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Kaithal News: मुक्केबाजी में म्हारे खिलाड़ी चमका रहे नाम

Sun, 10 Mar 2024 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sun, 10 Mar 2024 02:17 AM IST
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Our players are making names in boxing
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। आरकेएसडी महाविद्यालय में संचालित बॉक्सिंग नर्सरी में जिले के 25 खिलाड़ी बॉक्सिंग का अभ्यास कर रहे हैं। इस नर्सरी से अंतरराष्ट्रीय स्तर के अब तक लगभग 20 खिलाड़ी निकल चुके हैं, जिन्होंने विदेशों में भारत देश का नाम चमकाया है।

यहां पर लगभग 15 वर्षों से खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं। हर वर्ष यहां से राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए खिलाड़ी निकलते हैं और हर वर्ष यहां पर नए नए खिलाड़ी अभ्यास करने के लिए आते हैं।
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गौरतलब है कि इस खेल नर्सरी में कोच गुरमीत सिंह व कोच अमरजीत सिंह अभ्यास करवा रहे हैं। बॉक्सिंग खिलाड़ियों का लक्ष्य विश्व स्तर पर पदक लाना और भारत का नाम चमकाना है।
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चमकाया देश का नाम

बाक्सिंग खिलाड़ी लासू यादव ने कई बार राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय व खेलो इंडिया में स्वर्ण पदक हासिल किए हैं। वह 70 किलो भार वर्ग में बॉक्सिंग में खेलती हैं। लासू यादव ने छह वर्ष पहले बॉक्सिंग खेलना शुरू किया था। उन्होंने फरवरी 2020 में स्वीडन में हुई अपनी पहली ही इंटरनेशनल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया था। इसके बाद 2022 में दुबई में हुई एशियन बॉक्सिंग स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया था। लासू का छोटा भाई कुश भी बॉक्सिंग का खिलाड़ी है। माता जानकी देवी गृहिणी है। लासू के पिता रमेश नंबरदार खेती कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं।

स्नेहा की उपलब्धि देख गांव के 20 युवा भी कर रहे मुक्केबाजी

गांव क्योड़क निवासी स्नेहा बीते चार वर्ष से बाक्सिंग में पदक ला रही हैं। स्नेहा ने पांच वर्ष पहले ही बॉक्सिंग खेलना शुरू किया है। अब तक स्नेहा अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक हासिल कर चुकी है। स्नेहा ने 2020 में असम में हुए खेलो इंडिया में कांस्य पदक हासिल किया था। फरवरी 2022 में जर्मनी में हुई यूथ एशियन बॉक्सिंग स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया था। स्नेहा के पिता चरण सिंह ने बेटी को बॉक्सर बनाने की ठानी और उसे अभ्यास के लिए खेल सेंटर में भेजना शुरू किया था। स्नेहा को देखकर गांव के 20 खिलाड़ी भी बॉक्सिंग का अभ्यास कर रहे हैं।

चाचा की प्रेरणा से बॉक्सिंग खेलना किया शुरू

कीर्ति ढुल 81 प्लस किलो भार वर्ग में बॉक्सिंग खेलती हैं। कीर्ति आरकेएसडी कालेज में चल रहे बॉक्सिंग प्रशिक्षण केंद्र पर कोच राजेंद्र सिंह, विक्रम ढुल और गुरमीत सिंह के पास अभ्यास करती हैं। कीर्ति ढुल के चाचा विक्रम ढुल बॉक्सिंग के कोच है। कीर्ति अपने चाचा विक्रम ढुल की प्रेरणा से ही बॉक्सिंग खेल की शुरुआत की थी। कीर्ति ने 2018 में भोपाल में हुई स्कूली राष्ट्रीय स्पर्धा में कांस्य, 2019 में दिल्ली में हुई स्कूली राष्ट्रीय स्पर्धा में स्वर्ण पदक। 2021 में दुबई में हुई जूनियर एंड यूथ एशियन बाक्सिंग स्पर्धा में स्वर्ण पदक, 2022 में जार्डन में हुई यूथ एशियन बाक्सिंग चैंपियनशिप में रजत पदक हासिल किए हैं।

विश्व स्तर पर भारत के लिए स्वर्ण लाना संजना का लक्ष्य

मुक्केबाज संजना ने राष्ट्रीय स्तर पर हरियाणा का नाम भारतवर्ष में रोशन किया। बॉक्सर संजना आरकेएसडी बॉक्सिंग नर्सरी में अभ्यास करती हैं। उन्होंने बताया कि वह 75-80 किलो भार वर्ग में खेलती है। तीन वर्ष पहले ही खेलना शुरू किया है। वह इंडस पब्लिक स्कूल की छात्रा है। एशियाई चैंपियनशिप में भी अपनी प्रतिभा दिखा चुकी है। संजना का लक्ष्य विश्व स्तर पर भारत के लिए स्वर्ण पदक लाना है। संजना ने अपनी उपलब्धि का श्रेय अपने गुरु सरदार राजेंद्र सिंह, कोच विक्रम ढुल और कोच गुरमीत को दिया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 20 खिलाड़ियों ने जीते पदक

कोच गुरमीत सिंह ने बताया कि वह आरकेएसडी महाविद्यालय खेल नर्सरी में बॉक्सिंग अभ्यास करवाते हैं। इस खेल नर्सरी से जिले में अंतरराष्ट्रीय स्तर के लगभग 20 खिलाड़ी निकल चुके हैं। कई खिलाड़ियों को अच्छा प्रदर्शन करने के आधार पर सरकारी नौकरी भी मिल गई है। इस समय 25 खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं। सभी बहुत अच्छा अभ्यास करते हैं। सुबह और शाम लगभग चार घंटे सभी बच्चे बॉक्सिंग का अभ्यास करते हैं। हर वर्ष दो से तीन खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय स्तर पर देश व प्रदेश का नाम रोशन करते हैं।
बॉक्सिंग खेल में कैथल की बेटियां खूब नाम रोशन कर रही हैं। मैं किसानी करता हूं। सात साल पहले बेटी ने कैथल के छोटूराम स्टेडियम में बॉक्सिंग शुरू की थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई पदक हासिल कर चुकी है। बेटी ने बॉक्सिंग में अच्छा प्रदर्शन कर रही है। -रमेश यादव, खिलाड़ी लासू यादव के पिता।


मैं भी बॉक्सिंग का खिलाड़ी रह चुका हूं। अब प्रशिक्षण दे रहा हूं। मेरी बेटी कीर्ति ढुल को भी मैंने की बॉक्सिंग के लिए प्रेरित किया था। फिलहाल वह देश के लिए कई पदक जीत चुकी है। खेल से युवाओं का सर्वांगीण विकास होता है और स्वास्थ्य ठीक रहता है। -विक्रम ढुल, खिलाड़ी कीर्ति के चाचा।
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