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Kaithal News: निजी प्रकाशकों की किताबें लगाने पर स्कूलों को नोटिस
Fri, 18 Apr 2025 01:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 18 Apr 2025 01:24 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला प्रशासन के आदेशों को न मानने पर शिक्षा विभाग ने जिले के छह स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इन स्कूलों में किताबों की दुकान खोलकर निजी प्रकाशकों की किताबें लगाने का काम करने का आरोप लगाया गया है। अब शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
गौरतलब है कि कि सरकार की तरफ से एनसीईआरटी की किताबें लगाने के बारे में सभी स्कूलों को निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद कई स्कूल संचालक निजी प्रशासकों की किताबों की बिक्री को लेकर अभिभावकों पर जोर दे रहे हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी रामदिया गागट ने बताया कि छह स्कूल संचालकों को निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाने के मामले में नोटिस दिया गया है। दो दिनों के भीतर इन्हें जवाब देना होगा।
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विभागीय नियमों के अनुसार, निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाना गलत है। परेशान अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों की ओर से तय दुकानों से ही किताबें खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है, जिसके चलते उनको पांच हजार से 10 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इस संदर्भ में डीसी ने प्रीति ने कहा था कि निजी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं वे अपने स्कूलों में एनसीआरईटी की किताबें ही लगवाएं।
डीसी ने चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य न करे।
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कैथल। जिला प्रशासन के आदेशों को न मानने पर शिक्षा विभाग ने जिले के छह स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इन स्कूलों में किताबों की दुकान खोलकर निजी प्रकाशकों की किताबें लगाने का काम करने का आरोप लगाया गया है। अब शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
गौरतलब है कि कि सरकार की तरफ से एनसीईआरटी की किताबें लगाने के बारे में सभी स्कूलों को निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद कई स्कूल संचालक निजी प्रशासकों की किताबों की बिक्री को लेकर अभिभावकों पर जोर दे रहे हैं।
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जिला शिक्षा अधिकारी रामदिया गागट ने बताया कि छह स्कूल संचालकों को निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाने के मामले में नोटिस दिया गया है। दो दिनों के भीतर इन्हें जवाब देना होगा।
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विभागीय नियमों के अनुसार, निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाना गलत है। परेशान अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों की ओर से तय दुकानों से ही किताबें खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है, जिसके चलते उनको पांच हजार से 10 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इस संदर्भ में डीसी ने प्रीति ने कहा था कि निजी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं वे अपने स्कूलों में एनसीआरईटी की किताबें ही लगवाएं।
डीसी ने चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। कोई भी निजी स्कूल अभिभावकों को निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य न करे।