{"_id":"60144f048ebc3ef8da3817d4","slug":"once-weakening-in-the-villages-kaithal-news-knl592948172","type":"story","status":"publish","title_hn":"गांव दर गांव हो रही हैं पंचायतें, किल्ले के हिसाब से हो रही है गाई....","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गांव दर गांव हो रही हैं पंचायतें, किल्ले के हिसाब से हो रही है गाई....
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गणतंत्र दिवस पर लालकिले की घटना के बाद कैथल में कमजोर पड़ रहे आंदोलन ने एकबार फिर रफ्तार पकड़ी है। वीरवार रात गांव दर गांव फैले संदेश से कई गांवों में लोग एकजुट हुए और शुक्रवार को पंचायतें हुईं। इसमें एक किल्ले पर 200 रुपये व रिटायर्ड कर्मचारियों से 500 रुपये के सहयोग के लिए ड्यूटियां लगाई गईं। साथ ही कई गांवों में से राशन सामग्री लेकर भी किसान दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं।
कैथल की पिछले करीब दो महीने से ही दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन में सक्रिय भागीदारी चल रही है। यही कारण है कि सरकार ने कैथल को भी उन जिलों में शामिल किया है, जहां मोबाइल इंटरनेट पर रोक लगाई गई है। गणतंत्र दिवस पर लालकिले की घटना के बाद कैथल में भी किसान आंदोलन को लेकर सहानुभूति कुछ कम होती दिखाई दी और आम जनमानस को भी लगने लगा था कि आंदोलन कमजोर होगा। लेकिन एकाएक वीरवार सायं गाजीपुर बॉर्डर पर हुई हलचल के बाद जिले में युवाओं की सक्रियता बढ़ गई। रात भर कैथल जिले से युवा सूचनाओं का आदान-प्रदान करते रहे और रात भर चली सोशल मीडिया मुहिम का परिणाम आया कि शुक्रवार को जिले के अनेकों गांवों में पंचायतें हुईं।
गांव तितरम में हुई एक पंचायत में आंदोलन में सहयोग के लिए प्रति एकड़ 200 रुपये के हिसाब से गांव से उगाही करने का फैसला लिया गया। साथ ही रिटायर्ड कर्मचारियों से भी सहयोग राशि एकत्रित करने का फैसला हुआ। इसी प्रकार से गांव प्यौदा में भी एक पंचायत हुई। जिसमें प्रति किल्ला 200 रुपये के हिसाब से उगाही व सेवानिवृत्त कर्मचारियों से भी सहयोग राशि एकत्रित करने का फैसला लिया गया। गांव बड़सीकरी में लगभग दो दर्जन किसान दिल्ली के लिए रवाना हुए। गांव लांबाखेड़ी से छह ट्रैक्टरों में कई दर्जन लोग, चीका से एक बस, चार गाड़ियों में 5 दर्जन लोग, गांव चंदाना में तीन ट्रैक्टरों में करीब 2 दर्जन लोग, इसके अलावा सीवन में भी एक पंचायत में दिल्ली किसान आंदोलन में हर संभव सहयोग का फैसला लिया गया। गांव जुलनी खेड़ा से भी लोग रवाना हुए। गांव सीवन के मांडी सदरां से एक ट्राली में राशन सामग्री लेकर सिंघु बॉर्डर के लिए रवाना हुए। गांव कौलेखां से दो ट्रैक्टर रवाना हुए। गांव बालू से करीब 50 से अधिक व्यक्ति आधा दर्जन वाहनों में दिल्ली के लिए रवाना हुए। गांव तितरम से दो ट्रैक्टर-ट्रालियों में खाद्य सामग्री, सारण से ट्रैक्टर-ट्रालियों में लोग रवाना हुए।
विज्ञापन
किसान आंदोलन में शुरू से ही सक्रिय और नौकरी छोड़ चुके मनजीत करोड़ा ने कहा कि किसान आंदोलन कमजोर नहीं हुआ है, बल्कि राकेश टिकैत के आंसुओं ने इसे मजबूत कर दिया है। शनिवार को ही कैथल से 5000 की संख्या में ट्रैक्टर लेकर युवा दिल्ली के लिए रवाना होंगे। रही बात आगे आंदोलन के कमजोर होने की, यह सवाल ही नहीं उठता।
विज्ञापन
कैथल की पिछले करीब दो महीने से ही दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन में सक्रिय भागीदारी चल रही है। यही कारण है कि सरकार ने कैथल को भी उन जिलों में शामिल किया है, जहां मोबाइल इंटरनेट पर रोक लगाई गई है। गणतंत्र दिवस पर लालकिले की घटना के बाद कैथल में भी किसान आंदोलन को लेकर सहानुभूति कुछ कम होती दिखाई दी और आम जनमानस को भी लगने लगा था कि आंदोलन कमजोर होगा। लेकिन एकाएक वीरवार सायं गाजीपुर बॉर्डर पर हुई हलचल के बाद जिले में युवाओं की सक्रियता बढ़ गई। रात भर कैथल जिले से युवा सूचनाओं का आदान-प्रदान करते रहे और रात भर चली सोशल मीडिया मुहिम का परिणाम आया कि शुक्रवार को जिले के अनेकों गांवों में पंचायतें हुईं।
विज्ञापन
गांव तितरम में हुई एक पंचायत में आंदोलन में सहयोग के लिए प्रति एकड़ 200 रुपये के हिसाब से गांव से उगाही करने का फैसला लिया गया। साथ ही रिटायर्ड कर्मचारियों से भी सहयोग राशि एकत्रित करने का फैसला हुआ। इसी प्रकार से गांव प्यौदा में भी एक पंचायत हुई। जिसमें प्रति किल्ला 200 रुपये के हिसाब से उगाही व सेवानिवृत्त कर्मचारियों से भी सहयोग राशि एकत्रित करने का फैसला लिया गया। गांव बड़सीकरी में लगभग दो दर्जन किसान दिल्ली के लिए रवाना हुए। गांव लांबाखेड़ी से छह ट्रैक्टरों में कई दर्जन लोग, चीका से एक बस, चार गाड़ियों में 5 दर्जन लोग, गांव चंदाना में तीन ट्रैक्टरों में करीब 2 दर्जन लोग, इसके अलावा सीवन में भी एक पंचायत में दिल्ली किसान आंदोलन में हर संभव सहयोग का फैसला लिया गया। गांव जुलनी खेड़ा से भी लोग रवाना हुए। गांव सीवन के मांडी सदरां से एक ट्राली में राशन सामग्री लेकर सिंघु बॉर्डर के लिए रवाना हुए। गांव कौलेखां से दो ट्रैक्टर रवाना हुए। गांव बालू से करीब 50 से अधिक व्यक्ति आधा दर्जन वाहनों में दिल्ली के लिए रवाना हुए। गांव तितरम से दो ट्रैक्टर-ट्रालियों में खाद्य सामग्री, सारण से ट्रैक्टर-ट्रालियों में लोग रवाना हुए।
विज्ञापन
किसान आंदोलन में शुरू से ही सक्रिय और नौकरी छोड़ चुके मनजीत करोड़ा ने कहा कि किसान आंदोलन कमजोर नहीं हुआ है, बल्कि राकेश टिकैत के आंसुओं ने इसे मजबूत कर दिया है। शनिवार को ही कैथल से 5000 की संख्या में ट्रैक्टर लेकर युवा दिल्ली के लिए रवाना होंगे। रही बात आगे आंदोलन के कमजोर होने की, यह सवाल ही नहीं उठता।