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थाना टोल की दरों को लेकर दर्जन भर गांवों के लोगों ने बुलंद की आवाज
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People of a dozen villages raised their voice regarding the rates of police station toll
- फोटो : Kaithal
कैथल। कैथल-कुरुक्षेत्र सीमा पर स्थित कुरुक्षेत्र के गांव थाना में लगे टोल की दरें इस क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं। सोमवार को दर्जन भर गांवों के लोगों ने डीसी को ज्ञापन देकर इन गांवों के लोगों का टोल फ्री करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि जल्दी ही अधिकारियों द्वारा उनकी बात नहीं सुनी गई तो टोल पर धरना शुरू किया जाएगा। दैनिक कार्यों के लिए टोल फ्री करने की मांग को लेकर मंगलवार को दिन भर गांव क्योड़क में बैठकों का दौर चलता रहा।
ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर गहन विचार विमर्श किया। इसके बाद गांव क्योड़क निवासी युवा विकास तंवर की अगुवाई में ग्रामीणों ने डीसी को ज्ञापन सौंपा। विकास तंवर के आवास पर ही टोल से अधिकारियों की टीम पहुंची। मामले को लेकर ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच बैठक हुई। इस दौरान लोगों ने बताया कि टोल के दस किलोमीटर के एरिया में पड़ने वाले क्योड़क, बलवंती, जसवंती, बरोट, बंदराणा, नौच, दयौरा, उझाना, रसूलपुर, बेगपुर, पोबाला, टीक, सोलू माजरा, जड़ौला आदि गांवों के लोगों को अपने खेतों और पड़ोसी गांवों में सुख-दुख में शामिल होने के लिए आना-जाना पड़ता है। यदि वह हर रोज टोल देंगे तो सारी कमाई टोल में ही चली जाएगी। ऐसे में इन गांवों के लोगों का टोल फ्री होना चाहिए।
विकास तंवर ने कहा कि यदि जल्द लोगों की बात नहीं सुनीं गई तो टोल पर धरना शुरू किया जाएगा। चालक संजू, राजेश व विजय ने कहा कि टोल पर हैंड स्कैनर नहीं हैं। जिस कारण कई बार टोल पर लगे स्कैनर में फास्ट टैग स्कैन नहीं हो पाता। इस पर वाहन चालकों से डबल वसूली कर ली जाती है। जो पूरी तरह गलत है। इस टोल पर हैंड स्कैनर होना चाहिए। इसके अलावा पिछले साल से टोल की दरें भी काफी बढ़ गई हैं। जो उनके लिए परेशानी का कारण है। पिछले साल के मुकाबले टोल दरें भी बढ़ी हुई हैं।
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इस संबंध में टोल के मैनेजर अरविंद ने कहा कि इस संबंध में गांवों के लोगों के साथ बातचीत कर समस्या जानी गई है। टोल की दरों में अप्रैल माह में हर बार वृद्धि होती है। इस बार कितनी वृद्धि हुई है, यह अभी उन्हें पता नहीं। लेकिन दोगुना टोल वृद्धि की बातें निराधार हैं। पांच से दस रुपये की टोल दरों में बढ़ोतरी हुई है। जो हर साल होती है। दूसरी तरफ इस बैठक से गांवों के लोगों में टोल को लेकर कुछ समाधान की उम्मीद तो जगी है, लेकिन बढ़ी हुई पांच से दस रुपये टोल दरों व बिना फास्ट टैग वाले वाहनों से डबल वसूली उनके लिए परेशानी का कारण बनी है।
मौजूदा दरें- एक बार क्रॉसिंग के लिए 24 घंटे के लिए
हल्के वाहन 70 110
कारें व अन्य हल्के व्यावसायिक वाहन 115 175
