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Kaithal News: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी वेंटिलेटर सुविधा नहीं
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। कोरोना महामारी के समय मरीजों की सांस बचाने के लिए मददगार साबित हुए वेंटिलेटर की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी कोई सुविधा नहीं है। कलायत और गुहला के सरकारी अस्पताल में लोगों की जान बचाने के लिए इन दोनों अस्पतालों में कोरोना के समय ही अस्थायी व्यवस्था की गई थी परंतु अब यहां पर आपातकालीन सेवाओं के लिए वेंटिलेटर की कोई सुविधा नहीं दी गई है।
गौरतलब है कि उपमंडल स्तर पर कलायत और गुहला के सरकारी अस्पताल में 50-50 बेड के अस्पताल हैं। इन दोनों ही अस्पतालों में सैकड़ों गांवों के लोग अपना इलाज करवाने के लिए पहुंचते हैं। परंतु यहां कोई सुविधा न होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। पूंडरी में भी 50 बेड हैं।
सीवन व राजौंद में तो स्थिति बेहद खराब है। सीवन में मात्र छह बेड हैं। जबकि सीवन गांव की आबादी 40 हजार के करीब और आसपास के 40 गांव के लोग भी यहां इलाज के लिए आते हैं। यहां पर आबादी के अनुसार वेंटिलेटर की सुविधा होनी चाहिए।
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वेंटिलेटर का यह है फायदा ः यदि किसी स्थिति में आपको सांस लेने या अपने रक्त में पर्याप्त ऑक्सीजन प्राप्त करने में बहुत कठिनाई होती है, तो मैकेनिकल वेंटिलेटर पर रखा जा सकता है, जिसे ब्रीदिंग मशीन भी कहा जाता है। इस स्थिति को श्वसन विफलता कहा जाता है। मैकेनिकल वेंटिलेटर ऐसी मशीनें हैं, जो मनुष्य के फेफड़ों में हवा को अंदर और बाहर ले जाने के लिए धौंकनी की तरह काम करती हैं। सांस लेने की समस्या गंभीर है, तो आपको सांस लेने वाली नली की ज़रूरत पड़ सकती है।
कोरोना महामारी के समय आए वेंटिलेटर इस समय जिला नागरिक अस्पताल में है। इन वेंटिलेटरों की देखभाल के लिए अलग से कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। ऐसा नहीं है कि ये खराब हो चुके हैं। आईसीयू के शुरू होने के बाद इन्हें शुरू कर दिया जाएगा। -डाॅ. रेनू चावला, सिविल सर्जन कैथल।
यह भी जानें
वेंटिलेटर पर रखे गए लोगों पर फेफड़ों के संक्रमण के लिए सावधानीपूर्वक नज़र रखी जाती है। वेंटिलेटर से जुड़े होने पर, व्यक्ति को बलगम को बाहर निकालने में कठिनाई होती है। यदि बलगम इकट्ठा हो जाता है, तो फेफड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। बलगम निमोनिया का कारण भी बन सकता है। बलगम से छुटकारा पाने के लिए, सक्शनिंग नामक प्रक्रिया की आवश्यकता होती है। यह व्यक्ति के मुंह या गर्दन के छिद्र में एक छोटी पतली ट्यूब डालकर बलगम को बाहर निकालने के लिए किया जाता है।
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कैथल। कोरोना महामारी के समय मरीजों की सांस बचाने के लिए मददगार साबित हुए वेंटिलेटर की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी कोई सुविधा नहीं है। कलायत और गुहला के सरकारी अस्पताल में लोगों की जान बचाने के लिए इन दोनों अस्पतालों में कोरोना के समय ही अस्थायी व्यवस्था की गई थी परंतु अब यहां पर आपातकालीन सेवाओं के लिए वेंटिलेटर की कोई सुविधा नहीं दी गई है।
गौरतलब है कि उपमंडल स्तर पर कलायत और गुहला के सरकारी अस्पताल में 50-50 बेड के अस्पताल हैं। इन दोनों ही अस्पतालों में सैकड़ों गांवों के लोग अपना इलाज करवाने के लिए पहुंचते हैं। परंतु यहां कोई सुविधा न होने के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। पूंडरी में भी 50 बेड हैं।
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सीवन व राजौंद में तो स्थिति बेहद खराब है। सीवन में मात्र छह बेड हैं। जबकि सीवन गांव की आबादी 40 हजार के करीब और आसपास के 40 गांव के लोग भी यहां इलाज के लिए आते हैं। यहां पर आबादी के अनुसार वेंटिलेटर की सुविधा होनी चाहिए।
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वेंटिलेटर का यह है फायदा ः यदि किसी स्थिति में आपको सांस लेने या अपने रक्त में पर्याप्त ऑक्सीजन प्राप्त करने में बहुत कठिनाई होती है, तो मैकेनिकल वेंटिलेटर पर रखा जा सकता है, जिसे ब्रीदिंग मशीन भी कहा जाता है। इस स्थिति को श्वसन विफलता कहा जाता है। मैकेनिकल वेंटिलेटर ऐसी मशीनें हैं, जो मनुष्य के फेफड़ों में हवा को अंदर और बाहर ले जाने के लिए धौंकनी की तरह काम करती हैं। सांस लेने की समस्या गंभीर है, तो आपको सांस लेने वाली नली की ज़रूरत पड़ सकती है।
कोरोना महामारी के समय आए वेंटिलेटर इस समय जिला नागरिक अस्पताल में है। इन वेंटिलेटरों की देखभाल के लिए अलग से कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। ऐसा नहीं है कि ये खराब हो चुके हैं। आईसीयू के शुरू होने के बाद इन्हें शुरू कर दिया जाएगा। -डाॅ. रेनू चावला, सिविल सर्जन कैथल।
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वेंटिलेटर पर रखे गए लोगों पर फेफड़ों के संक्रमण के लिए सावधानीपूर्वक नज़र रखी जाती है। वेंटिलेटर से जुड़े होने पर, व्यक्ति को बलगम को बाहर निकालने में कठिनाई होती है। यदि बलगम इकट्ठा हो जाता है, तो फेफड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है। बलगम निमोनिया का कारण भी बन सकता है। बलगम से छुटकारा पाने के लिए, सक्शनिंग नामक प्रक्रिया की आवश्यकता होती है। यह व्यक्ति के मुंह या गर्दन के छिद्र में एक छोटी पतली ट्यूब डालकर बलगम को बाहर निकालने के लिए किया जाता है।