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बूंदाबांदी और तेज हवा से बिछी धान की फसल
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कैथल। जिले में बूंदाबांदी और तेज हवा के चलते खेतों में धान की फसल बिछने से किसानों को नुकसान हुआ है। हालात देखते हुए धान की गुणवत्ता पर असर पड़ना स्वाभाविक है। ऐसे में उन्हें दाम मिलने की आशंका जताई जा रही है। उधर, कलायत क्षेत्र में करीब 8-10 हजार एकड़ फसल में प्रति एकड़ करीब पांच प्रतिशत नुकसान की आशंका जताई गई है।
शहर व आसपास के क्षेत्र में पड़ताल से जानकारी मिली कि कई दिन पहले हुई बारिश के कारण ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। जिले में करीब 50 प्रतिशत धान की फसल की कटाई हो चुकी थी, लेकिन धान की किस्म 1718 व बासमती धान बूंदाबांदी के साथ तेज हवा में जमीन पर बिछ गई है। इसके कारण किसानों की मेहनत बढ़ गई है। इसके साथ ही किसानों ने बताया कि जहां मजदूर प्रति किला के चार हजार पर रुपये लेते थे, अब वह गिरी हुई फसल को काटने के लिए चार हजार रुपये मांग रहे हैं। इससे किसान पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
कृषि उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद ने बताया कि बीते सप्ताह हुई बारिश से फसलों को कोई नुकसान नहीं हुआ। इससे पहले कलायत क्षेत्र में 8 से 10 हजार एकड़ फसल में थोड़ा बहुत नुकसान की आशंका है। जिले में कहीं पर भी ज्यादा नुकसान नहीं है। जहां से किसानों की ऐसी शिकायत आई हैं वहां पर कर्मचारियों ने जाकर जांच भी की है। जिले में सभी फसल अच्छी हैं।
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फसल की निकली रही औसम कम
किसान गुरनाम सहारण ने कहा कि इस बार बंपर फसल की उम्मीद थी। बीते सप्ताह हुई बारिश तक 50 प्रतिशत धान की फसल की कटाई हो चुकी थी। जो धान बची है, उसे भी कोई ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। कहीं कहीं पर फसल गिर गई है। जिस कारण से धान की औसत कम निकल रही है। वहीं गुणवत्ता पर भी असर हुआ है।
किसानों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
किसान बिंदर सिरटा ने बताया कि बीते दिनों हुई बारिश से फसलों को नुकसान नहीं हुआ है। कई जगहों पर फसल गिर गई है। जिस कारण से मजदूर कटाई के लिए ऊंचे दाम मांगने लगे हैं। इसके कारण किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
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शहर व आसपास के क्षेत्र में पड़ताल से जानकारी मिली कि कई दिन पहले हुई बारिश के कारण ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है। जिले में करीब 50 प्रतिशत धान की फसल की कटाई हो चुकी थी, लेकिन धान की किस्म 1718 व बासमती धान बूंदाबांदी के साथ तेज हवा में जमीन पर बिछ गई है। इसके कारण किसानों की मेहनत बढ़ गई है। इसके साथ ही किसानों ने बताया कि जहां मजदूर प्रति किला के चार हजार पर रुपये लेते थे, अब वह गिरी हुई फसल को काटने के लिए चार हजार रुपये मांग रहे हैं। इससे किसान पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
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कृषि उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद ने बताया कि बीते सप्ताह हुई बारिश से फसलों को कोई नुकसान नहीं हुआ। इससे पहले कलायत क्षेत्र में 8 से 10 हजार एकड़ फसल में थोड़ा बहुत नुकसान की आशंका है। जिले में कहीं पर भी ज्यादा नुकसान नहीं है। जहां से किसानों की ऐसी शिकायत आई हैं वहां पर कर्मचारियों ने जाकर जांच भी की है। जिले में सभी फसल अच्छी हैं।
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फसल की निकली रही औसम कम
किसान गुरनाम सहारण ने कहा कि इस बार बंपर फसल की उम्मीद थी। बीते सप्ताह हुई बारिश तक 50 प्रतिशत धान की फसल की कटाई हो चुकी थी। जो धान बची है, उसे भी कोई ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। कहीं कहीं पर फसल गिर गई है। जिस कारण से धान की औसत कम निकल रही है। वहीं गुणवत्ता पर भी असर हुआ है।
किसानों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
किसान बिंदर सिरटा ने बताया कि बीते दिनों हुई बारिश से फसलों को नुकसान नहीं हुआ है। कई जगहों पर फसल गिर गई है। जिस कारण से मजदूर कटाई के लिए ऊंचे दाम मांगने लगे हैं। इसके कारण किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।