बस-ट्रक 245 365
बड़े व्यावसायिक वाहन 264 400
4 से 6 एक्सल बड़े वाहन 385 575
बड़े साइज के वाहन 465 700
पिछले साल की दरें एक बार क्रॉसिंग के लिए 24 घंटे के लिए
हल्के वाहन 70 105
कारें व अन्य हल्के व्यावसायिक वाहन 115 170
बस-ट्रक 235 355
बड़े व्यावसायिक वाहन 260 390
4 से 6 एक्सल बड़े वाहन 370 560
बड़े साइज के वाहन 455 680
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ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर गहन विचार विमर्श किया। इसके बाद गांव क्योड़क निवासी युवा विकास तंवर की अगुवाई में ग्रामीणों ने डीसी को ज्ञापन सौंपा। विकास तंवर के आवास पर ही टोल से अधिकारियों की टीम पहुंची। मामले को लेकर ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच बैठक हुई। इस दौरान लोगों ने बताया कि टोल के दस किलोमीटर के एरिया में पड़ने वाले क्योड़क, बलवंती, जसवंती, बरोट, बंदराणा, नौच, दयौरा, उझाना, रसूलपुर, बेगपुर, पोबाला, टीक, सोलू माजरा, जड़ौला आदि गांवों के लोगों को अपने खेतों और पड़ोसी गांवों में सुख-दुख में शामिल होने के लिए आना-जाना पड़ता है। यदि वह हर रोज टोल देंगे तो सारी कमाई टोल में ही चली जाएगी। ऐसे में इन गांवों के लोगों का टोल फ्री होना चाहिए।
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विकास तंवर ने कहा कि यदि जल्द लोगों की बात नहीं सुनीं गई तो टोल पर धरना शुरू किया जाएगा। चालक संजू, राजेश व विजय ने कहा कि टोल पर हैंड स्कैनर नहीं हैं। जिस कारण कई बार टोल पर लगे स्कैनर में फास्ट टैग स्कैन नहीं हो पाता। इस पर वाहन चालकों से डबल वसूली कर ली जाती है। जो पूरी तरह गलत है। इस टोल पर हैंड स्कैनर होना चाहिए। इसके अलावा पिछले साल से टोल की दरें भी काफी बढ़ गई हैं। जो उनके लिए परेशानी का कारण है। पिछले साल के मुकाबले टोल दरें भी बढ़ी हुई हैं।
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इस संबंध में टोल के मैनेजर अरविंद ने कहा कि इस संबंध में गांवों के लोगों के साथ बातचीत कर समस्या जानी गई है। टोल की दरों में अप्रैल माह में हर बार वृद्धि होती है। इस बार कितनी वृद्धि हुई है, यह अभी उन्हें पता नहीं। लेकिन दोगुना टोल वृद्धि की बातें निराधार हैं। पांच से दस रुपये की टोल दरों में बढ़ोतरी हुई है। जो हर साल होती है। दूसरी तरफ इस बैठक से गांवों के लोगों में टोल को लेकर कुछ समाधान की उम्मीद तो जगी है, लेकिन बढ़ी हुई पांच से दस रुपये टोल दरों व बिना फास्ट टैग वाले वाहनों से डबल वसूली उनके लिए परेशानी का कारण बनी है।
मौजूदा दरें- एक बार क्रॉसिंग के लिए 24 घंटे के लिए
हल्के वाहन 70 110
कारें व अन्य हल्के व्यावसायिक वाहन 115 175
बस-ट्रक 245 365
बड़े व्यावसायिक वाहन 264 400
4 से 6 एक्सल बड़े वाहन 385 575
बड़े साइज के वाहन 465 700
पिछले साल की दरें एक बार क्रॉसिंग के लिए 24 घंटे के लिए
हल्के वाहन 70 105
कारें व अन्य हल्के व्यावसायिक वाहन 115 170
बस-ट्रक 235 355
बड़े व्यावसायिक वाहन 260 390
4 से 6 एक्सल बड़े वाहन 370 560
बड़े साइज के वाहन 455 680