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Kaithal News: डायरिया से बचाने के लिए बनाए ओआरएस सेंटर
Tue, 10 Jun 2025 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 10 Jun 2025 01:21 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में गर्मियों के मौसम में डायरिया जैसी बीमारियों से बच्चों को बचाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेष अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत 30 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों में ओआरएस सेंटर स्थापित किए गए हैं, जहां बच्चों को ओआरएस घोल मुफ्त वितरित किया जा रहा है। साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी ऐसे विशेष डायरिया कॉर्नर बनाए गए हैं।
डोर-टू-डोर सर्वे और जागरूकता अभियान ः स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांवों और शहरी वार्डों में विशेष स्वास्थ्य टीमों का गठन किया गया है। इन टीमों में हेल्थ वर्कर, आशा वर्कर आदि घर-घर जाकर डायरिया से बचाव के उपाय बता रहे हैं और संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेकर जांच भी करवा रहे हैं।
डायरिया का सीजन और सतर्कता ः अधिकारियों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर तक डायरिया का मौसम होता है। इस दौरान हर वर्ष विशेष अभियान चलाकर लोगों को बीमारी से बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी जाती है।
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नागरिक अस्पताल में अलग से वार्ड की व्यवस्था की गई है और ओपीडी में चिकित्सकों को
विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग पूरी गंभीरता से काम कर रहा है। हर गांव और वार्ड में दो से तीन टीमों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो नियमित रूप से जागरूकता अभियान और निगरानी कार्य कर रही हैं। सरकारी अस्पतालों में डायरिया की जांच और उपचार पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध है।
लोगों से अपील है कि बीमारी के लक्षण नजर आने पर जिला नागरिक अस्पताल व ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में जाकर जांच करवाएं। जांच व इलाज पूरी तरह से निशुल्क है। जहां पर डेंगू के लार्वा मिलते हैं, उन्हें नोटिस दिए जा रहे हैं। -डाॅ. नीरज मंगला, डिप्टी सिविल सर्जन
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कैथल। जिले में गर्मियों के मौसम में डायरिया जैसी बीमारियों से बच्चों को बचाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग की ओर से विशेष अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत 30 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों में ओआरएस सेंटर स्थापित किए गए हैं, जहां बच्चों को ओआरएस घोल मुफ्त वितरित किया जा रहा है। साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी ऐसे विशेष डायरिया कॉर्नर बनाए गए हैं।
डोर-टू-डोर सर्वे और जागरूकता अभियान ः स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांवों और शहरी वार्डों में विशेष स्वास्थ्य टीमों का गठन किया गया है। इन टीमों में हेल्थ वर्कर, आशा वर्कर आदि घर-घर जाकर डायरिया से बचाव के उपाय बता रहे हैं और संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेकर जांच भी करवा रहे हैं।
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डायरिया का सीजन और सतर्कता ः अधिकारियों के अनुसार, अप्रैल से सितंबर तक डायरिया का मौसम होता है। इस दौरान हर वर्ष विशेष अभियान चलाकर लोगों को बीमारी से बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी जाती है।
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नागरिक अस्पताल में अलग से वार्ड की व्यवस्था की गई है और ओपीडी में चिकित्सकों को
विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग पूरी गंभीरता से काम कर रहा है। हर गांव और वार्ड में दो से तीन टीमों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो नियमित रूप से जागरूकता अभियान और निगरानी कार्य कर रही हैं। सरकारी अस्पतालों में डायरिया की जांच और उपचार पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध है।
लोगों से अपील है कि बीमारी के लक्षण नजर आने पर जिला नागरिक अस्पताल व ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में जाकर जांच करवाएं। जांच व इलाज पूरी तरह से निशुल्क है। जहां पर डेंगू के लार्वा मिलते हैं, उन्हें नोटिस दिए जा रहे हैं। -डाॅ. नीरज मंगला, डिप्टी सिविल सर्जन