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Kaithal News: पर्यटन के क्षेत्र में विकसित होने की म्हारे कैथल में है संभावना

Sat, 01 Nov 2025 01:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sat, 01 Nov 2025 01:07 AM IST
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Our Kaithal has the potential to develop in the field of tourism.
नरेंद्र पंडित
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कैथल। शनिवार यानी एक नवंबर को कैथल अपने अस्तित्व के 36 वर्ष पूरे कर रहा है। हरियाणा राज्य के गठन दिवस के साथ ही कैथल का भी आज जन्मदिन है। कैथल में धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के तमाम स्थल हैं। कई उपेक्षित हैं तो कई पर श्रद्धालुओं का सालभर लगातार आना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकार और बेहतर प्रयास करे तो म्हारा कैथल पर्यटन के क्षेत्र में ज्यादा विकसित हो सकता है।

एक नवंबर 1989 को कैथल को कुरुक्षेत्र से अलग कर स्वतंत्र जिला बनाया गया था। तब से लेकर अब तक जिले ने शिक्षा, स्वास्थ्य, राजनीति, खेल, धर्म और विकास जैसे हर क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। कैथल के लोगों की मेहनत, लगन और कर्मनिष्ठा ने जिले को तरक्की के पथ पर अग्रसर किया है। जिले में दर्जनों शिक्षण संस्थान, महाविद्यालय, मेडिकल यूनिवर्सिटी, खेल परिसर और धार्मिक स्थल विकास की पहचान बन चुके हैं। जिले की शुरुआत दो थानों से शुरू हुई थी। सिटी व सीआईए थाना था। अब संख्या 14 है। 1422 के कर्मचारियों के स्वीकृत पद है। जिनमें से 1316 पुलिस कर्मचारी मौजूद हैं।
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धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के स्थल
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महाभारतकालीन नवग्रह कुंड

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भाई उदय सिंह का किला, प्राचीन बावड़ी, बिदक्यार झील

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गुरुद्वारा नीम साहिब, श्री 11 रुद्री मंदिर, अंबकेश्वर मंदिर

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बाबा शाह कमाल कादरी, डेरा बाबा शीतलपुरी

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फल्गु तीर्थ (पूंडरी), माता मनसा देवी मंदिर, कपिल मुनि मंदिर (कलायत), खड़ालवा शिव मंदिर, गुहला का यक्ष-अरंतुक स्थल
विकास की उपलब्धियां
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करनाल रोड पर भगवान परशुराम मेडिकल कॉलेज

n क्योड़क में रिजनल एनिमल रिसर्च सेंटर

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200 बेड का नागरिक अस्पताल

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अंबाला रोड पर सर छोटू राम इंडोर स्टेडियम

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महर्षि वाल्मीकि संस्कृति विश्वविद्यालय (मुंदड़ी)

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नीलम यूनिवर्सिटी सहित कई प्रोजेक्ट जिले की पहचान हैं।

हर क्षेत्र में तरक्की के आयाम छुए ः भल्ला

साहित्यकार एवं शिक्षक डॉक्टर प्रद्युम्न भल्ला ने बताया कि कैथल कपिस्थल नाम से प्रसिद्ध भारतवर्ष की वह भूमि है जो हजारों वर्षों से धर्म क्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध रही है। जिसका ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक महत्व रहा है। इसी धरती पर जहां गीता का पावन उपदेश भी दिया गया और सिख इतिहास से जुड़ी यादें भी इतिहास के पन्नों में जगमगाती है। कैथल की प्रसिद्ध बावड़िया, रजिया बेगम का मकबरा, नीम साहिब गुरुद्वारा, 11 रूद्री शिव मंदिर जैसे स्थल कैथल को इतिहास की कड़ियों से जोड़ते हैं। कैथल एक जमाने में व्यापार की भी मंडी हुआ करता था। जिले ने हर क्षेत्र में तरक्की के आयाम छुए हैं।
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सभी जिलावासियों को बधाई : डीसी

उपायुक्त प्रीति ने कैथल और प्रदेश के जन्मदिन पर सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि हमारा प्रदेश और जिला निरंतर तरक्की के पथ पर आगे बढ़ता रहे। सभी नागरिक और अधिकारी देशहित और जनहित में काम करें।



