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एनएचएम कर्मियों ने शुरू की हड़ताल, मरीज हुए बेहाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jun 2022 02:24 AM IST
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NHM workers started strike, patients were helpless
नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) कर्मियों ने सोमवार को तीन दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी। हड़ताल के कारण मरीजों को काफी परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। सबसे ज्यादा परेशानी जच्चा-बच्चा वार्ड भर्ती मरीजों को उठानी। इसी प्रकार से सड़क हादसों को छोड़कर ऑपरेशन व अन्य मरीजों के लिए एंबुलेंस सेवा भी बंद रही। जिससे मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हड़ताल अभी दो दिन और चलनी है। जिससे परेशानियां बढ़नी तय हैं। कर्मचारी अपनी वेतन सहित अन्य मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं।
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एनएचएम कर्मचारियों ने विभाग पर वेतन नियमों में संशोधन करने का आरोप लगाया है। इन कर्मचारियों का कहना है कि यदि वेतन के नियमों में संशोधन होता है तो उनका वेतन आधा हो जाएगा। हड़ताल के कारण जिला नागरिक अस्पताल में व्यवस्थाएं चरमरा गई। मरीजों को एंबुलेंस नहीं मिल पाई। इसके साथ ही टीकाकरण भी नहीं हो पाया। सबसे अधिक समस्या जच्चा-बच्चा वार्ड में रही। यहां पर जांच के लिए पहुंची गर्भवती महिलाएं अपनी जांच नहीं करवा सकीं। यहां पर नर्सिंग ऑफिसर बहुत कम तैनात थीं। वहीं, निक्कू वार्ड में नर्सिंग ऑफिसर नहीं पहुंचीं।
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एंबुलेंस के सभी चालक भी हड़ताल पर रहे। हड़ताल में केवल इमरजेंसी सेवाएं ही चलीं। इस दौरान कुल 27 एंबुलेंस में से केवल चार एंबुलेंस ही चलाई गई। एंबुलेंस न चलने से एंबुलेंस के कंट्रोल रूम में मरीज एंबुलेंस संबंधी जानकारी लेने के पहुंचे। परंतु उन्हें केवल निराशा ही हाथ लगी।
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निजी वाहन में मरीज को लेकर जाना पड़ा
डिलीवरी केस को लेकर एंबुलेंस की जानकारी लेने पहुंची गांव डीग निवासी सोनिया ने बताया कि उसकी बहन उषा की डिलीवरी हुई है। जिसे सुबह के समय छुट्टी मिली थी। नियमानुसार डिलीवरी केस में मरीज को डिस्चार्ज करने के लिए एंबुलेंस छोड़ने जाती है। परंतु हड़ताल के कारण उन्हें निजी गाड़ी में मरीज को लेकर जाना पड़ा।
विभाग को पहले से ही प्रबंध करना चाहिए
गांव सांघन निवासी रेनू के परिजन संदीप ने बताया कि हड़ताल के कारण उन्हें एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिली है। जिसके चलते उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है। हड़ताल के चलते विभाग को पहले से ही प्रबंध करना चाहिए। ताकि मरीजों को दिक्कतें न उठानी पड़े।
अधिक रुपये देकर गाड़ी की व्यवस्था करनी पड़ी
गांव मंडवाल निवासी अजीत सिंह ने बताया कि उसकी पत्नी मनजीत कौर पिछले कई दिन से अस्पताल में दाखिल थी। उसका ऑपरेशन हुआ था। उसे सोमवार को छुट्टी मिली। हड़ताल के कारण एंबुलेंस नहीं मिली। जिस कारण से ही उन्हें अधिक रुपये खर्च कर निजी गाड़ी करनी पड़ी।
गर्भवती महिलाएं जांच के लिए करतीं रही इंतजार
एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के कारण गायनी वार्ड में गर्भवती महिलाओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। जिला नागरिक अस्पताल में बनाए गए गायिनी वार्ड में केवल दो ही नर्सिंग ऑफिसर होने की स्थिति में यहां पूरा दिन भीड़ का आलम रहा। यहां पर जांच के लिए पहुंची गर्भवती महिलाओं को कई घंटे इंतजार करना पड़ा। यहां जांच कराने पहुंची सुदेश रानी ने बताया कि वह सुबह नौ बजे ही अस्पताल में पहुंच गई थी, लेकिन हड़ताल के कारण दो घंटे के बाद उसकी जांच हुई। यहां पर गर्मी में काफी अधिक दिक्कत हुई। उधर, महिला सुमन ने कहा कि यहां पर व्यवस्था बनाने का भी कोई प्रयास नहीं किया गया है। जिस कारण कठिनाई का सामना करना पड़ा।

पहले दिन 361 कर्मचारी हड़ताल में हुए शामिल
एनएचएम योजना के तहत जिले में 468 कर्मचारी कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों की तरफ से शुरू की गई तीन दिनी हड़ताल के पहले दिन 361 कर्मचारी हड़ताल पर रहे। इसमें 41 लैब टेक्नीशियन भी शामिल हैं। एनएचएम कर्मचारी संघ की तरफ से जिला नागरिक अस्पताल के बाहर धरना दिया गया। जो लगातार तीन दिन तक जारी रहेगा। संघ के प्रधान हरदीप सिंह ने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पिछले वर्ष नवंबर में एनएचएम कर्मचारियों को कोरोना योद्धा घोषित करते हुए सातवें वेतन का लाभ देने का निर्णय लिया था। परंतु आठ महीने के बाद भी इसे लागू नहीं किया गया है। दूसरा निदेशक वेतन के नियमों के संशोधन करने का एक पत्र जारी किया है। इसके लागू होने के बाद कर्मचारियों का वेतन कम होगा। डिप्टी सिविल सर्जन एवं एनएचएम के जिला संयोजक डॉ. बलविंद्र गर्ग ने बताया कि जिले में एनएचएम के 361 कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए। इसमें नर्सिंग ऑफिसर, लैब टेक्नीशियन, एंबुलेंस चालक शामिल हुए। हड़ताल को लेकर अतिरिक्त स्टाफ सदस्यों की ड्यूटी लगाकर व्यवस्था बनाई गई है। एंबुलेंस सेवाओं में इमरजेंसी सेवा प्रभावित नहीं होने दी गई।
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