जाता है तो आढ़तियों को परेशानी रहेगी कि उनके पास मजदूर भी नहीं है। उन्हें और किसानों को अतिरिक्त मजदूरी वहन करनी पड़ती है। वहीं सरकार को भी गेहूं के रखरखाव व अन्य जगह गेहूं भेजने में लगभग 300 रुपये प्रति क्विंटल का खर्च आएगा। सरकार को बारदाना देना था तो सीजन के शुरू में देते, अब मुश्किल के पांच प्रतिशत किसानों का गेहूं शेष है।
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उधर, पुरानी अनाज मंडी के प्रधान काका गोयल ने भी बारदाना देने का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें भी बारदाना नहीं चाहिए और वे भी साइलो गोदामों में किसान का गेहूं भेजने के हक में है। अब तो साइलो गोदाम में भी किसानों का ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता है और पांच से छह घंटे के समय में किसान अपना गेहूं डालकर आ जाते है।
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प्रधान रणजीत टाया, कार्यकारिणी सदस्य व पुरानी मंडी कार्यकारिणी के सदस्य कैथल में डीसी जगदीश शर्मा, हैफेड के डीएम सुरेश कुमार व डीएफएससी कैथल से मिले और उन्हें पूरी स्थिति से अवगत करवाया। डीसी कैथल ने और एजेंसी अधिकारियों ने आढ़तियों की बात सुनने के बाद उन्हें बारदाना न देने का आश्वासन दिया।
उधर, नई अनाज मंडी एसोसिएशन के आढ़तियों ने जिला प्रशासनिक अधिकारियों से मिलने के बाद प्रधान रणजीत टाया की अध्यक्षता में बैठक की। सभी ने फैसला लिया कि इसके बावजूद भी एजेंसी बारदाना देती है तो उनकी एसोसिएशन को कोई भी आढ़ती बारदाना नहीं लेगा। इस मौके पर पूर्वी प्रधान रामपाल बरसाना, पूर्व प्रधान नरेंद्र सिंह करोड़ा, महेंद्र गोलन, गुलाब जांबा, संजीव कुमार मौजूद रहे।