भारत की पहली महिला शासक का मकबरा

इतिहास में दर्ज है कि यह भूमि दिल्ली की पहली महिला सुल्तान रजिया बेगम के शासन का हिस्सा रही। 13 नवंबर 1240 को दिल्ली में विद्रोह के बाद जब रजिया सुल्तान यहां आईं, तो कैथल में ही युद्ध के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। कहा जाता है कि स्थानीय लोगों ने उन्हें यहीं दफनाया। आज भी रजिया सुल्तान का मकबरा कैथल के ऐतिहासिक गौरव का प्रतीक है।
समाजहित में कार्य करें : एसपी
एसपी उपासना यादव ने कहा कि सभी जिला वासियों को कैथल के जन्मदिन की बधाई एवं शुभकामनाएं। हमारा संकल्प होना चाहिए कि समाजहित में कार्य करें। जिले को आदर्श बनाने के लिए सभी को प्रयास करने चाहिए।

समाजहित में कार्य करें : एसपी

एसपी उपासना यादव ने कहा कि सभी जिला वासियों को कैथल के जन्मदिन की बधाई एवं शुभकामनाएं। हमारा संकल्प होना चाहिए कि समाजहित में कार्य करें। जिले को आदर्श बनाने के लिए सभी को प्रयास करने चाहिए।

राजनीति में भी धाक

वर्ष 1989 में कैथल जब जिला बना, उस समय सुरेंद्र मदान कैथल विधानसभा क्षेत्र से पहले विधायक थे। इनके बाद लाला चरणदास यहां से विधायक बनें और प्रदेश में वित्त मंत्री रहे। फिर लीलाराम इनेलो से विधायक बनें।

वर्ष 2005 से लेकर 2015 तक लगातार शमशेर सिंह सुरजेवाला व 2009 व 2015 में रणदीप सुरजेवाला विधायक बनें व मंत्री रहे। वहीं रामपाल माजरा इनेलो सरकार में व गुहला से विधायक रहे दिल्लू राम बाजीगर भी मुख्य संसदीय सचिव रहे। कलायत से विधायक बनीं गीता भुक्कल शिक्षामंत्री रहीं। पाई से ही विधायक स्व. तेजीमान व नर सिंह ढांडा भी मंत्री रहे हैं। पूंडरी से विधायक रहे स्व. ईश्वर सिंह विधानसभा स्पीकर रहे।
जब जिला बना तो ये थी स्थिति
कैथल। जिला बनने के समय यहां केवल एक नेशनल हाईवे हिसार-चंडीगढ़ था। अब कैथल में तीन नेशनल हाईवे हैं। इनमें से हिसार-चंडीगढ़ हाईवे हिसार से आगे राजस्थान तक बन चुका है तो 152 डी के निर्माण ने जिले के विकास की नई गाथा लिखी है। वहीं, जम्मू से कटरा तक जाने वाला नेशनल हाईवे भी जिले के दर्जन भर से अधिक गांवों से होकर निकल रहा है।


नेशनल हाईवे गुहला-चीका से यमुनानगर तक निर्माणाधीन है। उस समय उच्च शिक्षा के नाम पर केवल आरकेएसडी कालेज था, लेकिन इसमें भी साइंस संकाय की शिक्षा नहीं मिलती थी। युवा पढ़ने के लिए जींद जाते थे। अब जिले में दर्जन भर एजुकेशन कालेज हैं। इनमें महिलाओं के कालेज भी शामिल हैं। इनमें तीनों संकाय की शिक्षा दी जा रही है। स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर एक छोटा सा अस्पताल बावड़ी के नजदीक था। अब आधूनिक सुविधाओं से लैस दो सौ बेड का अस्पताल है। करनाल रोड पर मेडिकल यूनिवर्सिटी निर्माणाधीन है। संवाद

बन रहा शिक्षा का हब

n आरकेएसडी एजुकेशन कॉलेज

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जाट एजुकेशन कॉलेज

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डॉ. बी.आर. आंबेडकर राजकीय कॉलेज

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आईजी महिला कॉलेज

गुहला, कलायत और पूंडरी में महिला कॉलेज

खेलों में इन्होंने बढ़ाया मान



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हरविंद्र सिंह : पैरा एशियन स्वर्ण पदक

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अर्जुन अवार्डी बाक्सिंग : मनोज कुमार

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ममता सौदा : पद्मश्री (पर्वतारोहण)

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मनीषा मोण : बाक्सर - पीएम से मिलीं
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