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Kaithal News: सेहत से खिलवाड़, बेपरवाह विभाग
Mon, 23 Oct 2023 12:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Mon, 23 Oct 2023 12:56 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के साथ ही मिलावटखोर भी सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में विभाग की बेपरवाही आमजन की सेहत पर भारी पड़ सकती है। स्थिति यह है कि त्योहारी सीजन शुरू होने के बाद भी फिलहाल कार्रवाई की रफ्तार बेहद सुस्त है। यही नहीं सैंपलिंग के बाद भी विभाग की ओर से 14 दिन में रिपोर्ट जारी कर कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन सैंपलिंग की रिपोर्ट आने में एक माह से अधिक का समय लग जाता है। इस दौरान जिन खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए जाते हैं, उनकी खपत हो जाती है।
त्योहारी सीजन में करीब 10 दिन पहले जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी की टीम ने मुख्यमंत्री उड़न दस्ते के साथ एक घी फैक्ट्री पर छापामारी की थी। इस दौरान वहां से पांच सैंपल एकत्र किए गए, लेकिन अभी तक सैंपल की रिपोर्ट नहीं आई है। इससे पहले जिले में अभी तक इस साल 70 में चार सैंपल फेल आ चुके हैं। इसमें दो पनीर और एक दूध का सैंपल शामिल है। जबकि पिछले साल 93 में से 19 सैंपलों की रिपोर्ट फेल मिली थी। इसके बावजूद विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। खास बात यह है कि जब तक विभाग की ओर से सैंपलों की रिपोर्ट आती है, तब तक खाद्य पदार्थों की खपत हो चुकी होती है।
पिछले वर्ष भी दिवाली के समय में विभाग और पुलिस की तरफ से की गई संयुक्त करवाई के दौरान करीब ढाई क्विंटल पनीर पकड़ा गया था। इस पनीर के पांच सैंपल लिए गए थे। इस पनीर के सैंपल भी फेल आए थे, लेकिन तब तक इस पनीर की खपत हो चुकी थी। दूसरी ओर विभाग की बड़ी उदासीनता यह भी रहती है कि त्योहारी सीजन में तो कुछेक दुकानों पर खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग की जाती है, लेकिन इसे नियमित तौर पर अमल में नहीं लाया जाता है।
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जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. गौरव शर्मा का कहना है कि मिलावटखोरों पर अंकुश लगाने के लिए त्योहारी सीजन में मिठाइयों सहित अन्य खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए जाते हैं। स्थानीय लैब नहीं होने के कारण इन्हें जांच के लिए करनाल और चंडीगढ़ भेजा जाता है। डिस्पैच सहित तमाम प्रक्रिया पूरा होने में करीब एक माह का समय लग जाता है। यही कारण है कि 14 दिनों में सैंपलिंग की रिपोर्ट नहीं हो पा रही है। मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, इसमें ढिलाई नहीं की जाएगी।
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कैथल। त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के साथ ही मिलावटखोर भी सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में विभाग की बेपरवाही आमजन की सेहत पर भारी पड़ सकती है। स्थिति यह है कि त्योहारी सीजन शुरू होने के बाद भी फिलहाल कार्रवाई की रफ्तार बेहद सुस्त है। यही नहीं सैंपलिंग के बाद भी विभाग की ओर से 14 दिन में रिपोर्ट जारी कर कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन सैंपलिंग की रिपोर्ट आने में एक माह से अधिक का समय लग जाता है। इस दौरान जिन खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए जाते हैं, उनकी खपत हो जाती है।
त्योहारी सीजन में करीब 10 दिन पहले जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी की टीम ने मुख्यमंत्री उड़न दस्ते के साथ एक घी फैक्ट्री पर छापामारी की थी। इस दौरान वहां से पांच सैंपल एकत्र किए गए, लेकिन अभी तक सैंपल की रिपोर्ट नहीं आई है। इससे पहले जिले में अभी तक इस साल 70 में चार सैंपल फेल आ चुके हैं। इसमें दो पनीर और एक दूध का सैंपल शामिल है। जबकि पिछले साल 93 में से 19 सैंपलों की रिपोर्ट फेल मिली थी। इसके बावजूद विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। खास बात यह है कि जब तक विभाग की ओर से सैंपलों की रिपोर्ट आती है, तब तक खाद्य पदार्थों की खपत हो चुकी होती है।
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पिछले वर्ष भी दिवाली के समय में विभाग और पुलिस की तरफ से की गई संयुक्त करवाई के दौरान करीब ढाई क्विंटल पनीर पकड़ा गया था। इस पनीर के पांच सैंपल लिए गए थे। इस पनीर के सैंपल भी फेल आए थे, लेकिन तब तक इस पनीर की खपत हो चुकी थी। दूसरी ओर विभाग की बड़ी उदासीनता यह भी रहती है कि त्योहारी सीजन में तो कुछेक दुकानों पर खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग की जाती है, लेकिन इसे नियमित तौर पर अमल में नहीं लाया जाता है।
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जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी डॉ. गौरव शर्मा का कहना है कि मिलावटखोरों पर अंकुश लगाने के लिए त्योहारी सीजन में मिठाइयों सहित अन्य खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए जाते हैं। स्थानीय लैब नहीं होने के कारण इन्हें जांच के लिए करनाल और चंडीगढ़ भेजा जाता है। डिस्पैच सहित तमाम प्रक्रिया पूरा होने में करीब एक माह का समय लग जाता है। यही कारण है कि 14 दिनों में सैंपलिंग की रिपोर्ट नहीं हो पा रही है। मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, इसमें ढिलाई नहीं की जाएगी।